The World Health Organization has declared skin diseases a serious illness: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में अपनी एक नई रिपोर्ट में स्किन डिजीज को गंभीर बीमारी के रूप में घोषित किया है। अब तक लोग त्वचा से जुड़ी बीमारियों को केवल सौंदर्य संबंधी समस्या समझ कर नजरअंदाज करते थे, लेकिन WHO ने इसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता में शामिल कर महत्वपूर्ण कहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, त्वचा की बीमारियां न केवल व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली और सामाजिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं।

The World Health Organization has declared skin diseases a serious illness
क्रियान्वित प्रस्ताव में कहा गया है कि त्वचा रोगों के कारण अक्सर मरीजों को सामाजिक भेदभाव और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। त्वचा रोगों के शुरुआती लक्षण कभी-कभी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए त्वचा के लक्षणों की सही पहचान और समय पर उपचार बहुत जरूरी है। WHO की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि त्वचा रोग अत्यंत सामान्य हैं और दुनिया की लगभग 1.8 अरब आबादी कभी न कभी त्वचा रोग से प्रभावित होती है।

रिपोर्ट में त्वचा संबंधी बीमारियों के व्यापक प्रभाव को देखते हुए कहा गया है कि स्वास्थ्य प्रणाली में त्वचा रोगों का समुचित प्रबंधन होना चाहिए, जिससे मरीजों को उचित इलाज मिल सके और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। इसके लिए प्राथमिक देखभाल में त्वचा रोगों से निपटने के प्रशिक्षण, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, बेहतर निदान सुविधा और रोग निगरानी प्रणाली का सुदृढ़ीकरण जरूरी है।
WHO ने विश्व स्तर पर त्वचा रोगों से जुड़ी neglected tropical diseases (NTDs) पर भी विशेष ध्यान दिया है, जिनमें कुष्ठ रोग, यॉस, स्कैबीज़, और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे गंभीर रोग शामिल हैं। ये बीमारियां खासतौर पर विकासशील देशों और गरीब इलाकों में अधिक फैलती हैं, और इनके नियंत्रण के लिए ज्यादा धन और संसाधनों की जरूरत है।

इस नए स्वास्थ्य अभियान के तहत WHO ने देश-स्तर पर समन्वित कार्रवाई की मांग की है। देश सरकारों को त्वचा रोगों के लिए बेहतर वित्तीय सहायता, मानवीय संसाधन, और अनुसंधान को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही, त्वचा रोगों की रोकथाम और इलाज के लिए नए-नए तकनीकी और नवाचारों को अपनाने का आह्वान भी किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्वचा स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना बेहद आवश्यक है क्योंकि यह पूरी स्वास्थ्य प्रणाली का अहम हिस्सा है। इससे लोगों का मानसिक कल्याण भी जुड़ा होता है, और त्वचा रोगों से पीड़ित लोगों में आत्मसम्मान की कमी और सामाजिक अलगाव का खतरा रहता है।
यह कदम विश्व स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जो त्वचा रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा और अधिक प्रभावी इलाज की ओर प्रोत्साहित करेगा। WHO का उद्देश्य है कि 2030 तक त्वचा रोगों से होने वाले बोझ को कम किया जाए और सभी देशों में इन रोगों से पीड़ित लोगों को उचित चिकित्सा सहायता मिले।
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