सुकमा: सुरक्षाबलों ने जंगलों में छिपी नक्सली ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का भंडाफोड़, बड़ी साजिश नाकाम : Sukma Security forces bust Naxalite ordinance factory hidden in the forests

Uday Diwakar
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Sukma Security forces bust Naxalite ordinance factory hidden in the forests: सुकमा :  सुकमा जिले में नक्सली गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। मेट्टागुड़ा कैम्प क्षेत्र में जिला बल सुकमा और 203 कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने एक गुप्त नक्सली ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर उसे ध्वस्त कर दिया। इस फैक्ट्री से भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और उनके निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए। यह कार्रवाई नक्सली हमले की एक बड़ी साजिश को नाकाम करने में महत्वपूर्ण साबित हुई है।

Sukma Security forces bust Naxalite ordinance factory hidden in the forests नक्सलियों की हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़

मेट्टागुड़ा कैम्प क्षेत्र के ग्राम ईरापल्ली और कोईमेंटा के जंगल व पहाड़ियों में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को नक्सलियों की छिपी हुई हथियार निर्माण फैक्ट्री का पता चला। यहां बड़ी मात्रा में हथियारों का निर्माण चल रहा था और नक्सली इस हथियारों का इस्तेमाल बड़े हमले को अंजाम देने के लिए कर रहे थे। उस फैक्ट्री में वर्टिकल मिलिंग मशीन, बीजीएल लॉन्चर, 94 बीजीएल हेड्स, हैंड ग्राइंडर, गैस कटर, सोलर बैटरी, ट्रिगर मैकेनिज्म, बोरवेल ड्रिलिंग बिट्स के अलावा हथियार निर्माण के लिए आवश्यक कई अन्य उपकरण पाए गए।

सर्च ऑपरेशन की शुरुआत सुबह के समय मेट्टागुड़ा कैम्प से हुई। जिला बल सुकमा और 203 कोबरा बटालियन की टीम ने जंगलों में नक्सली छिपे होने की सूचना पर व्यापक तलाशी शुरू की। वन क्षेत्रों में गहन निगरानी कर जब फैक्ट्री का पता चला, तो तुरंत फैक्ट्री को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त सर्च अभियान भी चलाया गया ताकि अन्य छिपे हुए ठिकानों का पता लगाया जा सके।

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सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की कार्रवाई से नक्सलियों के हथियार निर्माण और आपूर्ति नेटवर्क को बड़ा झटका लग रहा है। नक्सल विरोधी अभियान को तेज करने के लिए आगे भी इसी प्रकार के अभियान जारी रहेंगे ताकि क्षेत्र में शांति और विकास सुनिश्चित किया जा सके।

यह फैक्ट्री खतरनाक मंसूबों का हिस्सा थी जहां नक्सल बड़े पैमाने पर हथियार और विस्फोटक तैयार कर रहे थे। बीजीएल लॉन्चर जैसे भारी हथियारों के साथ-साथ विस्फोटक सामग्री की बड़ी खेप से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि नक्सलियों का मकसद किसी बड़े हमले को अंजाम देना था। सुरक्षाबलों की त्वरित कार्रवाई ने इस साजिश को रोका और नक्सलियों को महत्वपूर्ण संसाधनों से वंचित कर दिया।

सुकमा जिले जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में इस तरह की कार्रवाई से न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि स्थानीय लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। लोगों ने सुरक्षाबलों की इस बहादुरी की सराहना की है और आशा जताई है कि नक्सलवाद की समस्या जल्द ही समाप्त हो जाएगी। सुरक्षा बलों ने आश्वासन दिया है कि वे क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे और नक्सलियों के विस्फोटक ठिकानों को लगातार निशाना बनाते रहेंगे।

यह कार्रवाई नक्सली उन्मूलन अभियान के तहत बीते कुछ महीनों में मिली कई सफलताओं में से एक है। जबकि 22 सितंबर को नारायणपुर के अबूझमाड़ में भी सुरक्षाबलों ने प्रमुख नक्सल नेताओं को मार गिराया था, जिससे नक्सली संगठन को भारी क्षति पहुंची थी, वहीं यह नया ऑपरेशन भी उनकी शक्ति को कम करने वाला कदम है।

सुरक्षा बलों के विशेष अधिकारी इस बात पर जोर देते हैं कि नक्सली रणनीतियां बहुत ही चालाक और खतरनाक होती हैं, इसलिए उनके ठिकानों की पहचान कर उन्हें नष्ट करने के लिए सतत निगरानी, गुप्त सूचनाओं के अच्छे इस्तेमाल और सटीक समय पर कार्रवाई करना अनिवार्य है। इस दिशा में संयुक्त टीमों की भूमिका अहम होती जा रही है, जो लगातार इलाके में गश्त और सर्च ऑपरेशन करते रहते हैं।

बरामद हथियार और विस्फोटक सामग्री

ऑपरेशन के दौरान बरामद की गई सामग्री में बीजीएल लॉन्चर, हथियार निर्माण में उपयोग होने वाली वर्टिकल मिलिंग मशीन, गैस कटर, हैंड ग्राइंडर, सोलर बैटरी, ट्रिगर मैकेनिज्म, बोरवेल ड्रिलिंग बिट, खाली शेल, स्टील पाइप्स, आयरन स्क्रैप और विस्फोटक सामग्रियां शामिल हैं। यह सभी सामान नक्सलियों की हमले की तैयारी को दर्शाता है, जिससे सुरक्षाबलों ने समय रहते इस खतरे को खत्म किया।

सुकमा और अन्य नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षाबलों का नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है। अभियान के तहत नक्सली ठिकानों, हथियार फैक्ट्रियों और असमाजिक तत्वों की खोजबीन की जाती है। जिला पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा है कि नक्सली अब कमजोर पड़ रहे हैं और उनकी पैठ कम हुई है। अभियान की गति और तीव्रता बढ़ाई जा रही है जिससे क्षेत्र में जल्द ही स्थायी शांति स्थापित हो सके।

साथ ही, स्थानीय प्रशासन भी विकास कार्यों को बढ़ावा दे रहा है ताकि लोगों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से जोड़कर सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित किया जा सके। सरकार की नीतियां और सुरक्षाबलों की कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का यह हिस्सा नक्सल मुक्त क्षेत्र बन जाएगा।

यह सफलता न केवल सुरक्षाबलों की रणनीतिक और सक्रिय भूमिका का संकेत है बल्कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा में भी आश्वासन प्रदान करती है। नक्सलियों के अवैध हथियार निर्माण केन्द्रों का ध्वस्त होना क्षेत्रीय शांति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सुरक्षा बल सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के साथ आगे भी ऐसे महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम देते रहेंगे और नक्सलियों को खत्म करने के लिए समर्पित रहेंगे।

इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि मजबूत सैन्य कार्रवाई और सामजिक जागरूकता के जरिए नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे छत्तीसगढ़ में स्थायी विकास और शांति सुनिश्चित हो सकेगी।

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