युक्तियुक्तकरण का साइड इफेक्ट : राजिम में फिंगेश्वर कन्या शाला के मर्ज के खिलाफ छात्राओं का उग्र विरोध, राजिम–महासमुंद मार्ग जाम : Side effect of rationalization Fierce protest by girl students

Uday Diwakar
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Side effect of rationalization Fierce protest by girl students: रायपुर : राजिम। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप शिक्षा विभाग में जहां कई सुधार और संगठनात्मक पुनर्गठन हुए हैं, वहीं इसके पीछे जनमानस और छात्रों में असंतोष की भी लंबी फेहरिस्त बन रही है। इसी कड़ी में गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां फिंगेश्वर कन्या शाला को बॉयज स्कूल में मर्ज करने के आदेश के खिलाफ छात्राओं ने सख्त विरोध किया। छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिससे राजिम–महासमुंद मार्ग दो घंटे तक जाम रहा।

Side effect of rationalization Fierce protest by girl students

इस मर्जिंग आदेश ने न केवल छात्राओं बल्कि उनके अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी पैदा कर दी है। छात्राओं का कहना है कि लड़कों के साथ ही पढ़ाई करने से उन्हें असुरक्षा का अनुभव होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मर्जिंग के खिलाफ दृढ़ हैं और जब तक यह आदेश वापस नहीं लिया जाता, वे सड़क से नहीं हटेंगी। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने जोरदार नारेबाजी की और जिला प्रशासन से तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

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प्रशासन की ओर से विरोध को काबू में करने के लिए अधिकारी मौके पर थे और छात्राओं को समझाने की कोशिश भी की गई, लेकिन छात्राओं ने सख्त रुख अपनाया। इससे पहले भी कई बार छात्राएं इस मामले को लेकर ज्ञापन सौंप चुकी हैं, लेकिन उनका कोई समाधान नहीं निकला। अभिभावक और शिक्षक भी छात्राओं के समर्थन में खड़े दिखे और उन्होंने कहा कि यह मर्जिंग न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डालेगी बल्कि छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठाएगी। खासकर जब लड़कियों के स्कूल को लड़कों के स्कूल में मर्ज किया जाता है तो यह सुरक्षा और शिक्षा में असर का गहरा मुद्दा बन जाता है।

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छात्राओं की मांग है कि फिंगेश्वर कन्या शाला को पुनः अलग से संचालित किया जाए ताकि वे सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण में पढ़ाई कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनका यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे और भी बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं जो पूरे क्षेत्र में गहराएगा।

इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तकरण योजना की आलोचना को जोरदार बना दिया है और प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है कि वे स्थानीय हितों और छात्र हितों को प्राथमिकता देते हुए इस मामले का समाधान खोजें।

युक्तियुक्तकरण के नाम पर किए जा रहे विद्यालयों के मर्जिंग के कई सामाजिक व शैक्षिक दुष्परिणाम उभरकर सामने आ रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की सोच पर प्रश्न चिह्न लगने लगे हैं। राजिम का यह मामला इसके स्वरों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, जो कि प्रशासन और नीतिनिर्माताओं के लिए चेतावनी का संकेत भी है।

इस समाचार के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा सुधार की प्रक्रिया में स्थानीय सांस्कृतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी दखल जरूरी है ताकि छात्रों के भविष्य और उनकी सुरक्षा को सुरक्षित रखा जा सके। इस प्रकार, अधिकारियों को चाहिए कि वे इस विवादास्पद मर्जिंग आदेश को तुरंत पुनः जांचें और छात्राओं की मांगों को गंभीरता से लें।

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