NHM employees suspended their protest after holding discussions with the Health Secretary: रायपुर : छत्तीसगढ़ के नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कर्मचारी संघ और मितानिनों का आंदोलन स्वास्थ्य सचिव अमित कटरिया से हुई बातचीत के बाद स्थगित कर दिया गया है। मितानिन संघ और NHM कर्मचारियों की यह मांगें लंबे अरसे से चर्चा में थीं, जिनमें मुख्य रूप से मानदेय में वृद्धि, नियमितीकरण, और बेहतर कार्य परिस्थितियों की प्रस्तर थी। 7 अगस्त से छत्तीसगढ़ में मितानिन और NHM कर्मचारी लगातार अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे थे और उनके आंदोलन ने प्रदेश के स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क पर गहरा असर डाला था।
NHM employees suspended their protest after holding discussions with the Health Secretary
मितानिन संघ की प्रमुख मांगें तीन मुख्य आधारों पर थीं: पहली, उनकी मानदेय राशि में कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए; दूसरी, उन्हें नेशनल हेल्थ मिशन में स्थायी रूप से नियोजित किया जाए; और तीसरी, उनके कार्यक्षेत्र और कार्य परिस्थितियों में सुधार हो। इन मांगों को लेकर मितानिनों ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन किए, जिनमें रायपुर समेत कई जिलों में सड़क जाम और राजमार्ग अवरुद्ध करने जैसे बड़े कदम उठाए गए।
यह आंदोलन मितानिनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि वे सूक्ष्म स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में जनभागीदारी को बढ़ावा देने का काम करती हैं। मितानिन महिलाएं गरीब और दूरदराज के इलाकों में जाकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, जिसमें टीकाकरण, गर्भनिरोधन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण संबंधी जागरूकता, और बीमारियों की प्राथमिक पहचान शामिल होती है।
सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में मितानिन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन वे लंबे समय से मानदेय और कार्यस्थल की समस्याओं से जूझ रही हैं। मितानिन संघ का मानना था कि उनके कार्य की गति और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारने के लिए उनके वेतन और सुविधा में वृद्धि अनिवार्य है।
हालांकि, मितानिनों के आंदोलन को रोकने के लिए कई जिलों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी रायपुर पहुंचने से पहले ही रोक दिया था। कांकेर, जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, दुर्ग जैसे जिलों में पुलिस ने उनके रास्ते को रोका और कई स्थानों पर चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन हुए। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हुई, जिससे स्थानीय जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इन घटनाओं के बीच राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने बातचीत के लिए पहल की और स्वास्थ्य सचिव अमित कटरिया के नेतृत्व में मितानिन प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। वार्ता में मितानिनों की मांगों को विस्तार से सुना गया, और उनकी समस्याओं को समझा गया। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि मितानिनों की राशि में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। इसके अलावा, प्रशिक्षणार्थियों के लिए रोजाना 16 रुपये, हेल्प डेस्क के काम करने वालों के लिए रोज 23 रुपये, और ब्लॉक समन्वयक के लिए मासिक 1875 रुपये स्वीकृत करने की बात भी चर्चा में आई।
स्वास्थ्य सचिव ने यह भी बताया कि पहले कार्य कर रही संस्था का कार्य समाप्त हो चुका है, इसलिए मितानिनों की सुविधा के लिए भारत सरकार के निर्देशानुसार SHSRC (State Health Systems Resource Centre) का गठन किया गया है। इसके तहत मितानिनों की बेहतर देखरेख और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित कटरिया, मिशन संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, मितानिन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अजय शंकर कन्नौजे तथा NHM कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक मैत्रीपूर्ण माहौल में हुई और सभी पक्षों ने बेहतर संवाद स्थापित करने का संकल्प लिया।
इस सकारात्मक कदम के बाद NHM कर्मचारी संघ ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा, बल्कि मितानिनों और कर्मचारियों के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी एक मजबूत पहल होगी। संघ ने सरकार से अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द प्रस्तावित वेतन वृद्धि और नियमितीकरण पर अंतिम निर्णय लें ताकि उनके अधिकार सुरक्षित हों और वे और बेहतर तरीके से जनता की सेवा कर सकें।
इस आंदोलन और वार्ता की प्रक्रिया ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में एक नई चेतना जागृत की है। यह स्पष्ट करता है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं को समझना और उनका समाधान निकालना कितनी जरूरी है। मितानिनों का आंदोलन यह संदेश भी देता है कि सामाजिक स्वास्थ्य सुधार के लिएGrassroot स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की आवाज़ और सम्मान अपरिहार्य हैं।
मितानिन संघ ने अपने आंदोलन के दौरान स्थानीय लोगों को भी जागरूक किया कि स्वास्थ्य सेवा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव-गली तक पहुंचे। मितानिनों के बिना प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का अच्छा संचालन संभव नहीं है। इसलिए उनकी मांगों को उचित रूप से सुनना और पूरा करना सभी के हित में है।
आखिरकार यह आंदोलन खत्म हुआ इसलिए नहीं कि उनकी मांगें खत्म हो गईं, बल्कि इसलिए कि सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद का नया रास्ता खुल गया है। यह प्रक्रिया भविष्य में और भी बेहतर नीतियों और सुविधाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
मितानिनों और NHM कर्मचारियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उनसे जुड़े स्वास्थ्य एवं सरकारी विभागों को चाहिए कि वे इस संवाद को बनाए रखें और कार्यकर्ता वर्ग की समस्याओं का समाधान तत्काल करें। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी बढ़ावा मिलेगा।
संक्षेप में, छत्तीसगढ़ में NHM कर्मचारियों और मितानिनों का आंदोलन 2025 का एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्रीय संघर्ष रहा। यह संघर्ष लंबे समय से चली आ रही मांगों को सामने लाने का माध्यम था। वार्ता और समझौते के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस तरह संवाद और समझौता आंदोलन को सफलतापूर्वक समाप्त कर सकता है।
यह उदाहरण अन्य प्रदेशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हो सकता है कि कर्मचारी संघों और सरकार के बीच खुले और सकारात्मक संवाद से किस तरह सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों पर काबू पाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ का यह मॉडल स्वास्थ्य कर्मचारियों के कल्याण और जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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