अंबिकापुर में विद्युत विभाग की लापरवाही उजागर, डॉक्टर को लगाने पड़े चक्कर, गलती से 35,000 रुपये का बकाया नोटिस : Negligence of Electricity Department Exposed

Uday Diwakar
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Negligence of Electricity Department Exposed : अंबिकापुर : सरगुजा जिले के अंबिकापुर में एक ऐसे मामला सामने आ रही है जिसमें नेशनल लोक अदालत से जुड़ा हुआ मामला है और यहां पर विद्युत विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही देखी जा रही है और यहां पर एक चौका देने वाला मामला सामने आ रहा है जहां पर बिजली बिल से जुड़ा हुआ मामला है और इस बिजली बिल से पीड़ित एक डॉक्टर हैं जिन्होंने 3 साल पहले ही बिजली बिल का भुगतान कर दिया है उसके बावजूद उनको बिजली बिल फिर से आया है जो पहले भुगतान कर दिया गया था वही वाला।

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Negligence of Electricity Department Exposed

मामला अंबिकापुर शहर के निवासी और चिकित्सक डॉ. श्रीकांत सिंह चौहान से जुड़ा है। डॉ. चौहान ने वर्ष 2019 में अपने घर के निर्माण के दौरान विद्युत विभाग से एक अस्थायी (टेम्परेरी) बिजली कनेक्शन लिया था। 2021 में घर बनकर तैयार होने के बाद उन्होंने स्थायी कनेक्शन के लिए आवेदन किया। नियमों के अनुसार,स्थायी कनेक्शन मिलने से पहले अस्थायी कनेक्शन के पूरे बिल का भुगतान करना जरूरी था।

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डॉ. चौहान ने बिल का भुगतान किया,लेकिन इसके लिए उन्हें 5 हजार रुपये की जगह 8 हजार रुपये देने पड़े। रसीद मांगने पर विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि 5 हजार रुपये की रसीद उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आएगी, जबकि बाकी 3 हजार रुपये ‘मिस्ति्रयों के खर्चे’ के लिए हैं। पीडि़त का कहना है कि विद्युत विभाग के कर्मचारी ऐसे पैसे मांगते हैं।

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गलती से 35,000 रुपये का बकाया नोटिस

हैरानी की बात तब हुई, जब विद्युत विभाग ने उसी अस्थायी कनेक्शन के लिए 35,000 रुपये से अधिक का बकाया बिल दिखाते हुए मामला नेशनल लोक अदालत में डाल दिया। डॉ. चौहान को जब लोक अदालत से नोटिस मिला,तो वे हैरान रह गए। उनका कहना है कि अस्थायी कनेक्शन का पूरा भुगतान करने के बाद ही उन्हें स्थायी कनेक्शन मिला था,फिर यह बकाया कहां से आ गया ।

लोक अदालत में विद्युत विभाग को लगी फटकार

नेशनल लोक अदालत में जब डॉ. चौहान अपने भुगतान के पूरे सबूत लेकर जज के सामने पेश हुए, तो विद्युत विभाग के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। अपनी गलती स्वीकार करते हुए विभाग ने मामले को तुरंत सेटलमेंट कर लिया। हालांकि,इस पूरी प्रक्रिया से डॉ. चौहान को काफी परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर लोक अदालत में उपस्थित होना पड़ा,जिसके लिए वे विद्युत विभाग को जिम्मेदार ठहराते हैं।

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