Tribal woman referred to Ambikapur Medical College dies during childbirth: सरगुजा:अंबिकापुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर विफल साबित हुई है। कोट गांव की 22 वर्षीय आदिवासी गर्भवती महिला जगमनिया की अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में रेफर होने के दौरान ही प्रसव संबंधी जटिलताओं से मौत हो गई। डेढ़ माह में जिले में यह चौथी मातृ मृत्यु है, जिसने सरगुजा संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी प्रसव सुविधाओं की कमी इस हृदयविदारक घटना का मुख्य कारण बनी।
सूरजपुर जिले के दूरस्थ कोट गांव में रहने वाली जगमनिया बाई का प्रसव का समय नजदीक आ गया था। रविवार रात उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने तुरंत स्थानीय आशा कार्यकर्ता को बुलाया, जिन्होंने प्राथमिक उपचार के बाद सूरजपुर जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने पाया कि उन्नत प्रसव सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए महिला को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। रास्ते में ही उसकी हालत नाजुक हो गई। लगभग 80 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया।
परिजनों ने बताया कि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन और उचित चिकित्सा उपकरणों की कमी थी। अस्पताल प्रबंधन ने रेफर स्लिप जारी करते समय उचित सावधानियां नहीं बरतीं। मृतक के पति ने रोते हुए कहा, “हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, प्राइवेट अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकते थे। सरकारी व्यवस्था पर ही भरोसा था।” यह घटना ग्रामीण आदिवासी महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करती है।
मातृ मृत्यु का सिलसिला
डेढ़ माह के भीतर सूरजपुर जिले (सरगुजा संभाग ) में यह चौथी मातृ मृत्यु है। अक्टूबर में प्रतापपुर ब्लॉक की एक महिला को रक्त की कमी से बचाया नहीं जा सका। नवंबर में उदयपुर क्षेत्र से एक अन्य मामले में ऑपरेशन थिएटर की अनुपलब्धता घातक साबित हुई। दिसंबर में ही यह तीसरा हादसा हुआ। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि सरगुजा संभाग में मातृ मृत्यु दर राज्य औसत से 35 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञों और उन्नत उपकरणों की भारी कमी इसका मुख्य कारण है।
सूरजपुर जिला अस्पताल में केवल दो स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि आवश्यकता 6 की है। प्रसव कक्ष में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब पड़ी है। जिला मुख्यालय से अंबिकापुर की दूरी और खराब सड़कें रेफर मामलों को और जटिल बनाती हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण परिवहन सुविधाओं का अभाव जानलेवा साबित हो रहा है। 108 एम्बुलेंस सेवा में देरी और अपर्याप्त स्टाफ भी शिकायत का विषय बना हुआ है। सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
जिला कलेक्टर ने घटना की मजिस्ट्रेटीय जांच के आदेश दिए हैं। सिविल सर्जन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रेफर प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई। हालांकि, उन्होंने स्वास्थ्य सुधारों के लिए विशेष अभियान चलाने का आश्वासन दिया। आयुष्मान भारत योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात करने की योजना है। विधायक ने विधानसभा में मामला उठाने का ऐलान किया। स्थानीय पंचायत ने 3 दिन का शोक घोषित किया।
Tribal woman referred to Ambikapur Medical College dies during childbirth
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रम्या साहू ने बताया कि आदिवासी महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया प्रसव जटिलताओं को बढ़ाता है। ग्रामीण स्तर पर एंटी नेटल केयर (ANC) की कमी घातक है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर लेवल-2 प्रसव केंद्र स्थापित हों। सामाजिक कार्यकर्ता मीना मार्को ने एनआरएचएम फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सरगुजा संभाग को मिले करोड़ों रुपये का हिसाब मांगा।
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