Sarguja: Extortion Racket Operating in the Name of Human Rights Busted: सरगुजा:अंबिकापुर: 23 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक फर्जी मानव अधिकार संगठन के नाम पर वसूली करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। सीतापुर थाना पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उनके कब्जे से 5 हजार रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल की गई इनोवा कार जब्त की गई. यह कार्रवाई डीआईजी व एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में हुई, जो जिले में बढ़ती धोखाधड़ी की घटनाओं पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दोपहर करीब 12:30 बजे ग्राम नकना के निवासी सुरेंद्र कुमार के घर 6 लोग इनोवा कार से पहुंचे। उन्होंने खुद को मानव अधिकार संगठन के सदस्य बताते हुए घर में घुस गए और घर में शराब बनाने का झूठा आरोप लगाया। आरोपियों ने 20 हजार रुपये की मांग की तथा केस में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी। डर के मारे पीड़ित ने उन्हें 4 हजार रुपये दे दिए, लेकिन बाद में उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस ने शिकायत मिलते ही विशेष टीम गठित की। तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की सूचना पर आरोपियों को ट्रैप कर लिया गया। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह पिछले कई महीनों से सरगुजा के ग्रामीण इलाकों में इसी तरह की ठगी कर रहा था। वे फर्जी आईडी कार्ड दिखाते, वीडियो बनाते और सोशल मीडिया पर डालकर ब्लैकमेल करते थे। गिरोह सरगुजा, सूरजपुर और कोरबा जिलों में सक्रिय था.
गिरफ्तार 6 आरोपियों में मुख्य रूप से सुरेंद्र कुमार गैंग के सदस्य शामिल हैं, जिनमें ग्राम नकना के ही कुछ स्थानीय युवक हैं। पुलिस ने उनके पास से 5 हजार नकद रुपये, फर्जी मानव अधिकार संगठन के आईडी कार्ड, 2 मोबाइल फोन और इनोवा कार (नंबर CG-12 XYZ 1234) जब्त की। कार वारदातों में मुख्य साधन थी, जिसे किराए पर लिया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने 6 महीने में 15 से ज्यादा परिवारों से 2 लाख रुपये से अधिक वसूल लिए.
एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि गिरोह के सरगना का नाम अभी गुप्त है, लेकिन वह जिले के बाहर रहता है। आरोपियों के खिलाफ IPC धारा 384 (वसूली), 506 (आपराधिक धमकी), 420 (धोखाधड़ी) और 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी को 23 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
Sarguja: Extortion Racket Operating in the Name of Human Rights Busted
यह गिरोह सोशल मीडिया और लोकल इश्यूज का फायदा उठाता था। वे गांवों में जाकर घरों की रेकी करते, छोटे-मोटे विवाद ढूंढते जैसे शराबबंदी उल्लंघन या बाल मजदूरी। फिर फर्जी संगठन बनकर पहुंचते, वीडियो बनाते और पैसे मांगते। मना करने पर थाने में केस करने और मीडिया में बदनाम करने की धमकी देते। ज्यादातर पीड़ित गरीब ग्रामीण थे, जो डर के कारण चुप रहते। पुलिस को 3 और शिकायतें मिल चुकी हैं।
पिछले साल सरगुजा में इसी तरह के कई मामले सामने आए थे। जनवरी 2025 में धमकी देकर 10 लाख वसूली के मामले में 11 आरोपी पकड़े गए थे, जहां हथियार भी बरामद हुए. ठगी गैंग्स नौकरी या काम के नाम पर भी सक्रिय रहे।
सीतापुर थाना प्रभारी ने 24 घंटे के अंदर कार्रवाई पूरी की, जो सरगुजा पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है। डीआईजी ने कहा कि जिले में फर्जी संगठनों पर नजर रखी जा रही है। विशेष साइबर सेल टीम गठित की गई है, जो सोशल मीडिया मॉनिटरिंग करेगी। ग्रामीणों से अपील की गई कि फर्जी कॉल या विजिट पर तुरंत थाने सूचित करें। यह सफलता नवा विहान अभियान का हिस्सा है।
मानव अधिकार संगठनों ने बयान जारी कर असली कार्यकर्ताओं की छवि खराब करने का विरोध किया। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कैंप जरूरी हैं।
सरगुजा आदिवासी बहुल जिला है, जहां शिक्षा का स्तर कम होने से लोग ठगों का शिकार बनते हैं। पिछले 2 साल में 50 से ज्यादा वसूली मामले दर्ज हुए। पीडीएस चोरी गैंग, मानव तस्करी और बाइक चोरी जैसे गिरोह सक्रिय रहे. पुलिस ने विशेष ड्राइव चलाई, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां बरकरार हैं। डिजिटल इंडिया से ग्रामीण सशक्त हो रहे, लेकिन फर्जी ऐप्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स नई समस्या हैं।
यह गिरफ्तारी वसूली गैंग को तो तोड़ देगी, लेकिन नए गिरोह उभर सकते हैं। प्रशासन को थाना स्तर पर हेल्पलाइन और वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना चाहिए। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलें। कोर्ट में तेज सुनवाई से नजीर बनेगी। सरगुजा पुलिस की यह सफलता पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा है।
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