छत्तीसगढ़ की एक क्षेत्र में अनोखी होली, यहां रंग से नहीं राख से खेलते हैं होली, जानिए पूरी परंपरा : Unique Holi in an Area of ​​Chhattisgarh

Uday Diwakar
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Unique Holi in an Area of ​​Chhattisgarh: गरियाबंद: छत्तीसगढ़ का एक ऐसा जिला जहां पर रंगों से होली नहीं खेला जाता है बल्कि राख से होली खेला जाता है पूरा देश रंगों से होली खेल रहा है लेकिन यहां पर अनोखा होली देखने को मिल रहा है सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में रंगो की जगह राख से होली खेली जाती है, यहां लोग एक दूसरे को गुलाल, अबीर नहीं बल्कि राख लगाते दिखाई देते हैं।

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Unique Holi in an Area of ​​Chhattisgarh छत्तीसगढ़ की एक क्षेत्र में अनोखी होली

दरअसल, छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में होली के समय एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है यहां राख से खेली जाने वाली होली पूरे देश में प्रचलित है ये परंपरा शुरू होती है  यहां पर स्थित एक गौ-सेवा केंद्र से जहां होली के 3 दिन पहले से ही गौ-सेवा केंद्र में ब्रम्हा यज्ञ शुरू हो जाता है जिसकी पूर्णाहुति की राख से होली खेली जाती है इस बार भी 14 मार्च को यहां के लोग राख से होली खेलते दिखाई देंगे , 4 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं दरअसल इस परंपरा को निभाने का उद्देश्य गो-सेवा को बढ़ावा देना है।

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Unique Holi in an Area of ​​Chhattisgarh भक्तों के ऊपर से गुजरती हैं गौ माता

राख होली के अलावा यहां एक और परंपरा निभाई जाती है जहां गौ माता भक्तों के ऊपक से गुजरती है इसके लिए पहले  गौ माता की पूजा कर बाबा के अनुयायी गौ माता को लेकर पूरे गांव में भ्रमण करते है गौ माता की राह पर सफेद सूती कपड़ा भी बिछाया जाता है जिसपर भक्त लेटे हुए दिखाई देते है, भक्तों के अनुसार गौ माता का पांव उनके शरीर पर पड़ने से भक्तों को सारे रोग और कष्टों से मुक्ती मिल जाती है।

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