Pipeline Blast in Bhilai: दुर्ग -भिलाई: भिलाई स्टील प्लांट में पाइपलाइन फटने से जहरीली गैस रिसाव की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, जो सुरक्षा मानकों की लापरवाही को उजागर करती हैं। इन हादसों ने न केवल जानें ली हैं, बल्कि उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है।
भिलाई स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित भारत का प्रमुख इस्पात संयंत्र है, जहां 2014, 2018 और हाल के वर्षों में कई ब्लास्ट हुए। 2014 में वाटर पंप हाउस में गैस रिसाव से 6 लोगों की मौत हुई और 34 घायल पड़े। 2018 में कोक ओवन के पास गैस पाइपलाइन ब्लास्ट से 9 मौतें और 11 घायल दर्ज किए गए।
हाल ही में 2025 में ब्लास्ट फर्नेस-5 और PBS-2 में आग लगी, जबकि अगस्त 2025 में डस्ट कैचर फटने से भयंकर आग भड़की। नवंबर 2024 में ब्लास्ट फर्नेस में गैस लीक से 3 मजदूर घायल हुए। इनमें से कई घटनाओं में जहरीली गैस का रिसाव प्रमुख कारण रहा।
ज्यादातर ब्लास्ट रखरखाव के दौरान पाइपलाइन फटने या वाल्व खुलने से हुए। 2018 में मरम्मत के समय धमाका हुआ, जबकि 2025 के डस्ट कैचर हादसे में वाल्व फेलियर से आग लगी। कैग रिपोर्ट ने सेल (SAIL) पर सुरक्षा उपायों में लापरवाही का आरोप लगाया, जिसमें 2014-2019 तक सिफारिशें लागू न करने का खुलासा हुआ।
पंप हाउस में पाइपलाइन टूटने से ब्लास्ट फर्नेस गैस फैली, जिससे मौतें हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानक परिचालन प्रक्रियाओं की कमी और निरीक्षण में ढिलाई मुख्य वजहें हैं।
Pipeline Blast in Bhilai
इन घटनाओं ने भिलाई प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कैग ने पाया कि सुरक्षा संगठन ने कोई समयसीमा या योजना नहीं बनाई। 2025 के हादसे में उत्पादन प्रभावित हुआ और करोड़ों का नुकसान अनुमानित है। श्रमिक संगठन और स्थानीय लोग लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
प्रबंधन ने हर बार जांच के आदेश दिए, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई कम हुई। केंद्रीय स्टील मंत्री ने 2014 में जांच का वादा किया था। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि नियमित ऑडिट, आधुनिक सेंसर और प्रशिक्षण जरूरी हैं।
इन हादसों से सैकड़ों कर्मचारी प्रभावित हुए, उत्पादन रुका और इलाके में दहशत फैली। फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों ने घंटों मशक्कत की। सरकार ने कई बार जांच समितियां गठित कीं, लेकिन सुधार धीमे हैं।
भिलाई प्लांट से प्रतिदिन हजारों टन स्टील बनता है, इसलिए हादसे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाते हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाने की मांग तेज हो गई है।
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