Project Izzat Surguja: अंबिकापुर:गांवों में माहवारी यानी पीरियड्स पर बात करना आज भी बहुत लोगों के लिए शर्म की बात मानी जाती है। लेकिन अब सरगुजा संभाग के कई गांवों में यह सोच बदल रही है। यहां की महिलाएं और लड़कियां अब इस विषय पर खुलकर बात कर रही हैं। यह बदलाव ‘प्रोजेक्ट ईज्जत’ नाम की एक सामाजिक पहल की वजह से आया है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत जनवरी 2014 में अंबिकापुर की सरगुजा साइंस ग्रुप एजुकेशन सोसायटी ने की थी।
Project Izzat Surguja कैसे हुई शुरुआत
इस संस्था ने बिना किसी सरकारी मदद के, सिर्फ समाज के अच्छे लोगों की मदद से यह काम शुरू किया। शुरुआत में संस्था के लोगों ने गांव-गांव जाकर महिलाओं और किशोरियों से बात की। उन्हें बताया कि माहवारी के समय साफ-सफाई रखना क्यों जरूरी है। संस्था ने कपड़े से बने सेनेटरी पैड भी बांटे। साथ ही, महिलाओं को सिखाया कि पैड को हर 6-7 घंटे में बदलना चाहिए।
अब हर महीने लगभग 17,500 लड़कियों और महिलाओं को मुफ्त में सेनेटरी पैड दिए जाते हैं। महिलाएं अब माहवारी के समय साफ-सफाई को लेकर जागरूक हो गई हैं। वे अब स्कूल और घर में इस विषय पर खुलकर बात करती हैं। पहले जहां महिलाएं इस विषय पर बात करने से डरती थीं, अब वे एक-दूसरे की मदद भी कर रही हैं।
इस प्रोजेक्ट से गांव की कई महिलाओं को रोजगार भी मिला है। कुछ महिलाओं ने खुद सेनेटरी पैड बनाना और बेचना शुरू कर दिया है। इससे उन्हें पैसे भी मिल रहे हैं और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
सम्मान और पहचान
‘प्रोजेक्ट ईज्जत’ को देशभर में सराहना मिली है। कई संस्थाओं ने इसे पुरस्कार भी दिए हैं। यह अभियान अब सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, जशपुर और एमसीबी जिले तक फैल चुका है।
‘प्रोजेक्ट ईज्जत’ ने गांवों में माहवारी को लेकर लोगों की सोच बदल दी है। अब महिलाएं और लड़कियां साफ-सफाई के बारे में जागरूक हैं। वे इस विषय पर खुलकर बात कर रही हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे स्वस्थ भी रह रही हैं।
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