प्रतापपुर वन विभाग की कार्रवाई, शाल काष्ठ तस्करी का पर्दाफाश : Pratappur Forest Department takes action exposes Sal wood smuggling

Uday Diwakar
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Pratappur Forest Department takes action exposes Sal wood smuggling: सूरजपुर :प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में देर रात वन अमले ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध लकड़ी तस्करी का पर्दाफाश किया। टीम ने बंशीपुर वन क्षेत्र से कटाई की गई बहुमूल्य शाल प्रजाति के 42 नग काष्ठ चिरान ज़ब्त किए। यह कार्रवाई तब संभव हो सकी जब वन परिक्षेत्राधिकारी उत्तम मिश्रा के नेतृत्व में गश्त कर रही टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम झींगादोहर के पण्डोपारा इलाके में एक बोलेरो वाहन में लकड़ी तस्करी की तैयारी हो रही है।

वन परिक्षेत्राधिकारी उत्तम मिश्रा ने बताया कि प्रतापपुर क्षेत्र के बंशीपुर वन क्षेत्र में इन दिनों हाथियों का दल सक्रिय है। करीब 25 से 30 हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से इस इलाके में विचरण कर रहा है, जिसके चलते वन विभाग की टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर निगरानी रख रही थी। उसी दौरान रात करीब एक बजे मुखबिर से सूचना मिली कि झींगादोहर गांव के पास कुछ लोग बोलेरो वाहन में अवैध लकड़ी लोड कर परिवहन करने की फिराक में हैं।

जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो देखा कि बोलेरो वाहन में अवैध रूप से कटे शाल प्रजाति के काष्ठ चिरान लोड करने की गतिविधि चल रही थी। टीम को देखते ही तस्कर वहां से अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। मौके से 42 नग शाल काष्ठ बरामद हुए, जिन्हें ज़ब्त कर वन विभाग कार्यालय लाया गया। अधिकारी उत्तम मिश्रा के अनुसार तस्करों द्वारा शाल जैसे मूल्यवान वृक्ष की कटाई करना वन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है। बरामद लकड़ी की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।

Pratappur Forest Department takes action exposes Sal wood smuggling

वन विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से इस बार बड़ी तस्करी को अंजाम देने से पहले ही विफल कर दिया गया। यदि यह कार्रवाई न होती तो भारी मात्रा में शाल लकड़ी अवैध बाजार में पहुंच जाती। ज्ञात हो कि इस क्षेत्र में वर्षों से लकड़ी तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं। शाल और सागौन जैसी महंगी लकड़ियां खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बिकती हैं, जिसके कारण अवैध गतिविधियों का खतरा बना रहता है।

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वन विभाग ने बरामद लकड़ी को जब्त कर भारतीय वन अधिनियम 1927 और छत्तीसगढ़ राज्य के वन संरक्षण नियमों के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इन धाराओं के अंतर्गत बिना अनुमति वृक्षों की कटाई करना, लकड़ी का परिवहन करना और वाहन का उपयोग करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। दोषियों पर कारावास और अर्थदंड दोनों का प्रावधान है।

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प्रतापपुर वन क्षेत्र सरगुजा संभाग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां शाल वृक्षों की बहुतायत है और यह वन्यजीवों के लिए भी प्राकृतिक आवास है। लेकिन, पिछले दशकों में यहां अवैध कटाई, अतिक्रमण और चराई जैसी गतिविधियों ने वनों पर गहरा असर डाला है। खासकर बंशीपुर क्षेत्र, जहां अब हाथियों का बड़ा दल सक्रिय है, दोहरी चुनौती पेश कर रहा है – वन संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष दोनों।

स्थानीय ग्रामीणों की सूचना से ही यह कार्रवाई सफल हो पाई। ग्राम झींगादोहर और आसपास के लोग अक्सर ऐसे तस्करों की गतिविधियों से परेशान रहते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग को तस्करी की खबर दी और विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई की। वन विभाग की अपील है कि भविष्य में भी लोग ऐसे अपराधों की सूचना तुरंत दें ताकि समय रहते रोकथाम हो सके।

वन विभाग भविष्य में और अधिक सख्त कदम उठाने जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त को दोगुना किया जाएगा, ड्रोन निगरानी पर विचार चल रहा है और सामुदायिक वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने की योजना है। अधिकारियों का मानना है कि सामुदायिक सहयोग के बिना वनों की सुरक्षा संभव नहीं है।

शाल प्रजाति का पेड़ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी अवैध कटाई से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है बल्कि हाथियों जैसे वन्य जीवों का घर भी उजड़ने लगता है। इसके अलावा, सरकार को भी करोड़ों का राजस्व नुकसान होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी से हो रही अवैध गतिविधियां आगामी पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट बन सकती हैं।

वन परिक्षेत्राधिकारी उत्तम मिश्रा ने कहा – “वन विभाग पूरी तरह सतर्क है और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए हमारी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। यह कार्रवाई उसी सतर्कता का नतीजा है। दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।” उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील की कि वे वनों की सुरक्षा और वन्य जीवों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

प्रतापपुर वन विभाग की इस कार्रवाई ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि सजगता और सामुदायिक सहयोग से अवैध लकड़ी तस्करी जैसी गंभीर गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। हालांकि तस्कर फरार हो गए, लेकिन बरामद लकड़ी और सख्त कानूनी प्रावधानों के चलते अब उनके खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह कदम वनों की रक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता है और आने वाले समय में तस्करों के खिलाफ और भी सख्त संदेश देगा।

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