Three-day strike by Surguja employees: सरगुजा:अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर यह तीन दिवसीय आंदोलन शुरू किया। मुख्य मांगों में महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ोतरी, वेतन विसंगति दूर करना, 30 दिन के अवकाश का नगदीकरण, अनुकंपा नियुक्ति में शिथिलीकरण और कैशलेस उपचार शामिल हैं। ये मांगे लंबे समय से लंबित हैं, और कई बार प्रतिनिधिमंडल भेजने के बावजूद शासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर शांतिपूर्ण धरना दिया।
सरगुजा जिले में प्रभाव
सरगुजा जिले के अंबिकापुर में स्टेट बैंक कलेक्ट्रेट शाखा के सामने धरना स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी। सभी सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसर गया, क्योंकि अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर कलम बंद हड़ताल पर उतर आए। जिला संयोजक कमलेश सोनी, राजपत्रित अधिकारी संघ के डॉ. सीके मिश्रा, लिपिक संघ के दुर्गेश सिन्हा सहित विभिन्न संगठनों के नेता मौजूद रहे। उन्होंने नारेबाजी करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और तेज होगा।
यह हड़ताल केवल सरगुजा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में फैल गई। रायपुर के इंद्रावती भवन, बिलासपुर, जगदलपुर, महासमुंद, खैरागढ़ और सिमगा जैसे जिलों में कर्मचारी धरने पर बैठे। लगभग 4100 से अधिक कर्मचारी इसमें शामिल हैं, जिसमें शिक्षक, पटवारी, वन अधिकारी, पशु चिकित्सा सहायक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। खैरागढ़ में शासकीय कार्यालय पूरी तरह ठप हो गए।
मांगों का विस्तार
फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगें कर्मचारियों की लंबी पीड़ा को दर्शाती हैं:
- महंगाई भत्ता में तीन किस्तों की बढ़ोतरी।
- वेतनमान विसंगति तत्काल दूर करना।
- 30 दिन अवकाश का 100% नगदीकरण।
- अनुकंपा नियुक्ति में आयु सीमा शिथिलीकरण।
- कैशलेस उपचार सुविधा का विस्तार।
- पेंशनर्स को महंगाई भत्ता।
- स्वास्थ्य और शिक्षा कर्मचारियों की विशेष मांगें।
नेताओं का कहना है कि ये मांगे न्यायोचित हैं और मोदी सरकार की ‘गारंटी’ के तहत पूरी होनी चाहिए।
Three-day strike by Surguja employees
अभी तक शासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि 31 दिसंबर के बाद आंदोलन और कड़ा रूप ले सकता है। यह हड़ताल छत्तीसगढ़ की विषम आर्थिक स्थिति में कर्मचारियों की एकजुटता दिखाती है, जहां महंगाई और वेतन असमानता प्रमुख मुद्दे हैं। जनता पर इसका असर सीमित है, लेकिन सरकारी सेवाओं में देरी हो रही।
जिला संयोजक कमलेश सोनी ने कहा, “हमारी मांगे पूरी तरह जायज हैं, शासन को गंभीरता से लेना चाहिए।” डॉ. सीके मिश्रा ने जोर देकर कहा कि बार-बार चर्चा के बावजूद कोई राहत नहीं मिली। पेंशनर्स संगठन के हरिशंकर सिंह ने बुजुर्ग कर्मचारियों की पीड़ा बताई। यह आंदोलन न केवल वेतन सुधार का, बल्कि कर्मचारी कल्याण का प्रतीक बन गया है।
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