Superintendent of Bastar Boys’ Ashram including immediate suspension for showing obscene videos and assaulting him : बस्तर :जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के गोंदियापाल क्षेत्र स्थित बालक आश्रम में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां के सहायक शिक्षक तथा आश्रम अधीक्षक सुकरू राम बघेल पर छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच में पता चला कि अधीक्षक बच्चों के साथ मारपीट करते थे, गाली-गलौज करते थे और अश्लील वीडियो दिखाकर उनका अनुकरण करने के लिए प्रेरित करते थे। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कलेक्टर एस. हरीश ने 18 सितंबर 2025 को आश्रम का आकस्मिक निरीक्षण किया।
Superintendent of Bastar Boys’ Ashram including immediate suspension for showing obscene videos and assaulting him
निरीक्षण के दौरान बच्चों से बातचीत में यह मामला सामने आया, जिससे प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधीक्षक सुकरू राम बघेल को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत निलंबित कर दिया। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय खंड शिक्षा अधिकारी बस्तर कार्यालय होगा।
यह मामला बाल संरक्षण और आश्रम प्रशासन की निष्पक्षता के लिए चिंता जनक है। बच्चों के अभिभावकों सहित स्थानीय समाज ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और दोषी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर हरीश ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आश्रमों की नियमित निगरानी और सख्त अनुशासन सुनिश्चित करने का भी भरोसा दिलाया है।
यह घटना बालक आश्रमों में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति प्रशासन के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। प्रशासन ने साफ किया है कि बालकों के साथ किसी भी प्रकार की अनुचित हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बच्चों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इससे पहले भी बालक आश्रमों में सुरक्षा, शिक्षा और देखभाल से जुड़ी कई समस्याएं उजागर हो चुकी हैं, लेकिन इस बार की कार्रवाई से उम्मीद जताई जा रही है कि बच्चों का बेहतर संरक्षण और सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा।
बस्तर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बालक आश्रमों में जुड़े कर्मचारी बच्चों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार होंगे। साथ ही कर्मचारियों के प्रशिक्षण में सुधार किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। प्रशासन ने आश्रयों में रहने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित और पोषणयुक्त वातावरण बनाने को अपना प्राथमिक कार्य बताया है।
यह मामला बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके सुरक्षित विकास के लिए सभी संबंधितों के लिए एक चेतावनी भी है कि बाल सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बस्तर बालक आश्रम मामले ने सभी के बीच बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता को एक बार फिर से उजागर किया है। प्रशासन की कड़ी कार्रवाई से स्थानीय जनता में भरोसा बढ़ा है कि भविष्य में बच्चों के साथ होने वाली किसी भी अनुचित घटना को रोकने के लिए तत्परता दिखाई जाएगी।
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