Tribal community protests over Pratappur MLA Shakuntala Porte’s caste certificate controversy: सूरजपुर :छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाणपत्र अब एक गंभीर विवाद का विषय बन गया है। यह विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और इस सीट से विधायक बनने के लिए उचित जाति प्रमाणपत्र आवश्यक होता है। इस मामले में आरोप है कि शकुंतला पोर्ते ने अपना जाति प्रमाणपत्र पति के दस्तावेजों के आधार पर बनवाया जबकि जाति प्रमाणपत्र मूलतः पिता की वंशावली के आधार पर होता है। पिछले कुछ सप्ताह से यह मामला हाईकोर्ट और स्थानीय प्रशासन की जांच के दायरे में है। आदिवासी समाज ने इसे आदिवासी अधिकारों का हनन बताया है और विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जाति प्रमाणपत्र विवाद के प्रमुख पहलू
शकुंतला पोर्ते पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी प्रमाण के फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और विधान सभा पहुंचीं। जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने इसे जांच का विषय बनाया और हाईकोर्ट ने भी इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेशानुसार विधायक को 27 नवंबर को दस्तावेज जमा करने और सत्यापन के लिए उपस्थित होने का नोटिस दिया गया था। हालांकि, आदिवासी समाज और विपक्षी दल इस जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने मामले में तत्काल सुनवाई और कठोर कार्रवाई की मांग पर जोर दिया है।
हाल ही में बलरामपुर में आदिवासी समाज ने विधायक के जाति प्रमाणपत्र विवाद को लेकर नेशनल हाईवे पर चक्काजाम किया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कलेक्टरेट परिसर में भी बड़ी संख्या में आदिवासियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर उग्र प्रदर्शन किया, जिसमें विधायक के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर इस मामले में 11 दिसंबर तक सुनवाई कर फैसला नहीं लिया गया तो वे और बड़ा आंदोलन करेंगे। इस दौरान कई आदिवासी संगठन विधायक की सदस्यता रद्द करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला स्तरीय सत्यापन समिति ने जांच शुरू कर दी है, जिसमें विधायक के समस्त दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। समिति को इस जांच की रिपोर्ट जमा करनी है, जिससे कोर्ट आगे की कार्रवाई निर्धारित करेगा। विधायक के वकील ने निर्धारित तिथि पर सभी दस्तावेज समिति को सौंप दिए हैं, लेकिन आदिवासी समाज सुनवाई की अगली तिथि पर तत्काल फैसला करने पर अड़ा हुआ है। प्रशासन भी इस मामले को गंभीरता से ले रहा है क्योंकि यह न केवल राजनीतिक विवाद है, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदाय के अधिकारों का भी मामला है।
Tribal community protests over Pratappur MLA Shakuntala Porte’s caste certificate controversy
यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर डाल रहा है। विपक्षी दलों ने इस मामले का फायदा उठाने की कोशिश की है और भाजपा विधायक के विरुद्ध मोर्चा खोला है। इसके साथ ही आदिवासी समुदाय में गैर-आदिवासी के नाम पर आरक्षित सीट हथियाने के मुद्दे पर बढ़ती नाराजगी ने समाज में कटुता बढ़ा दी है। सामाजिक मंचों और स्थानीय मीडिया में यह मामला बड़े पैमाने पर चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है। यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में जाति और आरक्षण के संवेदनशील मुद्दों पर बता चढ़ाकर राजनीति की जटिलता को भी उजागर करता है।
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