Ambikapur: Halla Bol Protest Against Action Taken Against Swarang Kids Academy: सरगुजा:अंबिकापुर: 20 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में सरगुजिहा बोली बोलने वाले बच्चे को एडमिशन न देने के आरोप में स्वरंग किड्स एकेडमी पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और स्कूल का संचालन स्थगित कर दिया। इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने ‘हल्ला बोल’ अभियान चलाकर स्कूल प्रबंधन का समर्थन किया और प्रशासनिक फैसले को अन्यायपूर्ण बताया। यह विवाद स्थानीय भाषा और शिक्षा नीति पर नई बहस छेड़ रहा है।
चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी पर आरोप लगा कि एक नर्सरी छात्र को केवल इसलिए एडमिशन नहीं दिया गया क्योंकि वह सरगुजिहा बोली में बात करता था। बच्चे के पिता ने स्कूल प्रबंधन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर के निर्देश पर DEO ने 17 अप्रैल को स्कूल प्राचार्य और प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जांच में पाया गया कि स्कूल बिना मान्यता के चल रहा था और भेदभाव की घटना सिद्ध हुई।
DEO ने 18 अप्रैल को आदेश जारी कर स्कूल पर 1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया और संचालन तत्काल स्थगित कर दिया। इसके अलावा, स्कूल के सभी छात्रों को अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा, “शिक्षा में भाषाई भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना मान्यता के संचालन पर सख्ती जरूरी है।”
कैलाश मिश्रा का आंदोलन: ‘हल्ला बोल’ अभियान
इस कार्रवाई के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्कूल प्रबंधन का बचाव करते हुए कहा कि आरोप निराधार हैं और DEO की जांच पक्षपातपूर्ण थी। मिश्रा ने स्थानीय लोगों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों को एकजुट कर ‘हल्ला बोल’ अभियान शुरू किया। 19 अप्रैल को चोपड़ापारा में विरोध सभा आयोजित की गई, जहां नारेबाजी हुई और प्रशासन के खिलाफ ज्ञापन सौंपा गया।
कैलाश मिश्रा, जो अंबिकापुर में विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं, ने कहा, “यह कार्रवाई स्कूल को बंद करने की साजिश है। सरगुजिहा बोली हमारी पहचान है, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है। स्कूल ने भाषा के कारण एडमिशन रोका ही नहीं। DEO को जवाब दिया गया था, फिर भी फैसला लिया गया।” उन्होंने मांग की कि जुर्माना वापस हो और स्कूल को राहत दी जाए। सभा में 200 से अधिक लोग शामिल हुए।
Ambikapur: Halla Bol Protest Against Action Taken Against Swarang Kids Academy
विरोध प्रदर्शन चोपड़ापारा से शुरू होकर शहर के मुख्य बाजार तक पहुंचा। कार्यकर्ताओं ने बैनर, पोस्टर और नारे लगाए। ‘स्कूल बचाओ, शिक्षा बचाओ’, ‘भेदभाव विरोधी कानून का दुरुपयोग बंद करो’ जैसे नारे गूंजे। कैलाश मिश्रा ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिलेगा। स्थानीय अभिभावकों ने समर्थन दिया, क्योंकि कई बच्चे स्कूल से प्रभावित हुए हैं।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। कोई हिंसा नहीं हुई, लेकिन मिश्रा ने चेतावनी दी कि अगर स्कूल बंद रहा तो बड़ा आंदोलन होगा। सोशल मीडिया पर #SaveSwarangKidsAcademy हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। कई यूजर्स ने भाषा नीति पर बहस छेड़ी।
DEO ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल भेदभाव पर नहीं, बल्कि बिना मान्यता के संचालन पर भी हुई। जांच रिपोर्ट में स्कूल प्रबंधन के बयान दर्ज हैं, जो घटना की पुष्टि करते हैं। कलेक्टर ने कहा, “शिक्षा विभाग पारदर्शी कार्रवाई कर रहा है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।” जिला प्रशासन ने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण विरोध की अपील की।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरगुजिहा जैसी स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन स्कूलों में हिंदी-अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य है। इस मामले ने स्थानीय भाषा संरक्षण पर बहस छेड़ दी। आदिवासी संगठनों ने समर्थन जताया।
आंदोलन के वीडियो यूट्यूब और फेसबुक पर वायरल हो गए। एक वीडियो में कैलाश मिश्रा भाषण देते दिख रहे हैं, जिसे हजारों ने देखा। स्थानीय मीडिया ने कवरेज किया। कुछ ने कार्रवाई को सही बताया, तो कुछ ने विरोध को जायज। अभिभावक समिति ने कहा, “स्कूल अच्छा था, बंद होना गलत है।”
राजनीतिक दलों ने भी टिप्पणियां कीं। विपक्ष ने प्रशासन पर निशाना साधा। यह विवाद अंबिकापुर की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
स्कूल का इतिहास और प्रभावित बच्चे
स्वरंग किड्स एकेडमी 2022 से चल रही थी, जिसमें 50 से अधिक बच्चे पढ़ते थे। नर्सरी से किंडरगार्टन तक कक्षाएं थीं। बंदी से अभिभावक परेशान हैं। DEO ने पड़ोसी स्कूलों में एडमिशन सुनिश्चित करने को कहा। प्रबंधन ने अपील दायर करने की योजना बनाई।
कैलाश मिश्रा ने 22 अप्रैल को बड़ा धरना घोषित किया। प्रशासन बातचीत को तैयार है। मामला कोर्ट जा सकता है। यह घटना शिक्षा में भाषाई समावेशिता पर नई चर्चा पैदा कर रही है। सरगुजा क्षेत्र में स्थानीय बोलियों के संरक्षण की मांग तेज हो गई।
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