सरगुजा मैनपाट: हाथी के हमले में लकड़ी बीनने गई 65 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, वन विभाग पर ग्रामीणों का गुस्सा : Surguja Mainpat: A 65-year-old woman who was collecting wood died tragically in an elephant attack

Uday Diwakar
4 Min Read

Surguja Mainpat: A 65-year-old woman who was collecting wood died tragically in an elephant attack: सरगुजा:​​​अंबिकापुर।मैनपाट: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष फिर से खूनी रूप ले चुका है। बरिमा गांव की 65 वर्षीय बुजुर्ग इतवारी बाई सोमवार को जंगल में लकड़ी बीनने गई थीं, जहां जंगली हाथी ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। दो दिनों की सघन खोजबीन के बाद उनका क्षत-विक्षत शव जंगल के गहराई में बरामद हुआ। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है और ग्रामीणों का वन विभाग पर गुस्सा भड़क उठा है।

बरिमा गांव के निवासी इतवारी बाई पति स्वर्गीय रामू के साथ रहती थीं। गरीबी के कारण वे रोजाना जंगल जाते हुए लकड़ी बीनकर बेचतीं। सुबह वे अपने सामान्य रूट पर निकलीं, लेकिन लौटीं नहीं। परिजनों ने तलाश शुरू की, लेकिन अंधेरे में कुछ हाथ न लगा। ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया। लगभग 2 किलोमीटर अंदर जंगल में उनका शव मिला, जो हाथी के हमले के स्पष्ट निशान लिए हुए था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि मौत हाथी के कुचलने से हुई।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटे सुरेश ने कहा, “मां रोज यही करती थीं। वन विभाग ने कभी चेतावनी नहीं दी। अब कौन जिम्मेदार?” गांव में शोक की लहर है और महिलाएं जंगल जाने से डर रही हैं।

मैनपाट क्षेत्र छत्तीसगढ़ का ‘मिनी शिलांग’ कहलाता है, लेकिन यहां हाथियों का झुंड बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में सरगुजा जिले में 15 से अधिक मौतें हाथी हमलों से हुई हैं। मैनपाट के जंगल में 20-25 हाथी सक्रिय हैं, जो फसल और जंगल के किनारे बसे गांवों में घुस आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वन क्षेत्र सिकुड़ने और जलवायु परिवर्तन से हाथी भटक रहे हैं। बरिमा जैसे सीमावर्ती गांव सबसे खतरे में हैं।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

घटना के बाद बरिमा और आसपास के गांवों में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। उन्होंने वन विभाग कार्यालय घेर लिया और नारेबाजी की। पंचायत प्रतिनिधि ने कहा, “हमें पहले ही चेतावनी दी जाती, तो इतवारी बाई बच जातीं। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रभावित परिवार को 10 लाख मुआवजा, रोजगार और जंगल की बाउंड्री वॉल बने।

वन विभाग के डिप्टी रेंजर मनोज कुमार ने बताया, “हमने सर्च टीम भेजी और शव बरामद कराया। हाथियों को भगाने के लिए कंबल जलाने और पटाखे फोड़ने का अभियान चल रहा है। मुआवजा प्रक्रिया शुरू हो गई।” लेकिन ग्रामीण इससे असंतुष्ट हैं। जिला वन अधिकारी ने बैठक बुलाई है।

Surguja Mainpat: A 65-year-old woman who was collecting wood died tragically in an elephant attack

सरगुजा कलेक्टर ने उच्चाधिकारियों को सूचित किया। राज्य सरकार ने पहले ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन’ योजना शुरू की, जिसमें सोलर फेंसिंग और जागरूकता शामिल है। मैनपाट में 5 गांवों में फेंसिंग प्रस्तावित है, लेकिन कार्यान्वयन धीमा। विशेषज्ञ सुझाते हैं: हाथी कॉरिडोर चिह्नित करें, ग्रामीणों को वैकल्पिक रोजगार दें।

यह घटना सर्जुजा के 50 से अधिक ऐसे गांवों की कहानी दोहराती है। यदि तत्काल कदम न उठे, तो और जानें जा सकती हैं। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि इतवारी बाई की मौत व्यर्थ न जाए।

यह भी पढ़ें-अंबिकापुर में दूषित पानी का कहर: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया नगर निगम कार्यालय का जोरदार घेराव, उच्च स्तरीय जांच की मांग

Share This Article
Leave a Comment