सूरजपुर: विवाह का फरेब कर युवती से दुष्कर्म, आरोपी जेल भेजा गया : Surajpur Woman raped on pretext of marriage

Uday Diwakar
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Surajpur Woman raped on pretext of marriage: सूरजपुर :सूरजपुर जिले में युवाओं और नाबालिगों से जुड़े कुछ घोर दुष्कर्म मामलों ने समाज को हिला कर रख दिया है। खासकर विवाह का झांसा देकर लड़कियों के साथ किए गए दुष्कर्म और नाबालिग छात्राओं के साथ पाबंदियों और धमकियों के बीच हुई हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक चेतना दोनों पर सवाल उठाए हैं। नीचे सूरजपुर जिले में सामने आए ऐसे ही गंभीर घटनाओं का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत है।

सूरजपुर के करंजी चौकी क्षेत्र में एक 20 वर्षीय युवती के साथ विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया। आरोपी युवक ने रिश्तेदार की शादी में युवती से जान पहचान कर उसे शादी का वादा किया, लेकिन शादी टालते हुए लंबे समय तक युवती का यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने कई बार शादी की फरियाद की, किन्तु आरोपी ने बहाने बनाकर शादी से बचता रहा। पीड़िता के हिम्मत जुटाकर थाने शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस घटना ने समाज में विकृत सोच और महिला सुरक्षा की अदृश्य कमजोरियों को उजागर किया है।

सूरजपुर जिले से ऐसी घटनाएं केवल यहीं तक सीमित नहीं हैं। यहां की एक आठवीं कक्षा की छात्रा ने अपने तीन युवकों द्वारा कई मौकों पर दुष्कर्म किए जाने की घटना शिक्षक को बताई। स्कूल में आयोजित “गुड टच-बैड टच” जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उसे समझ में आया कि वह शोषण की शिकार हो रही है। उसके बाद उसने अपने शिक्षकों को इस बात की जानकारी दी, जिससे पुलिस टीमें सक्रिय हुईं और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यहां तक कि इस मामले में एक महिला आरोपी भी संदिग्ध है, जो पीड़िता की रिश्तेदारी में बताई जा रही है और आरोपियों को सहयोग करती थी। इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सूरजपुर के ओड़गी थाना क्षेत्र से एक और गंभीर मामला सामने आया, जिसमें नेत्रहीन नाबालिग लड़की के साथ उसके सौतेले पिता और रिश्ते में लगा नाना द्वारा दो वर्षो से लगातार शोषण किया गया। इसके बाद अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और विशेष संवेदनशीलता के साथ कानून लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इस केस ने यह साबित कर दिया कि घर के अंदर के भरोसेमंद लोग भी सबसे बड़े दरिंदा बन सकते हैं, और ऐसे अपराध के खिलाफ न्यायपालिका को कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

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Surajpur Woman raped on pretext of marriage

सूरजपुर पुलिस ने इन सभी मामलों में तेजी से कार्यवाही कर आरोपीयों को गिरफ्तार किया। विशेष टीमों का गठन कर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों पर तुरन्त कठोर कार्रवाई की। न्यायालयों ने दोषियों को सजा देते हुए यह बढ़िया संदेश दिया कि कानून के कटघरे में आकर ही अपराधियों का वास्तविक न्याय संभव है। पॉक्सो एक्ट, दंड संहिता की कठोर धाराओं के साथ-साथ अन्य उपयुक्त कानूनों के अंतर्गत सुनवाई कर बड़े जुर्माने और लंबे जेलवास की सजा सुनाई गई।

इन मामलों से समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता की जरूरत अत्यधिक बढ़ गई है। गुड टच-बैड टच जैसे कार्यक्रम युवाओं और बच्चों को अपने अधिकार जानने, खतरों से पहचान बनाने और धमकी-डरावनी परिस्थितियों में आवाज उठाने का साहस प्रदान करते हैं। परिवारों, शिक्षकों और समाज के हर वर्ग को चाहिए कि वे बच्चों और महिलाओं की रक्षा के लिए संवेदनशील और सजग रहें।

दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के साथ पीड़ितों को भावनात्मक और मानसिक सहारा देना भी जरूरी होता है। कई मामलों में पीड़ित परिवार के साथ सामाजिक दबाव, मानसिक यातना और आर्थिक तंगी झेलते हैं। इसलिए पुनर्वास, काउंसलिंग और शिक्षा के जरिए पीड़ितों की जिंदगी को पुनः सामान्य बनाने की कोशिश होनी चाहिए। सरकारी योजनाओं के साथ गैरसरकारी सामाजिक संस्थाएं भी इस ओर काम कर रही हैं।

सूरजपुर जिले में विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म, नाबालिग छात्राओं के शोषण और दृष्टिहीन बालिका के साथ दरिंदगी जैसे दर्दनाक मामले सामने आ रहे हैं। ये घटनाएं समाज की कई कमजोरियों को उजागर करती हैं। इस स्थिति में पुलिस और न्यायपालिका की प्रभावी भूमिका सराहनीय है, परन्तु समाज के हर तबके को सजग होकर बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए कदम उठाने होंगे। शिक्षा, समझदारी, और कड़े कानून के सामरिक उपयोग से ही इन जघन्य अपराधों को कम किया जा सकता है।

साथ ही सार्वजनिक जागरूकता, संवेदनशीलता और व्यावहारिक समर्थन के संगत प्रयास से पीड़ितों को न्याय लगाने और उनकी जिंदगी फिर से खुशहाल बनाने का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है, जिससे सूरजपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सामाजिक व्यवस्था मजबूत और सुरक्षित बने।

यह एक लंबा और गंभीर मुद्दा है, जो न केवल पुलिस या सरकार का, बल्कि पूरे समाज का संयुक्त अभियान होना चाहिए, ताकि बेटियां सुरक्षित रहें, उनका सम्मान हो, और वे सभी भय और अत्याचार से मुक्त होकर जीवन जी सकें।

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