छठ पर्व से पहले भी नहीं संभली सड़क, अंबिकापुर-रामानुजगंज हाईवे पर गड्ढों से परेशान जनता : potholes on the Ambikapur-Ramanujganj highway

Uday Diwakar
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potholes on the Ambikapur-Ramanujganj highway: सरगुजा:​​​अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति महीनों से बेहद जर्जर बनी हुई है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों ने न केवल वाहन चालकों, बल्कि आम राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए भी यात्रा को कष्टदायक बना दिया है। जब छठ पर्व जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन होते हैं, तो लोगों की परेशानी चरम पर पहुंच जाती है। बावजूद इसके, सड़क की मरम्मत को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कोई गंभीर कदम नहीं उठाया। अब तक मांगें सिर्फ कागज़ों और ज्ञापनों तक ही सीमित रही हैं।
पिछले कुछ महीनों में सड़क की हालत इतना खराब हो चुकी है कि कई जगह यात्रियों को दो-ढाई फीट गहरे गड्ढों से जूझना पड़ता है। अंबिकापुर शहर की सीमा से लगे काली मंदिर के सामने स्थिति और भी बिगड़ गई थी। गड्ढों के कारण दो और चार चक्का वाहनों के लिए रास्ता पार करना किसी परीक्षा से कम नहीं है। बरसात के दिनों में यही गड्ढे तालाब में तब्दील हो जाते हैं। इनमें पानी भर जाता है, जिससे पैदल चलना और भी मुश्किल हो जाता है।​​

समस्या सिर्फ गड्ढों तक नहीं सीमित है, ‌बल्कि सड़क की जर्जर हालत के चलते नियमित दुर्घटनाएं भी आम हो गई हैं। ‌रोजाना दो चक्का और चार चक्का वाहन इन गड्ढों में फंसकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। कई बार एंबुलेंस और आपातकालीन वाहन भी घंटों तक फंसे रहते हैं। इधर, रास्ते में जाम लगने से छठ पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को पूजा स्थलों और घाटों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। शुरुआती दिनों में ही सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने सड़क की मरम्मत की मांग उठाई थी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों से छठ पर्व को ध्यान में रखकर समतलीकरण की मांग की थी। मगर न अधिकारियों ने संज्ञान लिया, ना ही विधायक-मंत्री सड़क की मरम्मत के लिए आगे आए।
बलरामपुर से अंबिकापुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-343 करीब 110 किलोमीटर लंबा है, जिसका बड़ा हिस्सा जगह-जगह उखड़ चुका है। गड्ढों के कारण वाहन चालक अब रास्ता बदलने लगे हैं। जो दूरी पहले ढाई घंटे में तय होती थी, वह अब 5 घंटे या उससे भी अधिक समय ले रही है। कई वाहन मालिक अंबिकापुर-रामानुजगंज हाईवे छोड़कर वैकल्पिक ग्रामीण मार्गों का प्रयोग करने लगे हैं। प्रतापपुर, सेमरसोत, बलरामपुर जैसे स्थानों होकर अब बसों और भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे यह ग्रामीण मार्ग भी टूटने लगे हैं।
नियमानुसार भारी वाहनों को एनएच-343 पर ही चलना चाहिए, मगर अब गांव के रास्तों का बेतरतीब इस्तेमाल हो रहा है। इससे इन ग्रामीण रास्तों की हालत भी बिगड़ रही है। प्रशासन इस बेतरतीब ट्रैफिक पर भी चुप्पी साधे हुए है।
गड्ढों और अव्यवस्था के कारण शहर के व्यापारी और दुकानदार भी परेशान हैं। त्योहारों के समय माल वाहक वाहन देरी से पहुंचते हैं, जिससे व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ता है। आम लोगों को वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है, जिससे जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

राष्ट्रीय राजमार्ग-343 (अंबिकापुर-रामानुजगंज) के तातापानी मुख्य बाजार में तो हालात और भी खराब हैं। बरसात के बाद यहां सड़क तालाब में तब्दील हो गई थी। अगल-बगल के दुकानदार, स्कूली बच्चे और स्थानीय नागरिक बेहद परेशान हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि सड़क स्थिति तुरंत सुधारी जानी चाहिए, ‌वरना व्यापार और आमजन का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
सड़क की गुणवत्ता और मरम्मत कार्य को लेकर अधिकारियों पर भी सवाल उठते रहे हैं। गड्ढे भरवाने के महज कुछ दिनों के बाद फिर से सड़क खराब हो जाती है। कई लोगों का मानना है कि मरम्मत कार्य केवल खानापूर्ति के लिए किया जाता है, ‌वास्तविक सुधार के बजाय तस्वीरें और स्वीकृति के लिए प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।
जनता का कहना है कि सरकार की तरफ से बड़े-बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की जाती है, लेकिन उन पर काम रफ्तार पकड़ ही नहीं पाता। अंबिकापुर-रामानुजगंज सड़क चौड़ीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग ने 200 करोड़, 232 करोड़ जैसी प्रस्‍तावित लागत के प्रोजेक्ट शासन के पास भेजे हैं, मगर अब तक स्वीकृति नहीं मिली। अधिकारी सार्वजनिक रूप से इसी तर्क का इस्तेमाल करते हैं कि जल्द स्वीकृति मिलते ही सड़क की मरम्मत या चौड़ीकरण का काम शुरू हो जाएगा।
वास्तविकता यह है कि बारिश के पहले काम शुरू करने का दावा किया जाता है, मगर बरसात शरू होने तक प्रक्रिया पहले जैसी ही अधर में लटकी रह जाती है। सिलसिला यूं चला कि सड़क का काम तो छोड़िए, प्रस्ताव की स्वीकृति ही हर साल अटकी रह जाती है।
इस बीच छठ पर्व जैसे बड़े आयोजन नजदीक आते हैं, तो आम जनता, श्रद्धालु और सामाजिक संगठन फिर मांग उठाते हैं कि सड़क को समतल किया जाए। इस बार भी छठ पर्व आने से पहले मांगें तेज हुईं। ज्ञापन सौंपे गए, अधिकारियों को प्रत्यक्ष अवलोकन के लिए बुलाया गया। साथ ही राज्य सरकार, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग से आग्रह किया गया कि जिम्मेदारी समझकर सड़क की तत्काल मरम्मत करवाई जाए।
मगर अफसोसजनक है कि मांगें, ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन, विभाग और जनप्रतिनिधि टालमटोल रवैया अपनाते रहे।

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potholes on the Ambikapur-Ramanujganj highway

स्थानीय निवासी और आम यात्री आक्रोशित हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स, फेसबुक पर सड़क की बदहाल तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। पोस्ट्स में केंद्रीय मंत्री और विभागीय अधिकारियों को टैग कर सड़क सुधार और गड्ढे भरवाने की मांग की जा रही है। एक पोस्ट में तो लिखा गया कि “अंबिकापुर-रामानुजगंज रोड पूरा नाला बन चुका है। कम से कम गड्ढे तो भरवा दीजिए।” कई जगह स्थानीय संगठनों, व्यापारियों और नागरिकों ने मिलकर सड़क सुधार को लेकर प्रदर्शन भी किया।
इन सबके बावजूद प्रशासन की ओर से गंभीर कार्रवाई नहीं दिखी। नौबत यह है कि ग्रामीण सड़कों पर भी अव्यवस्था और टूटी सड़क की वजह से वाहन फंसने लगे हैं। कई बार भारी ट्रक गड्ढे में धंस जाते हैं, जिससे कई घंटो तक यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है।​

सड़क मरम्मत को लेकर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही शासन से स्वीकृति मिलेगी, काम शुरू कर दिया जाएगा। बहरहाल, मौजूदा हालात में यह केवल आश्वासन ही नजर आता है। जनता सड़कों के चौड़ीकरण और समतलीकरण के लिए और लंबा इंतजार करने को मजबूर है।
बरसात के बाद धूल और कंकरीट के कारण वायु गुणवत्ता भी बिगड़ गई है। शहर के बनारस रोड, खरसिया रोड, महेंद्रगढ़ रोड, रामानुजगंज रोड और बिलासपुर रोड सभी की हालत बेहद खराब है। सड़कों पर गड्ढों की वजह से पैदल चलने वाले, साइकिल सवार, दो पहिया और चार पहिया वाहन चालक सभी प्रभावित हैं।

अंततः, छठ पर्व जैसे धार्मिक आयोजन के समय सड़क की व्यवस्थागत उपेक्षा प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है। यह स्थिति आम जनता के लिए चिंता, परेशानी और आक्रोश का कारण बनी है। जब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधि गंभीरता से सड़क की मरम्मत, समतलीकरण और चौड़ीकरण पर ध्यान नहीं देते, तब तक अंबिकापुर-रामानुजगंज एनएच-343 की यह विकराल दशा क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के लिए चुनौती बनी रहेगी।
जनता का भरोसा तभी लौटेगा, जब जमीनी स्तर पर सही मायनों में कार्य शुरू होगा और सड़कें सुरक्षित यात्रा के योग्य बन जाएंगी।

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