Violent clashes between villagers and administration in Lakhanpur over Amera coal mine expansion: सरगुजा:अंबिकापुर।अमेरा कोयला खदान विस्तार को लेकर सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड की परसोड़ी कला गांव में भारी तनाव और हिंसक संघर्ष हुआ है। यह विवाद लगभग छह माह से चलता आ रहा था, जिसमें ग्रामीण अपनी पैतृक ज़मीन बचाने के लिए अड़े हुए थे। बुधवार को खदान विस्तार कार्य शुरू करने पहुंचे प्रशासनिक दल और भारी पुलिस बल से ग्रामीणों की भिड़ंत में पत्थरबाजी, लाठी-डंडे चले और कई पुलिसकर्मी व ग्रामीण घायल हो गए। इस संघर्ष में पुलिस पर ग्रामीणों ने गुलेल और कुल्हाड़ी जैसे हथियारों से भी हमला किया, जिससे 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
ग्रामीणों का तर्क है कि खदान प्रबंधन बिना उचित भूमि अधिग्रहण और ग्राम सभा की अनुमति के बिना मनमाने तरीके से खदान का विस्तार कर रहा है। इससे उनकी खेती की जमीन नुकसान में है, पानी के स्रोत प्रभावित हो रहे हैं और पूरे क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा। यह विरोध महीनों से जारी था। विरोध जताने वाले ग्रामीण खदान क्षेत्र में मशीनों द्वारा मिट्टी की खुदाई के काम को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने विस्तार के लिए पोकलेन और भारी मशीनरी के साथ दबाव बनाया, जिससे तनाव और बढ़ गया।
हिंसक घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित करने और शांति स्थापित करने की कोशिश की। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है और विवाद के समाधान के लिए आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है। हालांकि ग्रामीण अपनी जमीन और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अनमने हैं और खदान के विस्तार के विरुद्ध अपनी आवाज जोरदार तरीके से उठा रहे हैं।
Violent clashes between villagers and administration in Lakhanpur over Amera coal mine expansion
अमेरा कोयला खदान का यह विवाद स्थानीय जनजीवन, पर्यावरण और आर्थिक संरचना पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। खदान का विस्तार जारी रहने से क्षेत्र में सामाजिक असंतोष और तनाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोग खदान के विस्तार के कारण खेती बर्बाद होने, जल स्रोतों पर प्रभाव पड़ने और प्रदूषण बढ़ने की चिंता में हैं, जिसके चलते वे लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह संघर्ष छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की ग्रामीण जनता के स्वाभिमान और अधिकार की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती सामने है। खदान विस्तार को लेकर चल रहे इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान ही क्षेत्र में स्थिरता और विकास सुनिश्चित कर सकेगा।
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