Surajpur rice scam: 32838 quintals missing from Sawarwan centre: सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में सरकारी धान खरीदी की व्यवस्था में एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। जिले के सावारावां धान उपार्जन केंद्र में अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन किया, तो रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर देखकर उनके होश उड़ गए। जांच में पाया गया कि केंद्र से लगभग 32,838 क्विंटल धान कम है। वर्तमान बाजार मूल्य और सरकारी दरों के हिसाब से इस गायब धान की कुल कीमत 10 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद सहकारिता और खाद्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
सूरजपुर जिला प्रशासन ने किसानों से धान खरीदी के अंतिम चरण में राज्य स्तर की टीम भेजी थी। सावारावां उपार्जन केंद्र, जो क्षेत्र के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है, पर भौतिक सत्यापन के दौरान गोदामों की तहों में धान के बैग गायब पाए गए। रजिस्टर में दर्ज 1,50,000 क्विंटल से तुलना करने पर 32,838 क्विंटल का अंतर सामने आया।
अधिकारी हैरान थे कि इतनी बड़ी मात्रा कैसे गायब हो सकती है। प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ बैग खाली पड़े थे, जबकि रिकॉर्ड में भरे हुए दर्ज हैं। जिला सहकारिता समिति के पदाधिकारियों पर सीधा आरोप लगा है। स्थानीय किसानों ने लंबे समय से शिकायत की थी कि उनके धान का भुगतान देरी से हो रहा है, लेकिन अब यह घोटाला सबके सामने आ गया।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह घोटाला कई स्तरों पर हुआ। धान के बैगों को कागजों पर तो दर्ज किया गया, लेकिन वास्तव में निजी व्यापारियों को सस्ते दामों पर बेच दिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि गोदाम प्रभारी और नापतौल एजेंट मिले हुए थे। सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा धान बाजार में ऊंचे दामों पर बिक्री के लिए डायवर्ट किया गया। इसके अलावा, फर्जी रसीदें और एंट्री बनाकर किसानों का धान गायब करने का खेल चला। एक स्थानीय किसान नेता ने बताया, “हमारे धान को तोलते समय कम तौला जाता था, लेकिन अब पता चला कि गोदाम से ही पूरा लॉट गायब है।” यह घटना छत्तीसगढ़ के धान बेल्ट में किसानों के विश्वास को हिला रही है।
गायब धान का मूल्यांकन सरकारी दर 2400 रुपये प्रति क्विंटल और बाजार दर 2800 रुपये के औसत पर किया गया। कुल 32,838 क्विंटल का नुकसान लगभग 10.5 करोड़ रुपये का है। इसमें किसानों का भुगतान लंबित होना, राज्य कोष की हानि और सहकारी समितियों का घाटा शामिल है। सूरजपुर जिले में कुल धान उपार्जन 10 लाख क्विंटल से अधिक था, जिसमें सावारावां केंद्र का हिस्सा प्रमुख था। इस घोटाले से राज्य सरकार की ‘अन्नदाता किसान सम्मान योजना’ पर सवाल उठे हैं। प्रभावित किसानों ने कहा कि उनका बोनस और ब्याज प्रभावित होगा। जिला व्यापार एवं उद्योग संघ ने भी चिंता जताई कि इससे बाजार कीमतें प्रभावित होंगी।
Surajpur rice scam: 32838 quintals missing from Sawarwan centre
खुलासे के बाद कलेक्टर ने तत्काल केंद्र प्रभारी, सहायक प्रबंधक और नापतौल स्टाफ निलंबित कर दिया। सहकारिता विभाग के संचालक ने प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने गोदाम सील कर फॉरेंसिक ऑडिट शुरू किया। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सूरजपुर प्रशासन को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। विपक्षी दलों ने सदन में मुद्दा उठाने की चेतावनी दी है। स्थानीय विधायक ने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया। विभाग ने सभी उपार्जन केंद्रों पर विशेष सत्यापन अभियान चलाने का फैसला लिया है।
सूरजपुर के हजारों किसान सड़कों पर उतर आए। सावारावां क्षेत्र में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि यह सिस्टमैटिक घोटाला है, जो पिछले तीन वर्षों से चल रहा था। एक बुजुर्ग किसान ने कहा, “हम कर्ज लेकर धान उपजाते हैं, ऊपर से यह लूट। अब कौन भरोसा करेगा?” महिलाओं ने भी गोदाम के बाहर नारेबाजी की। प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की, लेकिन किसानों ने मुआवजा और दोषियों को सजा की मांग की। क्षेत्रीय मीडिया ने इसे ‘धान कांड’ नाम दिया है।
यह घोटाला छत्तीसगढ़ की धान खरीदी प्रक्रिया की कमजोरियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ट्रैकिंग, सीसीटीवी और तृतीय-पक्ष ऑडिट जरूरी हैं। राज्य सरकार ने अब पारदर्शी ऐप-आधारित सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है। सूरजपुर जैसे ग्रामीण जिलों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त निगरानी चाहिए। किसान नेता ने चेतावनी दी कि अगली फसल में उपार्जन बहिष्कार हो सकता है। प्रशासन ने गायब धान की बरामदगी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।
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