Protest against proposed construction at Police Lines ground in Ambikapur: सरगुजा:अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर के बौरीपारा वार्ड स्थित पुलिस लाइन खेल मैदान को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। प्रस्तावित निर्माण कार्य के विरोध में शहर के नागरिकों, अभिभावकों और खेल प्रेमियों ने एकजुट होकर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को ज्ञापन सौंपा है। नागरिकों ने मांग की है कि बच्चों और युवाओं के लिए वर्षों से उपयोग में आ रहे इस मैदान को संरक्षित रखा जाए तथा प्रस्तावित निर्माण कार्य को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
अंबिकापुर शहर के मध्य स्थित यह पुलिस लाइन खेल मैदान लंबे समय से बच्चों, युवाओं और खेल प्रेमियों के लिए खेलकूद व शारीरिक अभ्यास का प्रमुख केंद्र रहा है। स्थानीय लोग इसे शहर का एकमात्र बड़ा सुरक्षित आउटडोर खेलक्षेत्र बताते हैं, जहां फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल और दैनिक व्यायाम सत्र आयोजित होते रहे हैं। कई स्थानीय टूर्नामेंट और युवा प्रतियोगिताएं यहां होती हैं, जो सरगुजा क्षेत्र की खेल संस्कृति का हिस्सा बने हुए हैं।
शहर में शहरीकरण की तेज गति के कारण खुले मैदानों की संख्या घटती जा रही है। नागरिकों का कहना है कि व्यायाम पार्क और अन्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं, जबकि यह मैदान सभी वर्गों के लिए सुलभ है। यदि निर्माण शुरू होता है, तो युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य और खेल विकास पर बुरा असर पड़ेगा।
रविवार को दर्जनों नागरिकों और खेल संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस लाइन पहुंचकर IG को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मैदान की उपयोगिता, शहर में खेल सुविधाओं की कमी और निर्माण के वैकल्पिक स्थानों का सुझाव दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, “खेल मैदान बचाओ, निर्माण कहीं और कराओ।”
प्रमुख संगठनों जैसे स्थानीय खेल संघ, अभिभावक समिति और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। एक अभिभावक ने कहा, “हमारे बच्चे यहां रोज खेलते हैं, इसे छीनना अन्याय है।” IG ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अंबिकापुर जैसे विकासशील शहर में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी किल्लत है। जिला मुख्यालय होने के बावजूद, स्टेडियम और मैदान सीमित हैं। पुलिस लाइन मैदान न केवल खेल प्रेमियों बल्कि स्कूली बच्चों के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरगुजा संभाग में युवा आबादी अधिक होने से खेल विकास आवश्यक है।
हाल के वर्षों में शहरीकरण ने कई मैदानों को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल मैदानों को संरक्षित करने के लिए नीतिगत निर्णय जरूरी हैं।
पुलिस विभाग ने अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन स्रोतों के अनुसार निर्माण पुलिस लाइन में अतिरिक्त सुविधाओं जैसे बैरक या प्रशिक्षण केंद्र के लिए प्रस्तावित है। विभाग का तर्क है कि सरकारी जमीन का सदुपयोग आवश्यक है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि इससे खेल क्षेत्र प्रभावित होगा।
पिछले विवादों में भी इसी मैदान पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब दोबारा उभर आया है। IG स्तर पर ज्ञापन सौंपना दर्शाता है कि मुद्दा गंभीर है।
Protest against proposed construction at Police Lines ground in Ambikapur नागरिकों की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में निम्न मांगें की गई हैं:
- मैदान को पूर्ण रूप से खेल उपयोग के लिए संरक्षित किया जाए।
- निर्माण कार्य को शहर के बाहरी क्षेत्र या उपलब्ध सरकारी भूमि पर किया जाए।
- स्थानीय स्तर पर खेल विकास समिति गठित हो।
- बच्चों के खेल अधिकारों का संरक्षण हो।
नागरिकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन तेज होगा।
प्रशासन अब इस मुद्दे पर विचार कर रहा है। IG ने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। यदि समाधान नहीं निकला, तो कलेक्टर या मुख्यमंत्री स्तर तक बात पहुंच सकती है। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में युवा विकास महत्वपूर्ण है।
नागरिकों का आंदोलन सफल रहा तो यह खेल संरक्षण का उदाहरण बनेगा। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से मैदानों का विकास हो। शहर को नए खेल कॉम्प्लेक्स की जरूरत है।
यह विवाद बौरीपारा और आसपास के वार्डों को प्रभावित करेगा। अभिभावक चिंतित हैं कि बच्चे सड़कों पर खेलने को मजबूर होंगे, जो असुरक्षित है। खेल कोचों ने कहा कि प्रतिभाओं का विकास रुकेगा। सरगुजा में फुटबॉल और क्रिकेट लोकप्रिय हैं, जिनके लिए मैदान जरूरी।
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