भारत और एशिया का सबसे अमीर गांव जहां 5000 करोड़ रुपये से अधिक बैंक में जमा है : Richest Village in India and Asia

Uday Diwakar
5 Min Read
  • माधापर गुजरात का गांव है, जहां करीब 32,000 लोग रहते हैं और यहां की कुल फिक्स्ड डिपॉजिट राशि 7000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो इसे एशिया का सबसे अमीर गांव बनाती है।
  • गांव की समृद्धि का मुख्य कारण इसके 65% निवासियों का NRI होना है, जो विदेशों में रहते हुए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गांव के बैंकों में जमा करते हैं, जिससे गांव में भव्य बुनियादी सुविधाएं विकसित हो सकी हैं।

Richest Village in India and Asia : गुजरात के कच्छ जिले में स्थित माधापर गांव को न केवल भारत का सबसे अमीर गांव माना जाता है, बल्कि यह एशिया का धनाढ्यतम गांव भी है। इस छोटे से गांव की खास बात यह है कि यहाँ की कुल जमा राशि 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो इसे आर्थिक रूप से अत्यंत समृद्ध बनाती है। माधापर में लगभग 7,600 घर हैं और यहां करीब 92,000 लोग रहते हैं। इस गांव में कुल 17 बैंक शाखाएं काम करती हैं, जो सामान्य गांव के मुकाबले अत्यधिक हैं।

image 579

Richest Village in India and Asia

माधापर की इस समृद्धि का मुख्य कारण इसके अविभाजित और सशक्त नॉरेश्नल रिज़िडेंट इंडियन्स (NRIs) समुदाय से जुड़ा है। करीब 65% लोग विदेशों में बस बसे हैं और वे यूके, अमेरिका, कनाडा, खाड़ी देश और अफ्रीका जैसे कई देशों में रहते हैं। ये लोग विदेशों में काम करके कमाई करते हैं और नियमित रूप से अपने गांव में धन भेजते हैं। इस विदेशी कमाई को गांव के विकास और लोगों की समृद्धि में लगाया जाता है।

यह गांव 12वीं शताब्दी में मिस्त्री समुदाय द्वारा बसाया गया था, जो प्रदर्शन कला और निर्माण में निपुण था। समय के साथ माधापर ने आधुनिकता को गले लगाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया। आज माधापर में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पार्क, झीलें, बांध, आधुनिक गौशाला आदि मौजूद हैं। साथ ही, गांव में शहरी जीवन के तमाम सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं।

image 580

माधापर की विशेषता है इसके बैंकिंग नेटवर्क की व्यापकता, जहां लगभग 17 बैंक शाखाएं हैं। यहां के लोगों की फिक्स्ड डिपोजिट (FD) राशि करीब 5000 करोड़ रुपये से भी अधिक है। गांव के प्रति व्यक्ति बैंकिंग तहफा औसतन 15 लाख रुपये के आस-पास है, जो किसी छोटे शहर से भी अधिक समृद्धि का प्रतीक है।

1968 में लंदन में माधापर विलेज एसोसिएशन की स्थापना हुई, जो गांव और विदेशों में रहने वाले NRIs के बीच मजबूत कड़ी है। इस संस्था के माध्यम से अनेक सामुदायिक विकास योजनाएं संचालित की जाती हैं और गांव के लोगों की समस्याओं का समाधान निकाला जाता है।

माधापर की समृद्धि केवल धन के इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है। यह गांव पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध है। यहां के लोगों ने अपनी परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करते हुए आधुनिकता के साथ संतुलन स्थापित किया है। माधापर की सफलता ग्रामीण भारत के लिए एक मिसाल है कि किस तरह विदेशों में बसे लोगों का सहयोग और स्थानीय प्रयास मिलकर विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।

image 581

यह गांव दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी उच्च स्तर की समृद्धि, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुख-सुविधाओं का विकास संभव है। गांववासियों की मेहनत, विदेश में बसे परिजनों की निरंतर मदद और सामुदायिक भावना ने माधापर को देश-विदेश में एक उदाहरणीय स्थान दिलाया है।

माधापर की कहानी जमीनी हकीकत और आर्थिक विकास के बीच की दूरी को कम करती है। यह गांव प्रगतिशील सोच और पारंपरिक मूल्यों का संगम है, जो इसे भारत के सबसे धनी और विकसित गांवों में शीर्ष स्थान प्रदान करता है।

इस गांव की यह संपन्नता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय भी है। माधापर गांव ने सभी के लिए यह संदेश दिया है कि अगर सही दिशा में सामूहिक प्रयास हों और जीवन के हर क्षेत्र को विकास की ओर ले जाया जाए, तो गांव भी शहरी शहरों से कम नहीं रह सकते।

इस तरह, माधापर अपने आप में एक प्रेरणा स्रोत बन गया है, जो भारत सहित पूरी दुनिया के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए मॉडल साबित हो सकता है।

Read Also- तीन छात्राओं द्वारा फर्जी EWS सर्टिफिकेट बनवाकर NEET में एमबीबीएस सीट हासिल करने का बिलासपुर में सनसनीखेज खुलासा

Share This Article
Leave a Comment