The lover went to meet his married girlfriend at midnight in Lakhanpur: सरगुजा:छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पुहपुटरा गांव में एक अनोखा और चर्चा का विषय बना मामला सामने आया है। यह घटना जहां स्थानीय सामाजिक रीति-रिवाज, प्रेम संबंधों, और पंचायत व्यवस्था की पेचीदगियों को उजागर करती है, वहीं इसके सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर बहस भी छिड़ गई है।
The lover went to meet his married girlfriend at midnight in Lakhanpur
सूरजपुर जिले के तेलाई कछार गांव के एक युवक का लखनपुर क्षेत्र की एक युवती से प्रेम संबंध था। दोनों की शादी अलग-अलग हुई थी, लेकिन उनका प्रेम रिश्ता शादी के बाद भी चलता रहा। यह प्रेम संबंध अपने आप में काफी संवेदनशील था क्योंकि दोनों विवाहित थे और सामाजिक मान्यताओं के बीच छुपकर यह रिश्ता चल रहा था। युवती अपनी ससुराल पुहपुटरा गांव में रहती थी। यह प्रेम कहानी धीरे-धीरे तमाम सामाजिक और पारिवारिक दबावों के बीच गहराती चली गई।
रात की घटना
आधी रात युवक मौका देखकर अपनी शादीशुदा प्रेमिका से मिलने उसके घर पहुंच गया। यह कदम न केवल जोखिम भरा था बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अस्वीकार्य माना जाता था। युवक छुप-छुपा कर घर के अंदर पहुंचा, लेकिन उसकी यह हरकत परिवार वालों की नजर से छुप नहीं पाई। जैसे ही युवक को पकड़ लिया गया, वहां मौजूद लोगों ने उसे काफी बेरहमी से पीटा। युवक के हाथ पैर बांध दिए गए और उसकी जमकर पिटाई की गई। इस भीषण पिटाई का वीडियो भी किसी ने बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
पिटाई के बाद मामला पुलिस तक पहुँचा, लेकिन दोनों पक्षों में से किसी ने भी कोई एफआईआर दर्ज कराने का कदम नहीं उठाया। इस पूरे विषय को लेकर गांव में सामाजिक पंचायत बुलाई गई। इस पंचायत में युवक और युवती दोनों ही पक्षों के लोग शामिल हुए। पंचायत का स्वरूप पारंपरिक लेकिन जटिल था, जिसमें दोनों के हाथ-पैर बांध दिए गए और मामले की चर्चा हुई।
हैरानी की बात यह थी कि पंचायत ने युवती को उसके प्रेमी के हवाले कर दिया। यह निर्णय सामाजिक परंपराओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों की निगाह से अलग-थलग और विवादास्पद था। मतलब यह हुआ कि युवती अब अपने ससुराल से मुक्त होकर प्रेमी के साथ रहने की स्थिति में आ गई। यह फैसला न केवल गांव में बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गया।
यह घटना कई सामाजिक और कानूनी सवालों को जन्म देती है। ग्रामीण पंचायतों के पास परंपरागत शक्तियां होती हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल ऐसे मामलों में कैसे होना चाहिए, यह विवादास्पद विषय है। पंचायत के इस फैसले ने इस बात को उजागर किया कि कई बार पारंपरिक व्यवस्थाएं वर्तमान सामाजिक और कानूनी मानकों से मेल नहीं खातीं।
कानूनी तौर पर, विवाह के बाद किसी भी प्रकार का प्रेम संबंध या दूसरा शादीशुदा संबंध गैरकानूनी नहीं है, लेकिन सामाजिक तौर पर इसे स्वीकार्य नहीं माना जाता। साथ ही, किसी भी व्यक्ति को बिना उसकी सहमति के पकड़ना, बांधना और उसे मारपीट करना कानूनन अपराध है। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं की क्योंकि दोनों पक्षों के बीच कोई लिखित शिकायत नहीं हुई थी।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जहां कुछ लोग इस घटना को हास्य या नाटकीयता के रूप में देख रहे थे, वहीं कई लोगों ने पंचायत के फैसले और ग्रामीण विधानों पर प्रश्नचिह्न लगाना शुरू कर दिया। कुछ ने सामाजिक कुरीतियों और पुरानी परंपराओं को बदलने की जरूरत बताई, वहीं कई लोगों ने इसे एक उदाहरण माना कि कैसे गांव में तुरंत फैसले लिए जाते हैं जो कानून से अलग हो सकते हैं।
युवक और युवती दोनों ही इस पूरे घटनाक्रम से मानसिक रूप से प्रभावित हैं। युवक को न केवल सामाजिक अपमान सहना पड़ा, बल्कि पंचायत के कठोर फैसले ने उसकी जिंदगी को भी प्रभावित किया है। युवती भी अपने परिवार से अलग होकर नए जीवन की शुरूआत पर सोच-विचार कर रही है। परिवार के अन्य सदस्य भी इस घटना से गहरे आहत और चिंतित हैं, क्योंकि यह मामला उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ग्रामीण पंचायतों को संवेदनशील मामलों में समझदारी से फैसले लेने चाहिए और लोगों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कानून का पालन अनिवार्य है और पंचायतों को कानूनी दायरे में रहकर फैसले लेने चाहिए।
पुहपुटरा गांव की यह घटना प्रेम, सामाजिक जिम्मेदारियों, परिवार, और पंचायत के बीच जटिल संबंधों को दर्शाती है। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे परंपराएं और कानून कभी-कभी टकरा जाते हैं और समाज को इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण पंचायतों का महत्व अपनी जगह है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और कानून के परिप्रेक्ष्य में उनकी भूमिका पर पुनर्विचार आवश्यक है।
यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में ग्रामीण समाज, सामाजिक रीति-रिवाज, और कानूनी व्यवस्था के आपसी सम्बंधों पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। ऐसे विवादों का सामना सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, और सही कानूनी दृष्टिकोण के माध्यम से ही किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-बलरामपुर एसडीओपी याकूब मेमन पर रेप और ब्लैकमेल के गंभीर आरोप, रायपुर कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत