मैनपाट में 12 हाथियों का आतंक: माटी घाट से टाइगर पॉइंट तक पर्यटन स्थल खाली, वन विभाग ने चेतावनी जारी : Reign of Terror by 12 Elephants in Mainpat

Uday Diwakar
5 Min Read

Reign of Terror by 12 Elephants in Mainpat: सरगुजा:​​​अंबिकापुर/मैनपाट,4 अप्रैल 2026।  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती सक्रियता से स्थानीय लोग और पर्यटक दहशत में हैं। माटी घाट, मेहता पॉइंट और टाइगर पॉइंट जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर 12 हाथियों का एक बड़ा दल घूम रहा है। वन विभाग ने मुख्य मार्गों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को सतर्क किया है, जिससे ये इलाके लगभग खाली हो चुके हैं। यह घटना क्षेत्रीय पर्यटन को गहरा झटका दे रही है।

मैनपाट को ‘छोटा तिब्बत’ के नाम से जाना जाता है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और ऊंचे व्यू पॉइंट्स के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह पठार सरगुजा टाइगर रिजर्व के निकट है, जहां हाथी और अन्य वन्यजीवों का निवास स्वाभाविक है। लेकिन हाल के दिनों में 12 हाथियों का यह दल जंगलों से निकलकर मानव बस्तियों और पर्यटन मार्गों पर पहुंच गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हाथी रात के समय फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और दिन में पर्यटक वाहनों को ललकार रहे हैं।


स्थानीय निवासी रामलाल कहते हैं, “पिछले एक सप्ताह से हाथी माटी घाट के पास विचरण कर रहे हैं। सुबह-सुबह पर्यटक बसें आने पर वे ट्रंपेट बजाकर हमला करने को तैयार हो जाते हैं।” इसी तरह, मेहता पॉइंट पर एक परिवार ने संकरी राह पर हाथियों से घिरने की घटना बताई। टाइगर पॉइंट, जो सूर्यास्त के नजारे के लिए मशहूर है, अब वीरान पड़ा है। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह दल मुख्य रूप से वयस्क नर हाथियों और कुछ मादाओं का मिश्रित समूह है, जो भोजन और पानी की तलाश में मानव क्षेत्रों में घुस आया है।

वन विभाग ने तत्काल कदम उठाते हुए मुख्य सड़कों पर ‘हाथी क्षेत्र, सावधान रहें’ के बोर्ड लगाए हैं। रेंजर सुरेश पटेल ने बताया कि ड्रोन से निगरानी की जा रही है और हाथियों को जंगल की ओर मोड़ने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई के कारण हाथी मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं। सरगुजा क्षेत्र में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जहां हाथियों ने गाड़ियां क्षतिग्रस्त कीं और कभी-कभी लोगों पर हमला भी किया।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

Reign of Terror by 12 Elephants in Mainpat


मैनपाट सरगुजा संभाग का प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक आते हैं। माटी घाट की घाटियां, मेहता पॉइंट का विहंगम दृश्य और टाइगर पॉइंट का रोमांच अब बंदिशों का शिकार हैं। होटल मालिक विजय साहू ने कहा, “अप्रैल का महीना पीक सीजन होता है, लेकिन अब बुकिंग कैंसिल हो रही हैं। दैनिक 5-10 लाख का नुकसान हो रहा है।” स्थानीय टैक्सी चालक और स्मृति विक्रेता भी प्रभावित हैं। जिला प्रशासन ने एसडीएम स्तर पर बैठक बुलाई है, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञों को शामिल किया गया।


वन विभाग के डीएफओ आरके सिंह ने कहा, “हाथियों को भगाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील है। रात में यात्रा न करें, तेज आवाज न करें।” विभाग ने मिट्टी पर मिर्च पाउडर और पटाखों का उपयोग शुरू किया है। साथ ही, नजदीकी तालाबों में पानी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि हाथी जंगल में ही रहें। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अनिल गुप्ता ने चेतावनी दी, “हाथी झुंड में आक्रामक होते हैं। दर्शनीय स्थलों पर अस्थायी प्रतिबंध जरूरी है।” भविष्य में बाड़ लगाने और जागरूकता शिविर चलाने की योजना है।


ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलकर मुआवजे और सुरक्षा की मांग की। एक महिला ने बताया, “बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया।” वहीं, पर्यटन संघ ने वन विभाग से समन्वय की अपील की। यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर करती है, जो छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में आम है। सरकार ने हाथी गलियारों को चिह्नित करने का वादा किया है।

कुल मिलाकर, मैनपाट की यह घटना प्रकृति और मानव के बीच संतुलन की आवश्यकता दर्शाती है। वन विभाग की सतर्कता से स्थिति नियंत्रित हो सकती है, लेकिन लंबे समाधान के लिए नीतिगत कदम जरूरी हैं। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही पर्यटन स्थल फिर से जीवंत हो जाएंगे।

यह भी पढ़ें-खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स अंबिकापुर 2026: छत्तीसगढ़ में मल्लखंभ का लहराया परचम, बालक-बालिका दोनों वर्गों में चैंपियन बनी टीम

Share This Article
Leave a Comment