सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो जाति प्रमाणपत्र विवाद: हाईकोर्ट ने 90 दिनों में फैसला देने के सख्त निर्देश : Sitapur MLA Ramkumar Toppo Caste Certificate Dispute

Uday Diwakar
6 Min Read
  • यह विवाद 2023 से क्यों चल रहा था और अब अचानक कोर्ट ने हस्तक्षेप क्यों किया?
  • रामकुमार टोप्पो को कब और किस आधार पर ST जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था?
  • इस मामले से छत्तीसगढ़ में आरक्षण व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
  • 90 दिनों बाद फैसले के संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं?
  • बीजेपी ने इस मामले पर आधिकारिक क्या प्रतिक्रिया दी है?
  • यदि प्रमाणपत्र फर्जी साबित हुआ तो टोप्पो की विधायकी पर क्या असर पड़ेगा?

Sitapur MLA Ramkumar Toppo Caste Certificate Dispute: सरगुजा:​​​अंबिकापुर: 16 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ की सियासत में सरगुजा जिले की सीतापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो का जाति प्रमाणपत्र विवाद एक बार फिर गरमाया हुआ है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को 90 दिनों के अंदर जांच पूरी कर फैसला सुनाने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल रहा था, जिस पर कोर्ट ने फौरन सुनवाई के आदेश दिए।

यह विवाद 19 सितंबर 2023 को तब शुरू हुआ जब लैलूंगा एसडीएम कार्यालय से रामकुमार टोप्पो को अनुसूचित जनजाति (ST) का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया। जनजाति सुरक्षा मंच के जिला संयोजक बिहारी लाल तिर्की ने 21 अक्टूबर 2023 को रायगढ़ जिला छानबीन समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दस्तावेजों में अनियमितताओं का आरोप लगाया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रमाणपत्र बिना उचित सेटलमेंट और जांच के जारी हुआ, जो नियमों के विरुद्ध है।

विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद त्वरित कार्रवाई के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका (क्रमांक 4587/2023) दायर की गई। कोर्ट ने समिति को विधि अनुसार जांच के निर्देश दिए, लेकिन दो वर्ष बीतने पर कोई प्रगति न होने से दूसरी याचिका दायर हुई। 2 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने यह सख्त फैसला सुनाया।

कोर्ट के सख्त निर्देश

हाईकोर्ट ने रायगढ़ कलेक्टर और समिति को स्पष्ट हिदायत दी कि बिना किसी देरी के 90 दिनों में जांच पूरी कर अंतिम निर्णय लें। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है, वरना आरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। याचिका में अधिवक्ता अनुराग सिंह और ऋषिराज सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, दस्तावेज संकलन से लेकर पैरवी तक।

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यह आदेश डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर जारी हुआ, जिसे याचिकाकर्ताओं ने न्यायपालिका के संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। अब जिला प्रशासन पर दबाव है, क्योंकि देरी होने पर contempt की स्थिति बन सकती है।

विधायक का पक्ष

रामकुमार टोप्पो ने विवाद को राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, “चुनाव से ही विरोधी हाईकोर्ट में केस लगाए बैठे हैं। कोर्ट ने समिति को जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन शिकायतकर्ता कोई ठोस दस्तावेज नहीं दिखा पाए। यह मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश है।” टोप्पो का दावा है कि उनका प्रमाणपत्र वैध है और वे सभी जरूरी प्रमाण जमा कर चुके हैं। बीजेपी नेताओं ने भी इसे विपक्षी दलों की चाल बताया है।

सीतापुर विधानसभा सरगुजा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां ST आरक्षित सीट पर टोप्पो 2023 चुनाव में जीते। यह विवाद उनकी जीत के बाद से चल रहा है, जब जनजाति संगठनों ने उनके जनजातीय मूल को चुनौती दी। छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाणपत्र विवाद आम हैं, खासकर राजनीतिक हस्तियों के मामले में। पिछले वर्षों में कई विधायकों के प्रमाणपत्र रद्द भी हुए हैं।

जनजाति सुरक्षा मंच जैसे संगठन आरक्षण के दुरुपयोग पर नजर रखते हैं। तिर्की ने प्रेस वार्ता में कहा कि ऐसे मामले जनजाति समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इसे उठाया है, लेकिन बीजेपी ने इसे व्यक्तिगत हमला बताया।

जांच प्रक्रिया

जिला समिति अब दस्तावेजों की गहन छानबीन करेगी—परिवार रजिस्टर, जन्म प्रमाण, स्थानीय सत्यापन और ऐतिहासिक रिकॉर्ड शामिल। यदि फर्जी पाया गया तो विधायकी पर खतरा मंडरा सकता है, क्योंकि SC/ST एक्ट के तहत सजा हो सकती है। प्रशासन ने गोपनीयता बनाए रखने का आश्वासन दिया है, ताकि जांच प्रभावित न हो।

सरगुजा में जनजातीय आबादी बहुल है, और आरक्षण मुद्दे संवेदनशील हैं। यह मामला अन्य विधायकों के लिए उदाहरण बन सकता है। स्थानीय मीडिया में बहस छिड़ी है—क्या प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में सुधार जरूरी? विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सत्यापन और त्वरित समितियां बनानी चाहिए।

Sitapur MLA Ramkumar Toppo Caste Certificate Dispute

90 दिनों में फैसला आने पर सियासत गरमाएगी। यदि प्रमाणपत्र वैध रहा तो टोप्पो की स्थिति मजबूत, वरना उपचुनाव की नौबत। कोर्ट का यह कदम आरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने वाला है। ग्रामीण सरगुजा में लोग न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। बिहारी लाल तिर्की ने कहा, “न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ा है।”

यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां जाति और आरक्षण हमेशा केंद्र में रहते हैं। जिला प्रशासन अब टाइमलाइन पर काम करेगा, और सभी की नजरें 90 दिनों पर।

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