Elephant Rampage in Surajpur: सूरजपुर : 16 अप्रैल 2026: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथी के हमले से एक युवक की मौत हो गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। घटना के बाद नाराज ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा मचाया।
प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के दरहोरा या आसपास के इलाके में जंगली हाथी ने अचानक हमला कर 35 वर्षीय युवक को कुचल दिया। युवक घर के बाहर या आंगन में बैठा था, जब हाथी ने वार किया, जिससे वह मौके पर ही दम तोड़ दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इलाका हाथियों के विचरण का केंद्र बन चुका है, और पिछले एक सप्ताह में ही पांचवीं मौत दर्ज की गई है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा इतना भड़क चुका था कि उन्होंने रेंजर के साथ धक्कामुक्की तक कर दी। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें कई ग्रामीण घायल हो गए, और ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उनकी मुख्य मांगें हैं- मृतक के परिवार को तत्काल मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, और हाथियों को दूर करने के लिए ठोस कदम। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वन विभाग की चेतावनियां बेकार हैं, क्योंकि हाथी घरों के अंदर तक घुस आते हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “घर के आंगन में बैठे पिता-पुत्री पर हमला हुआ, पिता की तो मौत हो गई, बेटी गंभीर रूप से घायल है।”
इस महीने प्रतापपुर क्षेत्र में ही चार लोगों की हाथी हमले से मौत हो चुकी है। सूरजपुर और आसपास के सरगुजा संभाग में हाथियों का आतंक पिछले कई वर्षों से जारी है, जिसमें दर्जनों मौतें हो चुकी हैं।
Elephant Rampage in Surajpur
वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि हाथी दल के मूवमेंट की निगरानी की जा रही है। विभाग का दावा है कि इंसान-हाथी द्वंद्व को रोकने के प्रयास चल रहे हैं। वन मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने भी बयान दिया कि इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, ग्रामीणों का विश्वास विभाग पर कम हो गया है। कप्सरा सिराही बोर्ड जैसी जगहों पर भी हाल ही में दंपति की मौत हुई, जब वे खलिहान में सो रहे थे। विभाग ने हाथियों को जंगल में खदेड़ने के लिए ड्रोन और पटाखों का इस्तेमाल करने की बात कही, लेकिन ये उपाय अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
सूरजपुर जिला छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का हिस्सा है, जहां घने जंगल और फसल क्षेत्रों के कारण हाथी-मानव संघर्ष आम हो गया है। पिछले 7 वर्षों में सरगुजा संभाग में 63 हाथियों की मौत हुई, जिनमें से 40 करंट से। 2025 में ही 16 हाथियों की असमय मौत दर्ज की गई। उधर, इंसानी जानें भी लगातार जा रही हैं—प्रतापपुर में ही बार-बार हमले हो रहे हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि भूखे हाथी फसलें नष्ट कर देते हैं और रात में गांवों में घुस आते हैं। रामगढ़ जैसे पड़ोसी इलाकों में भी इसी तरह के हादसे हुए। जंगलों की कटाई और खनन से हाथी अपने प्राकृतिक क्षेत्र से बाहर आ रहे हैं।
पुलिस ने प्रदर्शन को शांत किया, लेकिन ग्रामीण सड़क पर ही डटे रहे। जिला प्रशासन ने मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया। मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य लाभ देने की बात कही जा रही है, लेकिन ग्रामीण नौकरी की मांग पर अड़े हैं।
स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों ने मामले को विधानसभा में उठाने का वादा किया। वन विभाग ने विशेष टीम गठित कर हाथी दल को जंगल की ओर मोड़ने का अभियान शुरू किया। लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि दीर्घकालिक समाधान के लिए कॉरिडोर बनाना और जागरूकता जरूरी है।
हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है, और ग्रामीण रातें काटने को मजबूर हैं। यदि समय रहते कदम नहीं उठे, तो ऐसी मौतें और प्रदर्शन बढ़ेंगे। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि वन विभाग को ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय करना चाहिए।
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