राजपुर में धान टोकन अव्यवस्था: किसानों ने तीसरी बार किया चक्का जाम, NH पर हंगामा : Paddy token distribution chaos in Rajpur

Uday Diwakar
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Paddy token distribution chaos in Rajpur: बलरामपुर:​​बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र में धान खरीदी केंद्र पर टोकन व्यवस्था की अव्यवस्था थमने का नाम नहीं ले रही। शासन-प्रशासन से बार-बार मिले आश्वासनों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे आक्रोशित किसानों ने मंगलवार को तीसरी बार अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया। सुबह 10:30 बजे शुरू हुए इस आंदोलन से यातायात बाधित हो गया और राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।​

क्षेत्र के सैकड़ों किसान धान खरीदी केंद्र के समीप NH-343 पर इकट्ठा हो गए। उनका मुख्य आरोप है कि केंद्र की खरीदी लिमिट फुल होने से नए टोकन जारी ही नहीं हो रहे, जबकि 2000 से अधिक पंजीकृत किसानों में से केवल 40 प्रतिशत ही अपना धान बेच पाए हैं। बिचौलियों को प्राथमिकता मिलने और वास्तविक किसानों के टोकन न कटने से कर्जदार किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं। पहले भी दो बार इसी मुद्दे पर चक्का जाम हो चुका है, लेकिन एसडीएम देवेंद्र प्रधान के आश्वासनों के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठा।

किसान नेता रामेश्वर सिंह ने कहा, “31 जनवरी तक की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है, लेकिन हमारे धान खेतों और घरों में पड़े सड़ने लगे हैं। प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, टोकन लिमिट बढ़ाने के लिए कलेक्टर को पत्र भेजा गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।” आंदोलन के दौरान किसानों ने नारेबाजी की और एसडीएम कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी।

चक्का जाम का असर

सुबह 10:30 बजे शुरू हुए चक्का जाम से अंबिकापुर-रामानुजगंज मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ट्रक, बसें और निजी वाहन घंटों फंसे रहे, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चे और बाजार जाने वाले लोग परेशान हुए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली, लेकिन किसान अपने दावे पर अड़े रहे। लगभग दो घंटे बाद प्रशासन के समझाने पर जाम खोला गया। स्थानीय व्यापारी रामू यादव ने बताया कि इस मार्ग पर रोज हजारों वाहन गुजरते हैं, ऐसे में जाम से व्यापार प्रभावित हो रहा है।

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पिछले आंदोलनों में भी यही स्थिति रही। दिसंबर 2025 में पहली बार चक्का जाम हुआ था, जब टोकन एप में खराबी के कारण समस्या बढ़ी। जनवरी में कुसमी और देवरी क्षेत्रों के किसानों ने भी एसडीएम कार्यालय घेरा था।​

किसानों का कहना है कि प्रतिदिन 2000 क्विंटल की लिमिट को 800 क्विंटल बढ़ाया गया, फिर भी स्लॉट फुल हैं। ऑनलाइन टोकन सिस्टम ‘तुंहर टोकन एप’ में भौतिक सत्यापन की नई प्रक्रिया से किसान परेशान हैं। बिचौलियों द्वारा एक ही खाता कई बार इस्तेमाल करने के आरोप लग रहे हैं। कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने हाल ही में केंद्रों का निरीक्षण किया, लेकिन राजपुर में सुधार नहीं दिखा।​​

एसडीएम देवेंद्र प्रधान ने कहा, “लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा गया है। राज्य स्तर से जल्द स्वीकृति मिलेगी। किसानों से धैर्य रखने की अपील है।” हालांकि, किसानों ने तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि टोकन जारी नहीं हुए तो बड़े स्तर पर धरना और चक्का जाम होगा।​

बलरामपुर जिला छत्तीसगढ़ का धान उत्पादक क्षेत्र है, जहां Surguja डिवीजन के राजपुर, कुसमी, सामरी जैसे इलाकों में हजारों किसान समर्थन मूल्य पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचने का इंतजार कर रहे। धान खरीदी वर्ष 2025-26 में पूरे प्रदेश में टोकन विवाद चल रहा है। धमतारी से बलरामपुर तक किसान संगठन सक्रिय हैं। देरी से किसानों को ब्याज देना पड़ रहा और फसल खराब हो रही।​

स्थानीय विधायक ने भी मामले को सदन में उठाने का वादा किया। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन टोकन की मांग तेज है। कलेक्टर ने दावा किया कि जिले में धान खरीदी सुचारू है, लेकिन मैदानी हकीकत अलग है।

Paddy token distribution chaos in Rajpur

किसान संगठनों ने 13 जनवरी से धरना की चेतावनी दी थी, लेकिन आज का आंदोलन तीसरा चरण है। यदि शासन ने लिमिट बढ़ाई और टोकन समय सीमा 15 फरवरी तक बढ़ाई, तो समस्या हल हो सकती। अन्यथा, पूरे जिले में हंगामा फैल सकता है। प्रशासन को तत्काल बिचौलियों पर कार्रवाई और पारदर्शी सिस्टम लागू करना होगा।

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