Sensitive inspection by Women Minister Laxmi Rajwade: सूरजपुर :छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रवास के दौरान अपनी संवेदनशील नेतृत्व शैली का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जिला चिकित्सालय परिसर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर और नशा मुक्ति सह पुनर्वास केंद्र का गहन स्थल निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के माध्यम से उन्होंने सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए ठोस निर्देश जारी किए, जिससे महिलाओं, बच्चों और नशा पीड़ितों को त्वरित एवं प्रभावी सहायता सुनिश्चित हो सके।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े सबसे पहले सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं, जहां उन्होंने केंद्र की हर बारीकी पर नजर डाली। उन्होंने केस रजिस्टर, संधारित पंजी, उपलब्ध सुविधाओं जैसे परामर्श कक्ष, कानूनी सहायता इकाई, चिकित्सा यूनिट और आवास व्यवस्था का अवलोकन किया। केंद्र प्रभारी एवं स्टाफ से विस्तृत जानकारी ली तथा महिलाओं को दी जा रही सुरक्षा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, कानूनी मदद और पुनर्वास सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सखी केंद्र महिलाओं के लिए एक स्टॉप समाधान है, इसलिए यहां आने वाली हर पीड़िता को तुरंत न्याय और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने लाभार्थियों से सीधा संवाद किया। एक महिला ने घरेलू हिंसा के मामले में सहायता प्राप्त करने की बात बताई, जिस पर राजवाड़े ने तत्काल फॉलो-अप का निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, 24×7 हेल्पलाइन को सक्रिय रखने और पुलिस के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही, केंद्र में कार्यरत सखी वर्कर्स की प्रशिक्षण आवश्यकताओं पर चर्चा की तथा उन्हें संवेदनशीलता से कार्य करने की सीख दी। यह निरीक्षण न केवल औपचारिक था, बल्कि जरूरतमंदों के दर्द को महसूस करने वाला सच्चा प्रयास साबित हुआ।
नशा मुक्ति केंद्र पर फोकस
सखी केंद्र के बाद मंत्री नशा मुक्ति सह पुनर्वास केंद्र पहुंचीं। यहां उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं, detoxification प्रक्रिया, काउंसलिंग सत्रों और पुनर्वास योजनाओं का जायजा लिया। केंद्र में भर्ती मरीजों की संख्या, उपलब्ध बेड, दवाओं की स्टॉक और स्टाफ की उपलब्धता की जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशा छुड़ाने के बाद सामाजिक पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।
मंत्री ने नशा मुक्ति कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए जागरूकता अभियानों को तेज करने का आदेश दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के प्रकोप को देखते हुए स्कूलों, पंचायतों और सामुदायिक केंद्रों में निरंतर कैंप लगाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण हर नागरिक की जिम्मेदारी है और ऐसे केंद्र इस लड़ाई के मजबूत स्तंभ हैं। निरीक्षण में पाया गया कि केंद्र में डिटॉक्स बेड की कमी थी, जिसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के पश्चात मंत्री ने जिला कलेक्टर, सीएमओ, महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में सखी केंद्र के केस डिस्पोजल रेट, नशा मुक्ति में सफलता प्रतिशत और बजट उपयोगिता पर चर्चा हुई। उन्होंने विभागीय योजनाओं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पोषण अभियान, वृद्धजन पेंशन और दिव्यांग कल्याण की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने और कमजोरियों को दूर करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने को कहा।
इस बैठक में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की भौगोलिक चुनौतियों पर भी विचार किया गया। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने से सेवाओं की पहुंच एक बड़ी समस्या है, जिसके समाधान हेतु मोबाइल सखी वाहनों का प्रस्ताव रखा गया। मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने, कुपोषण कम करने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष निर्देश दिए। बैठक का समापन सकारात्मक नोट पर हुआ, जहां सभी अधिकारियों ने त्वरित कार्यान्वयन का भरोसा दिलाया।
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रतीक हैं। वे सूरजपुर जिले से विधायक रह चुकी हैं और स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ रखती हैं। मंत्री बनने के बाद उन्होंने बलरामपुर, जशपुर, कोरिया, बीजापुर जैसे जिलों में अनेक निरीक्षण किए हैं। इन दौनों में आंगनबाड़ी केंद्र, बालिका गृह, वृद्धाश्रम और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के स्कूलों का भी दौरा शामिल रहा। उनकी शैली में ग्रामीणों से खाट पर बैठकर बातचीत करना खास है, जो जननेता की पहचान है।
राजवाड़े ने कुपोषण उन्मूलन पर विशेष जोर दिया है। बलरामपुर दौरे में कुपोषण दर बढ़ने पर चिंता जताई और सुधार के उपाय सुझाए। जशपुर में खुला आश्रम और सखी केंद्रों का निरीक्षण कर सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया। कोरिया में नशा मुक्ति, महिला सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिक कल्याण पर दिशा-निर्देश दिए। ये सभी प्रयास राज्य सरकार की ‘महिला सशक्तिकरण’ नीति को मजबूत करते हैं।
सखी वन स्टॉप सेंटर योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा के शिकार व्यक्तियों को एक छत के नीचे सभी सेवाएं प्रदान करती है। छत्तीसगढ़ में प्रत्येक जिले में ऐसे केंद्र कार्यरत हैं, जो पुलिस, चिकित्सा, कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता देते हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे दूरस्थ क्षेत्र में यह केंद्र महिलाओं के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। 2025 तक राज्य में 33 सखी केंद्र कार्यरत हैं, जिन्होंने हजारों महिलाओं को न्याय दिलाया।
योजना के तहत पॉस्को मामलों, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा और पारिवारिक विवादों का त्वरित निपटारा होता है। मंत्री के निर्देशों से अब डिजिटल केस ट्रैकिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा बढ़ेगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को रायपुर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
छत्तीसगढ़ में नशे का प्रकोप चिंताजनक है, खासकर गंगा-दमन नदियों के किनारे। राज्य सरकार ने नशा मुक्ति नीति-2025 लागू की है, जिसमें 100 पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है। जीपीएम जिले में नशा मुक्ति केंद्र ने 200 से अधिक लोगों को नशे से मुक्त किया। मंत्री ने डी-एडिक्शन कैंप, योग थेरेपी और पारिवारिक काउंसलिंग को बढ़ावा देने को कहा।
कार्यक्रम में एनजीओ की भागीदारी बढ़ाने और युवाओं को नशे से दूर रखने हेतु स्कूल स्तर पर जागरूकता आवश्यक है। कोविड के बाद नशे की लत बढ़ी, जिसके विरुद्ध विशेष अभियान चल रहे हैं।
मंत्री के इस निरीक्षण ने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संदेश दिया। ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर सराहना की, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो वायरल हुए। हालांकि, आदिवासी क्षेत्रों में सांस्कृतिक बाधाएं, परिवहन कमी और जागरूकता अभाव चुनौतियां हैं। इन्हें दूर करने हेतु मोबाइल यूनिट्स और स्थानीय भाषा में प्रचार जरूरी।
महिला सशक्तिकरण से राज्य का समग्र विकास होगा। मंत्री की पहल से जीपीएम जिले में सेवाएं नई ऊंचाई छुएंगी।
भूपेश बघेल सरकार ने महिलाओं के लिए लाडली योजना, मित्र ऋण और स्ट्रीट वेंडिंग को बढ़ावा दिया। अनुपूरक बजट में महिला आत्मनिर्भरता पर 500 करोड़ आवंटित। बाल विकास के लिए पोषण ट्रैकर ऐप लॉन्च हुआ। ये प्रयास लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में प्रभावी हो रहे।
Sensitive inspection by Women Minister Laxmi Rajwade
मंत्री ने अगले तीन माह में सभी जिलों का निरीक्षण करने का लक्ष्य रखा। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू होगा। जागरूकता के लिए रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ेगा। इससे छत्तीसगढ़ महिला-अनुकूल राज्य बनेगा।
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का यह निरीक्षण न केवल प्रशासनिक था, बल्कि मानवीय करुणा से ओतप्रोत था। उनके निर्देशों से सखी केंद्र और नशा मुक्ति केंद्र मजबूत होंगे, जिससे हजारों जीवन रोशन होंगे। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता से सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा।
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