Shri Krishna’s Birth at 12 Midnight and Special Information About the Puja: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भारत भर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। 2025 में यह शुभ पर्व 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जा रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार जन्माष्टमी की पूजा का सबसे अच्छा समय रात 12:04AM से 12:47AM तक रहेगा। इसी दौरान आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। चंद्रोदय का समय भी खास है, आज रात 11:32PM पर चंद्रमा का उदय होगा, जो पूजा के लिए शुभ माना गया है।
Shri Krishna’s Birth at 12 Midnight and Special Information About the Puja पूजा विधि और तैयारी
इस दिन सुबह स्नान करके शुभ व्रत या पूजा का संकल्प लें। श्रीकृष्ण की मूर्ति को साफ पात्र में रखें और पंचामृत से स्नान कराएँ। इसके बाद मूर्ति को वस्त्र, मुकुट, मोरपंख आदि से सजाएँ। भगवान को माखन-मिश्री, फल, तुलसी पत्र आदि अर्पित करें। रातभर भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है। 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनना विशेष फलदायक माना गया है। अंत में सभी भक्तों में प्रसाद बांटा जाता है।
व्रत खोलने का समय
व्रत धारण करने वाले लोग पूरे दिन सात्विक रहकर केवल फल या दूध ग्रहण करते हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद, यानी 17 अगस्त 2025 को किया जाता है।
मंदिरों में भगवान बालगोपाल को झूला झुलाया जाता है। खास सजावट और झांकियां लगाई जाती हैं। मथुरा और वृंदावन सहित प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। रातभर भजन-कीर्तन और पूजन का आयोजन किया जाता है।
यह भी पढ़ें-श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025: 15 और 16 अगस्त को मनाई जाएगी भव्य पूजा-अर्चना