नारायणपुर में 9 माह से नक्सल प्रोत्साहन राशि न मिलने पर डॉक्टरों का पोस्टमार्टम विरोध, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित : Doctors protest post-mortem in Narayanpur over non-payment of Naxal incentives for nine months

Uday Diwakar
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Doctors protest post-mortem in Narayanpur over non-payment of Naxal incentives for nine months: नारायणपुर : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में लंबे समय से नक्सल क्षेत्र प्रोत्साहन राशि (CRMC) का भुगतान नहीं होने से नाराज डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। स्वास्थ्यकर्मियों ने जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कार्य को 2 से 3 घंटे के लिए बंद कर दिया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में असुविधा उत्पन्न हो गई। इस दौरान उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि लंबे समय से लंबित इस राशि का भुगतान तुरंत किया जाए, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने काम को पूरी निष्ठा से जारी रख सकें।

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Doctors protest post-mortem in Narayanpur over non-payment of Naxal incentives for nine months

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि वे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सबसे कठिन और जोखिम भरी स्थितियों में काम कर रहे हैं। यहां ग्राउंड-लेवल ट्रायजिंग, नक्सल घटनाओं के बाद शवों का पोस्टमार्टम, और सड़क व बिना कनेक्टिविटी वाले दूर-दराज इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद, उन्हें जनवरी 2025 से लगातार नौ महीने से प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनका मनोबल गिर गया है और काम में भी बाधा आ रही है।

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नारायणपुर जिले के डॉक्टरों ने कहा है कि आसपास के कोंडागांव जिले में मार्च 2025 तक की प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो चुका है, जबकि नारायणपुर जैसे संवेदनशील जिले के स्वास्थ्य कर्मियों की उपेक्षा की जा रही है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों में गहरे आक्रोश और असंतोष का माहौल बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो वे और कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे।

7 अगस्त 2025 को भी स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के निरीक्षण दौरे के दौरान डॉक्टरों ने अपनी दिक्कतों से अवगत कराया था, लेकिन उस समय भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्यकर्मियों का यह विरोध लंबे समय से चल रहा है और इस बार पोस्टमार्टम कार्य को रोककर उन्होंने अपनी बात को और मजबूती से रखा है।

नारायणपुर जिले के मेडिकल ऑफिसर डॉ. हिमांशु सिन्हा ने कहा कि जब तक लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा, वे जोखिम भरे हालातों में काम करने को लेकर असमंजस में रहेंगे। उन्होंने सरकार से आह्वान किया है कि वे इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाएं। जिला अस्पताल में मौजूद अन्य चिकित्सा कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ ने भी इस बात पर जोर दिया कि वे लगातार नक्सल प्रभावित और खतरनाक इलाकों में सेवा दे रहे हैं, और उनके मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

इस बीच, जिला स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) एसएस राज ने बताया कि डॉक्टरों की शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि यह मामला राज्य स्तरीय है और अक्टूबर-नवंबर में बजट आवंटन के बाद एक सप्ताह के अंदर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। प्रशासन ने स्वास्थ्यकर्मियों से शांति बनाए रखने और सहयोग करने की अपील की है।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि वे डॉक्टरों की मांगों को गंभीरता से ले रहे हैं और शीघ्र ही प्रोत्साहन राशि के भुगतान को सुनिश्चित करेंगे। पिछले नौ महीने से लंबित इस राशि के कारण नारायणपुर के स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है। इसके चलते अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं में व्यवधान की स्थिति बनी।

नारायणपुर जिला अस्पताल में चिकित्सा कर्मियों का यह विरोध न केवल आर्थिक मुद्दा है, बल्कि यह राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के नियमानुसार संचालन की जरूरत को भी उजागर करता है। जहां स्वास्थ्यकर्मी खतरनाक और मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं, वहां उनके सहयोग और उचित प्रोत्साहन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संवेदनशील और नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के स्वास्थ्यकर्मियों की यह आवाज सरकार और प्रशासन तक स्पष्ट संदेश भेजती है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उचित सम्मान और संसाधन चाहते हैं। चिकित्सकीय कर्मचारियों का मनोबल और सुरक्षा वाला माहौल गढ़ना आवश्यक है ताकि वे स्वस्थ्यसेवा में निरंतर लगे रह सकें।

सरकार से जल्द ही इस मांग का समाधान करके लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान करना अपेक्षित है जिससे स्वास्थ्यकर्मी अपनी सेवाओं को बिना किसी डर या बाधा के जारी रख सकें। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता के लिए स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल बनाना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि आम जनता को बेहतर इलाज मिल सके और चिकित्सा क्षेत्र दुरुस्त रहे।

यह मामला स्वास्थ्य प्रशासन के लिए एक चुनौती भी है कि कैसे वे सीमांत और जोखिम भरे क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को समर्थन और प्रोत्साहन प्रदान करें। सरकार को चाहिए कि वे ऐसे कर्मचारियों की शिकायतों को प्राथमिकता दें और इनके लिए बेहतर नीति बनाएं जिससे भविष्य में इस तरह की समस्याएं दोबारा न आएं।

नारायणपुर जिले में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का यह विरोध प्रदर्शन राज्य में स्वास्थ्य सेवा के संवेदनशील पक्ष को उजागर करता है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग को भी व्यक्त करता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार शीघ्र ही नक्सल क्षेत्र प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित करेगी, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को काम करने में प्रोत्साहन मिलेगा और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

इस तरह के विवाद और विरोध प्रदर्शनों से बचने के लिए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को निरंतर संवाद और पारदर्शिता बनाए रखनी होगी ताकि स्वास्थ्यकर्मियों की समस्या समय पर समझी और हल की जा सके। स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के जीवन का मूल आधार हैं, इसलिए इसे प्रभावित करने वाले किसी भी संकट को तत्काल सुलझाना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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