Muria Darbar in Bastar Amit Shah calls for ending Maoism : रायपुर :बस्तर में आयोजित मुरिया दरबार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक ऐतिहासिक संदेश देते हुए बस्तर को माओवाद से पूर्ण रूप से मुक्त करने का संकल्प दोहराया और स्थानीय समाज से सहयोग की अपील की। इस कार्यक्रम में उन्होंने विकास, सांस्कृतिक धरोहर और शांति की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार की परंपराबस्तर दशहरा भारत का सबसे लंबा पर्व है, जिसकी परंपरा 14वीं शताब्दी से चली आ रही है।
मुरिया दरबार की शुरुआत 1876 में हुई थी। ये दरबार न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में समस्याओं के समाधान और संवाद का ऐतिहासिक मंच भी है। इसी दरबार में राजा द्वारा प्रजा की शिकायतें सुनी जाती थीं और अब यही परंपरा लोकतांत्रिक रूप में राज्य शासन द्वारा जारी है।अमित शाह का माओवाद पर दो-टूक संदेशकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि माओवाद से जुड़े लोगों के लिए अब सिर्फ एक ही रास्ता है—आत्मसमर्पण।
उन्होंने उल्लेख किया कि हथियारों के बल पर शांति को भंग करने वालों को सुरक्षा बल मुंहतोड़ जवाब देंगे। शाह ने साफ किया कि सरकार माओवादियों से किसी भी तरह की बातचीत के पक्ष में नहीं है और 31 मार्च 2026 तक माओवादी गतिविधियों का अंत करने का लक्ष्य रखा गया है।शाह ने आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि मांझी-चालकी से सीधा संवाद किया।
Muria Darbar in Bastar Amit Shah calls for ending Maoism
उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने गांव के युवाओं को मुख्यधारा में लौटने व शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें।विकास के संकल्प और शांति का आह्वानअपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार, दोनों ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जहां-जहां नक्सलवाद का प्रभाव कम हुआ है, वहां सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं तेज़ी से पहुँची हैं। शाह ने यह भी कहा कि बस्तर के बच्चों को जंगलों में भटकने के बजाय पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर जैसी मुख्यधारा की नौकरियों में आना चाहिए।उन्होंने बस्तर क्षेत्र के कार्यक्रमों में तेज़ी से विकास की भी बात की और आश्वासन दिया कि कोई भी नक्सली ताकत अब बस्तर के विकास या अधिकारों को नहीं रोक पाएगी।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख ऐलानमंच पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुरिया दरबार की परंपरागत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए अनेक घोषणाएं कीं।
उन्होंने बस्तर दशहरा पर्व के लिए बजट को 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने की घोषणा की। साथ ही जिया डेरा और माडिया सराय जैसी सांस्कृतिक स्थलों के विकास का भी आश्वासन दिया।सांस्कृतिक गौरव और सुरक्षा का संकल्पकार्यक्रम की शुरुआत मां दंतेश्वरी के चित्र पर दीप प्रज्जवलन से हुई। अमित शाह ने मां से सुरक्षा बलों को माओवाद के विरुद्ध शक्ति देने की प्रार्थना भी की। उन्होंने बस्तर दशहरा के 75 दिन चलने वाले महोत्सव को विश्व का सबसे बड़ा और विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजन बताया।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएंअमित शाह के दौरे के मद्देनज़र पूरे बस्तर में सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे। सिरहासार भवन और दरबार क्षेत्र को पारंपरिक नारियल के पत्तों से सजाया गया था। बस्तर राजमहल के समीप विशेष मंच और सुरक्षा व्यवस्था सुसज्जित की गई थी।स्थानीय जनता और आदिवासी समाज की भूमिकाअमित शाह ने यह भी कहा कि बस्तर के लोगों की भूमिका माओवाद खत्म करने और नव-बस्तर के निर्माण में सबसे अहम है।
सभी स्तर के लोग, विशेषकर मांझी-चालकी, नक्सली विचारधारा में उलझे युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ें।आत्मसमर्पण नीति और सरकार की रणनीतिशाह ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य दोनों की सरकारें आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए जितनी उदार नीति ला सकती थीं, लाई है, जिससे मुख्यधारा में लौटने वालों को हर सम्भव सुविधा और सहायता दी जाएगी।
बस्तर में शांति और विकास की नई राहकार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, सांसद महेश कश्यप, अन्य मंत्री, स्थानीय विधायक, बस्तर राजपरिवार के सदस्य समेत हजारों लोगों की उपस्थिति रही। सभी ने क्षेत्र में तेजी से विकास और सांस्कृतिक अभ्युदय लाने का संकल्प लिया, ताकि बस्तर दशहरा का ऐतिहासिक गौरव फिर से संपूर्ण समाज में फैल सके।
Muriya darbar के ऐतिहासिक मंच से अमित शाह के माओवाद के विरुद्ध दृढ़ संदेश और विकास का आह्वान बस्तर की दिशा को बदलने का संकल्प है। बस्तर दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता, अपनापन, समस्या समाधान और विकास के नवयुग की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है।
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