सूरजपुर: कोट चन्दरपुर में ठंड से बचने को जलाया अंगीठी, दम घुटने से परिवार के 3 की मौत – 4 साल का बच्चा भी मृत : Surajpur: A fire was lit in Kot Chanderpur to escape the cold

Uday Diwakar
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Surajpur: A fire was lit in Kot Chanderpur to escape the cold: सूरजपुर :​ ​​छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सन्नाटे में डुबो दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम कोट चन्दरपुर में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की ठंड से बचने के चक्कर में दम घुटने से मौत हो गई। मृतकों में घर का मुखिया 28 वर्षीय कवल सिंह, उनकी 25 वर्षीय पत्नी कुंती और उनका मात्र चार वर्षीय मासूम बेटा शामिल है। यह हादसा रात का है, जब कड़ाके की ठंड से परेशान परिवार ने बंद कमरे में कोयले की अंगीठी जला ली।

कोट चन्दरपुर गांव के निवासी कवल सिंह अपने परिवार के साथ एक छोटे से कमरे में सो रहे थे। ठंड से बचने के लिए उन्होंने कमरे में कोयला जलाया, लेकिन कमरे में कोई खिड़की या रोशनदान न होने से धुआं बाहर नहीं निकल सका। रात के अंधेरे में धीरे-धीरे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई, जिससे तीनों की दम घुटने से मौत हो गई। सुबह जब पड़ोसियों को कोई हलचल न दिखी, तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर झांका। भयानक दृश्य देखकर गांव में कोहराम मच गया।

पुलिस को सूचना मिलते ही कोतवाली थाने की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में अंगीठी से निकली जहरीली गैस को मौत का मुख्य कारण बताया गया। तीनों शवों को सूरजपुर के जिला अस्पताल के पोस्टमॉर्टम हाउस भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले को प्राकृतिक मौत का दर्ज करते हुए पंचनामा भरकर जांच शुरू कर दी है। एसपी सूरजपुर ने बताया कि कमरे की बंद अवस्था और वेंटिलेशन की कमी ने इस हादसे को आमंत्रित किया।

कवल सिंह एक मेहनती किसान थे, जो अपनी पत्नी कुंती और छोटे बेटे के साथ सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी और वे गांव के एक छोटे से मकान में रहते थे। कुंती घरेलू कामकाज संभालती थीं, जबकि चार साल का बच्चा अभी स्कूल जाने की उम्र में था। इस घटना ने न केवल परिवार को विधवा कर दिया, बल्कि गांव में मातम पसर गया है। पड़ोसी रामू कहते हैं, “कवल भैया बहुत सीधे-सादे इंसान थे। ठंड के मौसम में अंगीठी जलाना आम बात है, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह आखिरी रात साबित होगी।”

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गांव वालों का कहना है कि कोट चन्दरपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में सर्दी के दिनों में ऐसी प्रथा आम है। लोग बंद कमरों में कोयला या लकड़ी जलाकर गर्मी लेते हैं, बिना यह जाने कि इससे जानलेवा गैस निकलती है। इस हादसे के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। कई परिवारों ने अपनी अंगीठियां हटा ली हैं। स्थानीय सरपंच ने जिला प्रशासन से जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है।

कोतवाली थाना प्रभारी ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचकर फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य संग्रह किया। कमरे से अंगीठी का राख और कोयले के टुकड़े बरामद हुए। पीएम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक रूप से दम घुटना ही कारण लग रहा है। जिला कलेक्टर ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा की। प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सर्दी के मौसम में ग्रामीणों को जहरीली गैस से बचाव के उपाय बताए जाएं।

पुलिस ने आसपास के गांवों में जागरूकता के लिए पंपलेट बांटने शुरू कर दिए हैं। इसमें लिखा है- “अंगीठी बंद कमरे में न जलाएं, खिड़की-दरवाजा खुला रखें। गैस डिटेक्टर का उपयोग करें।” एसपी ने चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, कोयला जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) नामक गैस निकलती है, जो बिना गंध वाली होती है। यह गैस खून में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है, जिससे दम घुट जाता है। सर्दी में भारत के ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं आम हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर और उल्टी शामिल होते हैं, लेकिन गहरी नींद में व्यक्ति को पता नहीं चलता। बचाव के उपायों में इलेक्ट्रिक हीटर या खुली हवा में अंगीठी जलाना शामिल है।

Surajpur: A fire was lit in Kot Chanderpur to escape the cold

पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। सूरजपुर जिले में ही दो साल पहले एक ही तरह का हादसा दो भाइयों की मौत का कारण बना था। ग्रामीणों को सर्दी में सुरक्षित गर्मी के साधन अपनाने चाहिए।

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