महावीर जन्मोत्सव: अंबिकापुर में ‘जियो और जीने दो’ का उद्घोष, जैन समाज की भव्य शोभायात्रा में भक्तिमय उमंग : Mahavir Janmotsav in Ambikapur

Uday Diwakar
3 Min Read

Mahavir Janmotsav in Ambikapur: सरगुजा:​​​अंबिकापुर। 31 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में जैन समाज ने भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव को धूमधाम से मनाया। मुख्य आकर्षण रही भव्य शोभायात्रा, जिसमें हजारों श्रद्धालु ‘जियो और जीने दो’ के उद्घोष लगाते हुए सड़कों पर उमड़ पड़े। यह नारा जैन धर्म के अहिंसा और सह-अस्तित्व के मूल मंत्र को प्रतिबिंबित करता है।

शोभायात्रा का शुभारंभ सुबह 10 बजे अंबिकापुर के प्रमुख जैन मंदिर से हुआ। स्वर्णिम रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा विराजमान थी, जिसे सौधर्म इंद्र और कुबेर इंद्र के रूप में सजे श्रद्धालुओं ने खींचा। बैंड-बाजों की भक्ति भरी धुनों पर नृत्य करते हुए लोग आगे बढ़े। मार्ग में मनमोहक झांकियां रुकीं, जो महावीर स्वामी के जीवन प्रसंगों को जीवंत करती दिखीं। शोभायात्रा मुख्य बाजार, स्टेशन रोड और जैन भवन होते हुए पुनः मंदिर परिसर में समाप्त हुई।

शहर की सड़कें फूलों की वर्षा और भक्ति संगीत से गूंज उठीं। महिलाएं-पुरुष और बच्चे सफेद वस्त्र धारण कर शामिल हुए। स्थानीय प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जिसमें पुलिस बल तैनात रहा। आयोजकों के अनुसार, करीब 5 हजार से अधिक जैन समाजजन इसमें सम्मिलित हुए।

‘जियो और जीने दो’ का प्रेरक संदेश

शोभायात्रा के दौरान ‘जियो और जीने दो, अहिंसा परमो धर्मः’ के नारे सर्वत्र गूंजे। जैन समाज के प्रमुख नेता श्रीमती कविता जैन ने बताया कि भगवान महावीर के 24वें तीर्थंकर के रूप में यह संदेश आज के हिंसक दौर में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा, “यह नारा सभी प्राणियों के प्रति करुणा और सहिष्णुता का प्रतीक है।” समापन पर मंदिर प्रांगण में 108 कलशों से जलाभिषेक किया गया।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

आयोजन में सामाजिक सेवा भी झलकी। जैन समाज ने रास्ते में लंगर वितरण किया, जिसमें हजारों लोगों को प्रसाद बांटा गया। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया गया।

Mahavir Janmotsav in Ambikapur

अंबिकापुर में जैन समाज का यह उत्सव क्षेत्रीय एकता का प्रतीक बना। स्थानीय विधायक श्रीमान सिंह ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महावीर जन्मोत्सव शांति और अहिंसा का संदेश देता है। स्कूल-कॉलेज बंद रहे, जिससे युवा वर्ग भी सक्रिय रहा। शाम को मंदिर में विशेष पूजन और प्रवचन हुए, जहां आचार्य सौभाग्यसागर महाराज ने महावीर स्वामी के अपरिग्रह और अप्राधीन भव के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।

महोत्सव कल तक जारी रहेगा। कल भजन संध्या और श्रवणबेलगोला की तर्ज पर शांति यात्रा प्रस्तावित है। जैन समाज ने सभी से अहिंसा पालन का संकल्प दिलाया। यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक रहा।

यह भी पढ़ें-“दशकों का इंतजार खत्म! अंबिकापुर–दिल्ली–कोलकाता की पहली उड़ान, जानिए कब–कब उड़ रही फ्लाइट”

Share This Article
Leave a Comment