बिना वजह थकान? यह हो सकता है क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम, जानें पूरी सच्चाई : Tiredness without any reason?

Uday Diwakar
7 Min Read
  • लगातार बिना वजह थकान, जो आराम करने के बाद भी कम न हो, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का प्रमुख लक्षण है।
  • इस सिंड्रोम के कारण मांसपेशियों में दर्द, नींद की समस्या, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत और मानसिक तनाव भी हो सकते हैं।

Tiredness without any reason?: आजकल बिना किसी खास वजह के लगातार थकान महसूस होना एक आम समस्या बन गई है। अगर आप भी ऐसा अनुभव कर रहे हैं कि दिनभर काम करने के बाद भी आपको बहुत ज्यादा थकान रहती है और वो आराम के बाद भी ठीक नहीं होती, तो सावधान हो जाइए। यह कोई सामान्य थकान नहीं, बल्कि क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome – CFS) का संकेत हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें व्यक्ति को लगातार थकान बनी रहती है और यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। इस लेख में हम क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के कारण, लक्षण, इलाज और इससे बचाव के तरीके विस्तार से जानेंगे।

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Tiredness without any reason? क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम क्या है?

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम एक जटिल बीमारी है जिसमें व्यक्ति को कम से कम छह महीने तक निरंतर, गंभीर थकान होती है। यह थकान इतनी अधिक होती है कि व्यक्ति सामान्य शारीरिक या मानसिक काम-काज करने में भी असमर्थ हो जाता है। इस थकान में आराम पाने या नींद लेने से भी राहत नहीं मिलती। यह बीमारी सबसे अधिक 20 से 50 वर्ष की उम्र के बीच युवाओं और मध्यम आयु की महिलाओं को प्रभावित करती है, लेकिन यह किसी भी उम्र और लिंग के व्यक्ति को हो सकती है।

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम को मायाल्जिक एन्सेफेलोमाइलाइटिस (ME) भी कहा जाता है, और इसे कभी-कभी सिस्टेमिक एग्ज़र्शन इनटॉलरेंस डिजीज (SEID) के नाम से भी जाना जाता है।

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क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के कारण

वैज्ञानिकों को इस बीमारी का कोई निश्चित कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन माना जाता है कि इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ शोधों के अनुसार, यह बीमारी आनुवंशिक, संक्रमण, प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्यता, और पर्यावरणीय कारकों के कारण हो सकती है।

कुछ संभावित कारणों में शामिल हैं:

  1. वायरल संक्रमण: जैसे एपस्टीन-बार वायरस, साइटोमेगालोवायरस आदि। हालाँकि, कोई सुस्पष्ट सबूत नहीं मिला कि ये संक्रमण सीधे इस बीमारी का कारण हैं।
  2. प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी: कुछ लोगों में इम्यून सिस्टम का ठीक तरह से काम न करना।
  3. आनुवंशिक प्रवृत्ति: परिवार के अन्य सदस्यों में भी इस बीमारी के लक्षण पाए जाना।
  4. पर्यावरणीय दबाव और भावनात्मक तनाव: शारीरिक और मानसिक तनाव भी इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं।

हाल ही में कोविड-19 संक्रमण के बाद कई लोगों में लंबे समय तक थकान और अन्य लक्षण दिखे हैं, जिनमें कुछ में क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम जैसी स्थिति विकसित हुई है।

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क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षण

इस सिंड्रोम के मुख्य लक्षण हैं:

  1. लगातार थकान जो छह महीने या उससे अधिक समय तक बनी रहती है और आराम करने पर भी ठीक नहीं होती।
  2. नींद न आने या नींद पूरी न होने का एहसास।
  3. मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द होना।
  4. सिरदर्द और गले में खराश।
  5. ध्यान केंद्रित करने और स्मृति खराब होना (माइंड फॉग)।
  6. मानसिक तनाव या सामान्य कामों पर थकान बढ़ जाना।
  7. चक्कर आना या खड़े होने पर कमजोरी महसूस होना।

सामान्य थकान से अलग, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम में लक्षण इतना गंभीर होता है कि व्यक्ति रोजाना के कामों में भी दिक्कत महसूस करता है।

इस बीमारी के लक्षण फाइब्रोमायाल्जिया जैसी अन्य रोगों के लक्षणों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए सही निदान बहुत जरूरी है।

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का निदान कैसे होता है?

चूंकि इस रोग का कोई खास परीक्षण नहीं है, इसलिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों का ध्यानपूर्वक मूल्यांकन करते हैं। अगर कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक समय तक लगातार थका हुआ महसूस करता है और अन्य कारण जैसे संक्रमण, मानसिक रोग या अन्य बीमारियां ausgeschlossen हो जाएं, तब डॉक्टर क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का निदान करते हैं।

डॉक्टर मरीज की स्वास्थ्य इतिहास लेते हैं, शारीरिक माप करते हैं, और अन्य बीमारियों को जांचने के लिए परीक्षण कराते हैं। इस रोग के निदान के लिए डॉक्टर मुख्यतः लक्षणों पर निर्भर करते हैं।

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का इलाज

दुख की बात है कि इस रोग का कोई निश्चित इलाज अभी उपलब्ध नहीं है। लेकिन इसके लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं:

  1. संज्ञानात्मक-व्यवहार चिकित्सा (CBT): यह मनोवैज्ञानिक उपचार रोगी को थकान से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करता है।
  2. नियंत्रित व्यायाम: धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से व्यायाम करने से रोगी की ऊर्जा स्तर में सुधार हो सकता है।
  3. नींद सुधारना: नींद संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि नींद के पैटर्न पर ध्यान दिया जाए।
  4. दवाएं: जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द कम करने के लिए दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं।
  5. तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान और श्वास व्यायाम से तनाव कम करने में मदद मिलती है।

रोगी को खुद भी अपनी दिनचर्या में बदलाव करना होता है, जैसे कि ज्यादा आराम करना, भारी कामों से बचना, और मानसिक सहारा लेना।

क्या क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम किसी से संक्रामक है?

यह रोग संक्रामक नहीं है। यह किसी व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता नहीं है। लेकिन इसका कारण कभी-कभी संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिक्रिया हो सकती है।

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम से कैसे बचें?

  1. तनाव कम करें और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
  2. स्वस्थ आहार लें और सही मात्रा में नींद पाएं।
  3. नियमित, हल्का व्यायाम करें।
  4. वायरस या संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  5. डॉक्टर की सलाह पर इलाज कराएं और घरेलू नुस्खे अपनाएं।

अगर आपको लगातार बिना वजह थकान महसूस होती है जो आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होती, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम हो सकता है। इसे गंभीरता से लें और डॉक्टर से जांच कराएं। सही निदान और उपचार से इस बीमारी के लक्षणों को कम किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बन सकती है।

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम एक चुनौतीपूर्ण अवस्था है, लेकिन जागरूकता और सही इलाज से इससे लड़ना संभव है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और समय-समय पर मेडिकल चेकअप कराते रहें।

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