Ambikapur: Husbands Brutality After Murdering Pregnant Wife: सरगुजा:अंबिकापुर (16 मई 2026): छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक पति ने अपनी 7 माह की गर्भवती पत्नी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना के बाद जिस तरह अस्पताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सच सामने आया, उसने पूरे इलाके को दहला दिया। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पुलिस और स्थानीय जानकारी के मुताबिक यह वारदात सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम जाएगा कटरापारा की है। आरोपी पति राजूदास अपनी पत्नी के मायके जाने से नाराज था। बताया गया कि घटना वाले दिन वह काम पर गया था, इसी बीच पत्नी बिना बताए अपने मायके चली गई। इसी बात से गुस्साए पति ने घर लौटने के बाद पत्नी से विवाद किया और फिर उस पर बेरहमी से डंडे से हमला कर दिया।
हमले में महिला बुरी तरह घायल हो गई। परिजनों और ग्रामीणों की मदद से उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यही वह मोड़ था, जहां इस मामले का बड़ा सच सामने आया। अस्पताल में हुई जांच और बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया कि महिला के शरीर पर गंभीर चोटों के कई निशान थे और उसकी मौत पिटाई से हुई थी।
पोस्टमार्टम में यह भी सामने आया कि मृतका 7 महीने की गर्भवती थी और उसके पेट में पल रहा शिशु भी मृत पाया गया। इस खुलासे ने मामले को और भी दर्दनाक बना दिया। एक ही हमले में मां और अजन्मे बच्चे दोनों की मौत हो गई। डॉक्टरों की रिपोर्ट ने यह भी पुष्टि की कि शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें थीं, जिससे साफ था कि महिला को बुरी तरह पीटा गया था।
घटना की सूचना मिलते ही सीतापुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे न्यायिक रिमांड पर अंबिकापुर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है ताकि घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकें।
Ambikapur: Husbands Brutality After Murdering Pregnant Wife
स्थानीय लोगों के अनुसार यह परिवार पहले भी घरेलू विवादों की वजह से चर्चा में था। हालांकि इस बार विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया और एक गर्भवती महिला की जान चली गई। गांव में इस वारदात के बाद सन्नाटा है और लोग आरोपी के प्रति गहरी नाराजगी जता रहे हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी क्रूरता की कल्पना भी नहीं की जा सकती, खासकर जब महिला गर्भवती हो।
यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि घरेलू हिंसा की चरम सीमा का उदाहरण बन गया है। शराब, गुस्सा, शक या पारिवारिक तनाव जैसी वजहें अक्सर ऐसे अपराधों के पीछे बताई जाती हैं, लेकिन नतीजा हमेशा एक ही होता है—एक परिवार तबाह हो जाता है। इस घटना ने फिर से सवाल खड़ा कर दिया है कि घरेलू विवादों को समय रहते सुलझाने के लिए सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर और प्रभावी तंत्र क्यों नहीं है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और घटना में इस्तेमाल किए गए डंडे समेत अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान को जांच का अहम आधार बनाया गया है। प्रारंभिक जांच में साफ है कि यह सामान्य झगड़ा नहीं बल्कि जानलेवा हमला था।
अंबिकापुर की यह घटना एक बार फिर बताती है कि घरेलू हिंसा कितनी भयावह हो सकती है। जब घर के भीतर भरोसे की जगह हिंसा पनपती है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं और बच्चों को उठाना पड़ता है। इस मामले में एक गर्भवती महिला की जान चली गई और उसके साथ एक अजन्मे बच्चे की जिंदगी भी खत्म हो गई।
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