schoolgirls carrying cow dung in Jashpur: जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल से ऐसा मामला सामने आया, जिसने ग्रामीणों के साथ‑साथ पूरे इलाके की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यहां पढ़ने वाली नन्ही छात्राओं से स्कूल परिसर और आसपास जमा गोबर व गंदगी ढुलवाई जा रही थी, जबकि उसी समय उन्हें कक्षा में पढ़ाई करनी चाहिए थी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद गांव वाले भड़क गए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल समय में कुछ छात्राओं को यूनिफॉर्म में ही बाल्टी और डिब्बे लेकर गोबर व गंदगी उठाते देखा गया। बताया जा रहा है कि यह काम उन्हें नियमित रूप से करवाया जाता था, ताकि स्कूल और आसपास का हिस्सा साफ रहे। वीडियो में बच्चियां स्पष्ट रूप से असहज दिख रही हैं, जबकि आसपास कोई जिम्मेदार शिक्षक उन्हें ऐसा काम करने से रोकता नहीं दिखता।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल इसलिए भेजा जाता है ताकि वे पढ़‑लिखकर आगे बढ़ सकें, न कि उनसे मजदूरी करवाई जाए। कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल स्टाफ खुद झाड़ू या सफाई से बचने के लिए पढ़ने‑लिखने वाली उम्र के बच्चों को ऐसे काम में झोंक देते हैं, जो सीधे‑सीधे बाल अधिकारों का उल्लंघन है।
गुस्सा और विरोध
वीडियो वायरल होने के बाद गांव के लोगों ने स्कूल पहुंचकर शिक्षक‑कर्मचारियों से तीखी बहस की और पूछा कि आखिर बच्चियों से इस तरह का काम क्यों करवाया जा रहा है। कई अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि आगे से बच्चों से मजदूरी करवाई गई, तो वे सामूहिक रूप से स्कूल का घेराव करेंगे। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मौके पर पहुंचकर घटना की निंदा की और इसे शिक्षा के अधिकार कानून तथा बाल संरक्षण अधिनियम की भावना के खिलाफ बताया।
मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि नियमित निरीक्षण के बावजूद ऐसी स्थिति कैसे बनी रही। ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो, स्कूल में अलग से सफाईकर्मी की व्यवस्था की जाए और बच्चियों से लिखित में माफी मांगी जाए।
schoolgirls carrying cow dung in Jashpur
फिलहाल स्थानीय प्रशासन ने मौखिक रूप से जांच का भरोसा दिलाया है और कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं अभिभावक चाहते हैं कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में किसी भी सरकारी स्कूल में बच्चों से इस तरह की मजदूरी न कराई जाए, इसके लिए ठोस व्यवस्था की जाए।
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