छठ महापर्व पर सरगुजा: पैलेस घाट की भव्यता और घुनघुट्टा में आयोजन, श्रद्धालुओं के स्वागत को ऐतिहासिक तैयारियाँ : Surguja on Chhath Mahaparva

Uday Diwakar
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Surguja on Chhath Mahaparva: सरगुजा:​​​ सरगुजा संभाग में छठ महापर्व की तैयारियों ने इस बार एक नई पहचान और भव्यता हासिल की है। शहर अंबिकापुर के हृदयस्थल शिवसागर बांध एवं घुनघुट्टा नदी दोनों ही स्थान श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार हैं। छठ पर्व 2025 के लिए प्रशासन, नगर निगम और सरगुजा राजपरिवार के समन्वित प्रयासों से घाटों के सौंदर्यीकरण, सुरक्षा, और व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव दिख रहे हैं। यह खबर छठ महापर्व पर स्थानीय आस्था, परंपरा और प्रगतिशीलता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती है।​

शिवसागर बांध : ऐतिहासिक पैलेस छठ घाट

शिवसागर बांध सरगुजा राजपरिवार की निजी संपत्ति है, जो अब छठ पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का नया प्रतीक बनती जा रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इसी साल महाशिवरात्रि पर पैलेस छठ घाट के कंक्रीटीकरण व सौंदर्यीकरण की आधारशिला रखी थी। बांध के पश्चिमी तट पर लगभग 500 फीट लंबे घाट का प्रथम चरण समय रहते पूरा कर लिया गया है, जिसमें करीब 10,000 वर्ग फीट क्षेत्र का समतलीकरण किया गया है। घाट में दो बड़े स्टेप (10-10 फीट) बनाए गए हैं, जिससे एक साथ सैंकड़ों श्रद्धालु पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं।

राजपरिवार ने छठ व्रतियों की बढ़ती संख्या और अंबिकापुर शहर के सौंदर्यीकरण को ध्यान में रखते हुए घाट के निर्माण का बीड़ा उठाया, और अपनी निजी संपत्ति को सार्वजनिक धार्मिक आयोजन के लिए समर्पित कर दिया। योजना के अगले चरण में बांध के दक्षिणी तट और अन्य हिस्सों पर भी बड़े घाटों का निर्माण किया जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में शिवसागर बांध सरगुजा का सबसे सुव्यवस्थित छठ घाट बनने की ओर अग्रसित है।​

छठ पर्व आयोजन समिति की देखरेख में घाट पर विशेष सफाई व सजावट के इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह लाइटिंग, बैरिकेडिंग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और महिला श्रद्धालुओं के लिए चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। सरगुजा राजपरिवार एवं चंद्रप्रकाश सिंह की अध्यक्षता वाली घाट समिति ने आयोजन में पूर्ण पारदर्शिता व सुव्यवस्था का ध्यान रखा। घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बड़ी पार्किंग, आपातकालीन चिकित्सा दल और स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई है।

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शिवसागर बांध के घाट प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां भी समारोह को विशेष बनाती हैं। नगर निगम ने सड़क मार्ग की मरम्मत, ट्रैफिक कंट्रोल और संपूर्ण घाट क्षेत्र की सफाई सुनिश्चित कर श्रद्धालुओं को सुविधाभूत माहौल प्रदान किया है।​

घुनघुट्टा नदी तट : सर्वाधिक श्रद्धालु, व्यवस्थित घाट

अंबिकापुर के दूसरे प्रमुख छठ आयोजन स्थल घुनघुट्टा नदी तट पर भी इस साल लगभग 2000 छठव्रतियों के पूजा करने की व्यवस्था की गई है। घाट पर चौड़ी सीढ़ियां, लगातार सफाई, नागरिक पुलिस की तैनाती और राहत कार्यों के इंतजाम इस वर्ष उल्लेखनीय हैं। प्रकाश व्यवस्था बेहतर की गई है ताकि सूर्योदय व सूर्यास्त के समय अर्घ्य देने में कोई बाधा न हो।
नगर निगम के प्रतिनिधियों और स्थानीय संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए फ्री ड्रिंकिंग वाटर, चलित शौचालय और मेडिकल किट की उपलब्धता सुनिश्चित की है। बारिश के बावजूद घाट की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए रेत और कंक्रीट से लेवलिंग भी की गई है।
ग्राम्य परिवेश में भी छठ पूजा के आयोजन पर ग्राम पंचायत द्वारा घाटों की समयबद्ध सफाई करवाई जाती है और सामाजिक कार्यकर्ता घर-घर जाकर व्रतियों की जरूरतों का पता लगाते हैं।​

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बढ़ती श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखते हुए यातायात पुलिस, नागर निगम और नदी सुरक्षा दल की तैनाती पूरे क्षेत्र में की गई है। महिलाओं की सुरक्षा तथा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के लिए महिला स्वयंसेवी दल सक्रिय हैं। कई युवा समूह स्वेच्छा से घाट पर आपात स्थिति प्रबंधन में सहयोग कर रहे हैं।

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छठ पर्व के चार दिवसीय आयोजन के दौरान अंबिकापुर शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोकगीतों, नृत्य प्रस्तुतियों और महाआरती से माहौल भक्तिमय हो जाता है। छठ गीतों, ढोल-नगाड़ों और सूर्य अर्घ्य के स्वर शहर को जीवंत बना देते हैं। स्थानीय कलाकारों व आमजन के सहयोग से छठ महापर्व सरगुजा में सामाजिक समरसता का उत्सव बन गया है।

Surguja on Chhath Mahaparva

इस वर्ष छठ पर्व के ऐतिहासिक और सुव्यवस्थित आयोजन में नगर निगम, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। पूर्व मुख्यमंत्री, मेयर, नगर निगम प्रतिनिधि और सरगुजा राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य न केवल घाटों के निर्माण में योगदान दे रहे हैं, बल्कि आयोजन की हर छोटी-बड़ी जरूरत पर स्वयं निगरानी भी रखते हैं।
जनता और श्रद्धालुओं का भरोसा बढ़ाने के लिए सभी प्रशासनिक महकमे घाट पर लगातार गश्त कर रहे हैं। घाट पर व्रतियों से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता के लिए एम्बुलेंस तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी तैनात की गई है.

छठ महापर्व के बहाने सरगुजा ने धार्मिक आस्था व सामाजिक भागीदारी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया है। शिवसागर बांध का पैलेस छठ घाट, राजपरिवार की ऐतिहासिक पहल और नगर निगम की सक्रियता ने सरगुजा को क्षेत्रीय पहचान दिलाई है। यह पर्व स्थानीय सांस्कृतिक गौरव के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सुरक्षा और आधुनिकता की दिशा में जिले की नई यात्रा का प्रतीक बन गया है।
इस ऐतिहासिक अवसर का उत्साह देखा जा सकता है, जब श्रद्धालु, नागरिक, प्रशासन और राजपरिवार—सभी एक मंच पर आकर सौंदर्य, सुरक्षा और सुव्यवस्था के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण स्थापित कर रहे हैं। आगामी वर्षों में शिवसागर बांध और घुनघुट्टा नदी तट छठ पर्व आयोजन में प्रदेशभर की आस्था का परचम बनकर उभरेगा

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