सरगुजा: जीवित महिला को मृत बताकर 6 एकड़ जमीन हड़पी, मैं तो जिंदा हूं साहेब! राजस्व पर सवाल : Surguja: Six acres of land seized by declaring a living woman dead

Uday Diwakar
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Surguja: Six acres of land seized by declaring a living woman dead: सरगुजा:​​​अंबिकापुर ।छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। अंबिकापुर विकासखंड के मेंड्रा खुर्द गांव की बुजुर्ग महिला सुगामती राजवाड़े को कागजों में मृत घोषित कर उनकी 6 एकड़ कीमती जमीन भतीजे ने हड़प ली। जीवित महिला की न्याय की गुहार ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है।

मेंड्रा खुर्द गांव की सुगामती राजवाड़े (उम्र 68 वर्ष) ने आरोप लगाया है कि उनके भतीजे कवलसाय ने साजिश रचकर राजस्व रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया और उनकी पैतृक 6 एकड़ उपजाऊ जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। जमीन खसरा नंबर 145 से 152 तक की है, जिसका बाजार मूल्य करोड़ों में आंका जा रहा है। सुगामती को इस धोखाधड़ी की जानकारी तब हुई जब उन्होंने अपनी पेंशन और राशन कार्ड के लिए दस्तावेज चेक कराए।

महिला ने बताया, “मैं तो जिंदा हूं साहेब! भतीजे ने पटवारी और राजस्व अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया।” जांच में पता चला कि 2023 में कवलसाय ने स्थानीय पटवारी को 50 हजार रुपये रिश्वत दी थी। राजस्व रिकॉर्ड में सुगामती की जगह कवलसाय का नाम दर्ज हो गया, और जमीन पर वह फसल उगाने लगा। सुगामती के पति की असल मृत्यु 2018 में हुई थी, लेकिन इसका फायदा भतीजे ने उठाया।

राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप

सुगामती ने तहसीलदार, पटवारी और नायब तहसीलदार पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पटवारी ने बिना सत्यापन के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया और नामांतरण कर दिया। सरगुजा कलेक्टर कार्यालय पहुंची सुगामती ने ज्ञापन सौंपा, जिसमें तत्काल जमीन वापसी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। जिला प्रशासन ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

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स्थानीय राजस्व अधिकारी ने सफाई दी कि “रिकॉर्ड में गड़बड़ी संभव है, लेकिन जांच पूरी होने पर कार्रवाई होगी।” छत्तीसगढ़ में जमीन हड़पने के ऐसे 200 से अधिक मामले सालाना दर्ज होते हैं, जिनमें 70% राजस्व अमले की लापरवाही से जुड़े हैं।

पीड़ित महिला की व्यथा

सुगामती एक विधवा हैं, जिनके दो बेटे शहरों में मजदूरी करते हैं। जमीन उनकी एकमात्र आजीविका थी, जहां वे धान, कोदो और सब्जियां उगाती थीं। भतीजे के कब्जे के बाद वे भुखमरी के कगार पर पहुंच गईं। उन्होंने कहा, “भतीजा आया और बोला ताई, जमीन मेरा काम संभाल लूंगा। अब वहां उसका ट्रैक्टर चलता है।” ग्रामीणों ने भी सुगामती का समर्थन किया, जो कवलसाय को “जमीन का भूखा” बताते हैं।

महिला ने अंबिकापुर एसपी और कलेक्टर को पत्र लिखा है। सामाजिक कार्यकर्ता उषा वर्मा ने मामला उठाया, जो महिलाओं के भूमि अधिकारों के लिए लड़ रही हैं।

सरगुजा में आदिवासी बहुल क्षेत्र होने से जमीन सौदे संवेदनशील हैं। पिछले साल 50 से अधिक मामले राजस्व न्यायालय पहुंचे, जहां फर्जी दस्तावेजों से हड़प ली गई जमीनें शामिल थीं। मेंड्रा खुर्द जैसे गांवों में भतीजे-भांजे विवाद आम हैं। सरकार ने डिजिटल भू-रिकॉर्ड लॉन्च किया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सत्यापन कमजोर है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सरगुजा में 120 एकड़ जमीन ऐसे ही हड़पी गई।

कलेक्टर ने विशेष टीम गठित की है, जो पटवारी रिकॉर्ड चेक करेगी। दोषी पाए जाने पर निलंबन और विभागीय जांच होगी।

Surguja: Six acres of land seized by declaring a living woman dead

ग्रामीणों ने पटवारी कार्यालय का घेराव किया। स्थानीय विधायक ने मामले को विधानसभा में उठाने का वादा किया। महिला संगठनों ने राजस्व सुधार की मांग की। प्रशासन ने सुगामती को अंतरिम राहत देने का भरोसा दिया।

वकील रमेश साहू ने बताया कि IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और राजस्व संहिता के तहत केस दर्ज हो सकता है। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच सकता है।

यह घटना राजस्व विभाग में पारदर्शिता की कमी उजागर करती है। सुगामती की लड़ाई अन्य पीड़ितों के लिए मिसाल बनेगी। प्रशासन का दावा है कि दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।

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