गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला अस्पताल में प्रसूता का नग्न वीडियो वायरल, स्वास्थ्य विभाग के मानवता कलंकित : Naked Video of Pregnant Woman goes Viral in Gaurela-Pendra-Marwahi District Hospital

Uday Diwakar
6 Min Read
  • प्रसूता महिला का ऑपरेशन के दौरान बनाया गया नग्न वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, जिससे मरीज की निजता और सम्मान का बड़ा उल्लंघन हुआ।
  • वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की, अस्पताल प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

Naked Video of Pregnant Woman goes Viral in Gaurela-Pendra-Marwahi District Hospital : गौरेला पेंड्रा मरवाही : गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले के जिला अस्पताल में एक मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक प्रसूता महिला का ऑपरेशन के दौरान बनाया गया नग्न वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस शर्मनाक घटना ने न केवल मरीज की निजता का उल्लंघन किया है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की छवि को भी धूमिल कर दिया है।

यह मामला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के जिला अस्पताल का है, जहां कोरबा जिले की एक आदिवासी महिला प्रसव के लिए अस्पताल आई थी। ऑपरेशन थिएटर में प्रसव के दौरान उसका नग्न वीडियो बिना अनुमति बनाए गया और वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होते ही अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। वीडियो में साफ तौर पर उस दिन का समय और तारीख भी दिखाई दे रही थी, जिससे यह वीडियो असली माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर इसकी निंदा होने लगी। वीडियो खासकर व्हाट्सएप ग्रुप्स में तेजी से फैल गया। वीडियो के वायरल होने से प्रसूता महिला और उसके परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है। वीडियो में महिला की निजता का उल्लंघन होने के साथ-साथ उसके मानवीय अधिकारों का भी बेशर्माते तौर पर उल्लंघन किया गया है।

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Naked Video of Pregnant Woman goes Viral in Gaurela-Pendra-Marwahi District Hospital

पीड़ित महिला के पति ने गौरेला थाने में वीडियो वायरल होने की शिकायत दर्ज कराई। दक्षिणपंथी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल ने कहा कि मामला गंभीर है, और जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने वीडियो बनाने और वायरल करने वाले के खिलाफ बीएनएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस वीडियो बनाने वाले अस्पताल के किसी कर्मचारी या स्टाफ सदस्य की भूमिका पर भी जांच कर रही है क्योंकि ऑपरेशन थिएटर में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

स्वास्थ्य विभाग के सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक (सिविल सर्जन) डॉ. देवेंद्र सिंह पैकरा ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि यह जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर का ही है। उन्होंने कहा कि वीडियो बनाना और उसे बिना अनुमति सोशल मीडिया पर डालना गंभीर अपराध है। अस्पताल प्रशासन ने जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा की है।

मरीज की सुरक्षा और निजता पर सवाल

यह घटना मरीजों की सुरक्षा, गोपनीयता और अस्पताल की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करती है। ऑपरेशन थिएटर एक सुरक्षित जगह होती है, जहां केवल आवश्यक स्टाफ ही प्रवेश कर सकता है। फिर भी इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों में यह चिंता भी बनी हुई है कि क्या स्वास्थ्य संस्थान मरीजों की निजता पर कोई ध्यान देते हैं।

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इस तरह की घटनाएं न सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर परिवारों को प्रभावित करती हैं, बल्कि पूरे सामाजिक ताने-बाने को भी हिला देती हैं। महिला, जो अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था से गुजर रही थी, उसकी निजता का इतना भारी उल्लंघन हुआ है कि उसे मानसिक आघात भी पहुंच सकता है। इस घटना ने मानवाधिकारों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है और यह भी दिखाया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनशीलता और नैतिकता का कितना अभाव है।

ऑपरेशन थिएटर में बिना अनुमति वीडियो बनाना गैरकानूनी है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मरीज के सम्मान का भी सीधे तौर पर अपमान है। उन्होंने कहा कि वीडियो वायरल करने या बनाने वाले को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार अभियानकर्ताओं ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। वे मांग कर रहे हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दी जाए। साथ ही अस्पतालों में ऐसे अवसरों पर सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की निजता की बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की जाए।

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला अस्पताल में प्रसूता महिला का नग्न वीडियो वायरल होना एक गम्भीर घटना है जिसने न केवल परिवार को आहत किया है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस मामले में उचित न्याय और सुधारात्मक कदम उठाना बहुत आवश्यक हो गया है। मरीजों की निजता और मानवाधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, खासकर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में।

इसलिए संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे इस मामले में तेजी से कार्रवाई करें और अस्पतालों में कड़े नियम बनाएं ताकि भविष्य में इस तरह की शर्मनाक घटनाएं न हों और मरीज बिना किसी भय या चिंता के बेहतर उपचार पा सकें।

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