Chief Engineer of Maa Mahamaya Sugar Factory caught red-handed taking bribe: सूरजपुर :मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना केरता, सूरजपुर जिले में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने कारखाने के मुख्य अभियंता चमरू नायक को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई ने प्रशासनिक व्यवस्था, नियुक्ति प्रक्रिया, और कर्मचारियों के अधिकारों पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। यह घटना इलाके के लिए एक बड़ी खबर है तथा मिली जानकारी और एसीबी द्वारा दर्ज विवरण के अनुसार भ्रष्टाचार की जड़ों को लेकर कई तथ्य उजागर हुए हैं।
पिछले वर्ष भी प्रदीप कुमार, जो कारखाने में संविदा ऑपरेटर के तौर पर नियुक्त थे, पर इसी अभियंता ने एक लाख रुपये ‘कॉशन मनी’ के नाम पर रिश्वत मांगी थी। प्रदीप कुमार ने बताया कि उस समय उसे कोई रसीद या प्रमाण पत्र नहीं दिया गया था। पैसे देने पर नौकरी करने का मौका मिला था। इस वर्ष, जब उसकी नियुक्ति के एक साल बाद सी.आर. नायक ने फिर से पद पर बने रहने के लिए एक लाख रुपये मांगे, और न देने पर उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी। जब प्रदीप ने पैसे नहीं दिए तो उसे आठ सितंबर, 2025 को नौकरी से निकाल दिया गया।
परेशान होकर प्रदीप कुमार ने एसीबी अंबिकापुर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत का सत्यापन करते हुए एसीबी की पांच सदस्यीय टीम ने शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे ट्रैप योजना तैयार की। टीम ने शिकायतकर्ता को निर्देशित किया कि अभियंता को 50 हजार रुपये, जो रिश्वत की पहली किश्त थी, सौंपे। एसीबी ने नोटों पर विशेष केमिकल लगाया था, ताकि साक्ष्य पुख्ता हों। जैसे ही अभियंता ने रकम स्वीकार की, एसीबी की टीम ने मौके पर ही उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया और उससे संबंधित दस्तावेज व रुपये जब्त कर लिये।

Chief Engineer of Maa Mahamaya Sugar Factory caught red-handed taking bribe
घटनास्थल से अभियंता के कार्यालय और आवास की तलाशी भी ली गई। आरोपित अभियंता को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। आगे की जांच एसीबी अंबिकापुर द्वारा जारी है तथा अभियंता से पूछताछ की जा रही है।
इस पूरे मामले ने संविदा पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों के अस्तित्व और अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना में कई संविदा कर्मचारी हैं, जिन्हें नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान या पद पर बने रहने के लिए अवैध रूप से पैसे देने का दबाव रहता है। नियुक्ति, कार्यस्थल पर ठहराव, और नियमितीकरण जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के कारण कर्मचारी आये दिन परेशान होते हैं।
एसीबी अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर भविष्य में कोई अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी की गतिविधियों में लिप्त होता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और संविदा कर्मचारियों के भविष्य की रक्षा के लिए अहम हैं।

सूरजपुर जिले में एसीबी की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के मजदूर संगठनों एवं कर्मचारी संघों ने प्रशासन से मांग की है कि अन्य शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई की जाये। इस खबर ने कारखाने में रिश्वतखोरी और नियुक्तियों में वित्तीय लेनदेन को लेकर गहरी बहस छेड़ दी है।
कारखाने में काम कर रहे कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप बताते हैं कि नियुक्तियों के बदले पैसे मांगना या नौकरी में बने रहने के लिए रिश्वत देना एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी थी। कई कर्मचारियों ने यह भी शिकायत की थी कि बिना पैसे दिये उनका नियमितीकरण कभी नहीं होता। कर्मचारी अपने अधिकारों से वंचित रहते हैं और नौकरी की अनिश्चितता के कारण आर्थिक एवं मानसिक तनाव झेलते हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने मामले का पूरी तरह से पता लगाने और संभव अन्य लिप्त अधिकारियों या कर्मचारियों की पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी है। अभियंता सी.आर. नायक से पूछताछ की जा रही है ताकि यह जानने की कोशिश की जा सके कि क्या अन्य कर्मचारियों या उच्चाधिकारियों भी इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में नौकरी, नियुक्ति या नियमितीकरण जैसी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की रिश्वत या अवैध धन की मांग स्वीकार नहीं की जायेगी। एसीबी की सतर्क निगरानी से कर्मचारियों को सजग रहने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने की प्रेरणा मिली है।
कर्मचारी संघों ने इस घटना के माध्यम से सभी संविदा और स्थायी कर्मचारियों को संदेश दिया है कि वे किसी भी तरह की अवैध मांग या दबाव के शिकार हों तो तुरन्त एसीबी या संबंधित प्रशासनिक कार्यालय में शिकायत दर्ज करें।
मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना क्षेत्र के लिए यह घटना एक मिसाल बन गई है, जिससे अन्य विभागों में भी ईमानदारी, पारदर्शिता और उचित नियुक्ति प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा। यदि ऐसे संविदा उम्मीदवारों को बिना रिश्वत दिये नौकरी और नियमितीकरण मिले तो कार्यस्थल का माहौल स्वस्थ, सकारात्मक और निष्पक्ष बना रह सकता है।
इस प्रकार सूरजपुर जिले में एसीबी द्वारा की गई कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर सरकारी विभागों, श्रमिक वर्ग और समाज में ईमानदारी व पारदर्शिता का महत्व रेखांकित किया है। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का प्रतीक बनी है। प्रशासन, कर्मचारियों और आम जनता के हित में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भ्रष्टाचार पर सख्त अंकुश लगाया जाये।
कारखाने के कर्मचारियों व मजदूर संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए प्रदेश में निर्भीक, निष्पक्ष तथा पारदर्शी प्रशासन की मांग की है। यह घटना प्रदेश के अन्य विभागों के लिए भी नजीर है। कार्यस्थल, नियुक्तियां, और नियमितीकरण में पारदर्शिता बने और कर्मचारियों को उनके अधिकार बिना किसी डर अथवा अवैध मांग के प्राप्त हों।
सूरजपुर जिले के मां महामाया शक्कर कारखाने में भ्रष्टाचार रोकने के लिए एसीबी की कार्रवाई से क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी का नया सवेरा शुरू हुआ है। यह घटना आगामी दिनों में भ्रष्टाचार के अन्य मामलों पर नकेल कसने और कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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