अतिथि शिक्षक द्वारा छात्र की पिटाई मामला ,आदिवासी समाज ने बताया आदिवासियों के सम्मान पर चोट और आंदोलन : The Case of Beating Student by Guest Teacher in Manendragarh

Uday Diwakar
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  • कोटाडोल स्कूल में अतिथि शिक्षक ने आदिवासी छात्र की बर्बर पिटाई की, घटना से पूरे आदिवासी समाज में गुस्सा।
  • छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने शिक्षक पर सख़्त कार्रवाई की माँग की, चेतावनी—न्याय न मिलने पर बड़ा आंदोलन होगा।

The Case of Beating Student by Guest Teacher in Manendragarh: मनेन्द्रगढ़ : मनेंद्रगढ़ जिले के कोटाडोल गांव के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। स्कूल में पढ़ाने आए एक अतिथि शिक्षक ने एक छात्र की बहुत बुरी तरह पिटाई कर दी। छात्र आदिवासी समाज से है। इस घटना की जानकारी सामने आते ही परिजन, ग्रामीण और आदिवासी संगठनों में गुस्सा फैल गया।

The Case of Beating Student by Guest Teacher in Manendragarh क्या हुआ था

जानकारी मिली है कि शिक्षक ने छात्र को मामूली बात पर मारा। कारण साफ नहीं हुआ है, लेकिन बताया जा रहा है कि या तो होमवर्क पूरा नहीं हुआ था या फिर पढ़ाई में गलती हो गई थी। इस वजह से शिक्षक ने छात्र की बेरहमी से पिटाई कर दी। बच्चे के शरीर पर चोट के निशान दिखे और वह डर गया। घटना की खबर गाँव में फैलते ही लोग नाराज़ हो गए।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने इस घटना को गंभीर माना है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक बच्चे की पिटाई नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की इज्जत पर चोट है। आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया कि स्कूलों में आए दिन बच्चों के साथ दुर्व्यवहार होता है, लेकिन प्रशासन अक्सर मामले को छोटा बताकर दबा देता है। इस बार ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

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आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने साफ कहा है कि यदि आरोपी शिक्षक पर तुरंत कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू होगा। इस आंदोलन में स्कूल का घेराव, जिला मुख्यालय में धरना और ज़रूरत पड़ने पर रायपुर तक मार्च करने की योजना है। समाज का मानना है कि बच्चे की सुरक्षा और सम्मान पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

ग्रामीण और आदिवासी अंचल के स्कूलों में पहले से ही पढ़ाई का स्तर कमजोर है। अगर वहां बच्चों को हिंसा का सामना करना पड़े, तो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक को बच्चों को समझाकर सही रास्ता दिखाना चाहिए, लेकिन पिटाई करने से बच्चे पढ़ाई से दूर हो जाते हैं और उनका आत्मविश्वास टूट जाता है।

मामला सामने आने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के आदेश दिए। अधिकारी का कहना है कि जांच पूरी होते ही शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि आदिवासी समाज को भरोसा नहीं है कि इस बार भी सामान्य कार्रवाई होकर मामला दब नहीं जाएगा। इसी वजह से समाज ने पहले से आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।

इस घटना की निंदा स्थानीय नेताओं ने भी की। उनका कहना है कि शिक्षक का काम बच्चों को पढ़ाना और मार्गदर्शन करना है। यदि शिक्षक ही हिंसा करेगा तो बच्चे डरेंगे और शिक्षा पर भरोसा खो देंगे। नेताओं ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि पीड़ित छात्र को सहायता दी जाए ताकि उसके मन से डर निकल सके।

गाँव-गाँव में बैठकें

आदिवासी समाज ने पूरे जिले में बैठकें करना शुरू कर दिया है। इन बैठकों में ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह मामला अब केवल एक बच्चे का नहीं है बल्कि पूरे समाज का है। वे चाहते हैं कि दोषी को जल्द से जल्द सज़ा मिले ताकि आगे कभी ऐसा न हो।

इस घटना का असर समाज पर गहरा पड़ा है। लोग पहले ही कहते रहे हैं कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा और रोज़गार की अनदेखी होती है। अब जब स्कूल में बच्चों को मारा-पीटा जा रहा है तो यह चोट और गहरी हो गई है। गांव के बुजुर्गों और पढ़े-लिखे युवाओं का कहना है कि अगर सम्मान और सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी तो बच्चे पढ़ाई से दूर हो जाएंगे।

कोटाडोल स्कूल की यह घटना अब केवल छात्र की पिटाई का मामला नहीं रह गई है। यह आदिवासी समाज की और बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। प्रशासन और शिक्षा विभाग पर अब दबाव है कि वह तुरंत कार्रवाई करे। अगर न्याय नहीं मिला तो आंदोलन पूरे जिले और प्रदेश तक फैल सकता है।

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