Singhdeo says I am ready to become the Chief Minister for a day: सरगुजा: छत्तीसगढ़ की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताने के बाद कांग्रेस और भाजपा में बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया है। पूर्ण विराम शैली में यहां खबर विस्तार से प्रस्तुत है।छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव बिलासपुर दौरे पर थे। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मैं कभी नहीं कहूंगा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है।
उन्होंने स्पष्ट कहा, “ऐसा कौन है जो मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता?”। कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर संगठन सृजन अभियान चल रहा है। इसी दौरान सिंहदेव का यह बयान आया।पूर्व सीएम भूपेश बघेल के नेतृत्व में ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री फॉर्मूले की चर्चा पहले भी खूब हुई थी। सिंहदेव ने कहा, “जब मेरे नाम की चर्चा मुख्यमंत्री पद के लिए चली थी तब भी मीडिया ने मुझे लगातार सीएम दावेदार बनाए रखा। मगर अंतिम निर्णय हमेशा पार्टी का ही रहता है।”।मुख्यमंत्री बनने की बात पर सिंहदेव ने दोहराया, “पार्टी का फैसला अंतिम है। मैं कभी नहीं कहूंगा कि मुझे सीएम नहीं बनना है। किसी भी चुनाव में चेहरे पर चुनाव लड़ना अपवाद होता है।”।
उनका कहना था, “अधिकतर चुनाव सामूहिक नेतृत्व के आधार पर ही लड़े जाते हैं।”।टीएस सिंहदेव के बयान पर भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा, “अगर सिंहदेव चाहें तो हम उन्हें एक दिन का मुख्यमंत्री बना देंगे। जैसे बच्चों को एक दिन के लिए कलेक्टर या अफसर बनाया जाता है, वैसे ही उन्हें मुख्यमंत्री बना देंगे। कांग्रेस में उनका कुछ नहीं होना।”।सिंहदेव ने उनके तंज का मसखरी भरा जवाब दिया, “मैं तैयार हूं, वे शपथ ग्रहण की तैयारी करें। मैं अजय चंद्राकर के घर में ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लूंगा।”। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अजय चंद्राकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्यपाल जी से प्रक्रिया पूरी करवाएंगे।”।
बयान पर छत्तीसगढ़ के हेल्थ मिनिस्टर श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “सिंहदेव सिर्फ फिल्म में मुख्यमंत्री बन सकते हैं। यहां आने वाले 25-50 साल तक कांग्रेस की सत्ता में आने की संभावना नहीं है।”। उन्होंने फिल्म ‘नायक’ का उदाहरण देकर कहा कि सिंहदेव को सिर्फ मूवी में सीएम बनने का मौका मिल सकता है।अंबिकापुर में मीडिया से चर्चा के दौरान सिंहदेव ने कहा, “मैं अजय चंद्राकर का आभार प्रकट करता हूं। मैं उनसे जाकर मिलूंगा। पार्टी का निर्णय अंतिम है। फिर भी अगर उन्होंने कहा तो मैं तैयार हूं।”।
Singhdeo says I am ready to become the Chief Minister for a day
सिंहदेव के पूरे बयान का विश्लेषण करें तो स्पष्ट है कि वे हमेशा पार्टी लाइन का सम्मान करते हुए अपनी व्यक्तिगत इच्छा को सामने रखते हैं। उन्होंने कहा, “मैं यह कभी नहीं कहूंगा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना। पार्टी चाहे तो मैं जिम्मेदारी ले सकता हूं। लेकिन चेहरा नहीं, नेतृत्व सामूहिक रहेगा।”।प्रदेश की राजनीति में टीएस सिंहदेव का यह बयान नया मोड़ देता है।
भाजपा ने राजनीतिक तंज के ज़रिए कांग्रेस के अंदरूनी परिदृश्य को उजागर किया और सिंहदेव की महत्वाकांक्षा पर सवाल उठाया। वहीं, कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेता की साफ़गोई को व्यक्तिगत मतभेद की बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है। आम जनता सिंहदेव की स्पष्टता की सराहना करती दिख रही है।
हालांकि भाजपा और अन्य विपक्षी दल इसे कांग्रेस की अंदरूनी फूट और नेतृत्व संकट का संकेत मान रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री की टिप्पणी ने इस बयान को और हास्यास्पद बना दिया। मगर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सत्ता के शीर्ष पद की चाहत किसी भी नेता की स्वाभाविक मानसिकता है। सार्वजनिक मंच पर इस इच्छा को व्यक्त करना साहस का विषय है। सिंहदेव ने पिछले दिनों भी धर्म-जाति के मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखी थी और राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण को गलत बताया था।
अब देखना है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2028 में कांग्रेस नेतृत्व की गोटी कैसे फिट बैठती है। क्या वाकई पार्टी सामूहिक नेतृत्व को आगे रखकर चुनाव लड़ेगी, या सिंहदेव की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के चलते कोई नई रणनीति बनाएगी? सिंहदेव का “एक दिन का मुख्यमंत्री” बनने का बयान व्यंग्य, हास्य और सच्ची इच्छा का मिलाजुला रूप है, जिसकी चर्चा भविष्य में भी होती रहेगी।
राजनीति में ऐसे बयान अक्सर नेताओं की इच्छा, पार्टी की स्थिति और जनता का मूड बताने वाले बन जाते हैं। राज्य की राजनीति में ऐसे मुद्दों पर बहस जारी रहना लोकतंत्र की खूबसूरती है।
यदि क्षेत्रीय खबरों, नेताओं के बयान और पार्टी अंतर्प्रक्रिया को समझना पत्रकारिता या विश्लेषण का हिस्सा है, तो यह ‘पूर्ण विराम’ शैली वाली संरचित रिपोर्ट लोकल मीडिया प्रस्तुति व विस्तार विश्लेषण के लिए सर्वश्रेष्ठ है—इसमें एक-एक पक्ष स्पष्ट, बिना अधूरी बात और संवाद में शामिल है।
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