MLT Cell’s divisional meeting in Surguja: सरगुजा:अंबिकापुर।छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले सरगुजा मुख्यालय में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट (MLT) प्रकोष्ठ की संभागीय बैठक आयोजित की गई। प्रांताध्यक्ष अनिल कुमार पांडे की गरिमामयी उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों की लंबित मांगों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और कोरबा जिलों के सैकड़ों MLT सदस्यों ने भाग लिया, जो स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ माने जाने वाले लैब टेक्नोलॉजिस्टों की एकजुटता का प्रतीक बनी।
बैठक की शुरुआत MLT प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों द्वारा प्रांताध्यक्ष अनिल कुमार पांडे, संभागीय संयोजक रामेश्वर सिंह, जिला अध्यक्षों एवं अन्य अतिथियों का पारंपरिक स्वागत सत्कार के साथ हुई। स्वागत भाषण में प्रकोष्ठ संयोजक ने कहा कि लैब टेक्नोलॉजिस्ट बिना रुके रक्त जांच, पैथोलॉजी रिपोर्ट और डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करते हैं, लेकिन उनकी मांगें वर्षों से अनसुलझी हैं। प्रांताध्यक्ष अनिल कुमार पांडे ने अपने मुख्य संबोधन में संगठन को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा, “हमारी लड़ाई केवल मांगों तक सीमित नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की है। सरकार को MLT कर्मचारियों की योग्यता को मान्यता देनी होगी।”
बैठक का मुख्य केंद्र CRMC (चिकित्सा अनुसंधान एवं प्रबंधन केंद्र), जोखिम भत्ता तथा पदनाम परिवर्तन जैसे प्रमुख मुद्दे रहे। वक्ताओं ने बताया कि CRMC में MLT कर्मचारियों को उचित पदोन्नति और वेतनमान नहीं मिल रहा है। वर्तमान में कई लैब टेक्नोलॉजिस्ट क्लास-3 के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी योग्यता डिप्लोमा और डिग्री धारकों की है। पदनाम परिवर्तन की मांग को लेकर प्रकोष्ठ ने कहा कि ‘लैब टेक्नीशियन’ से ‘मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट’ का नाम बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर हो चुका है, लेकिन छत्तीसगढ़ में अभी तक अमल नहीं हुआ। इससे प्रमोशन और भत्तों में वंचन हो रहा है।
जोखिम भत्ता पर चर्चा सबसे तीखी रही। संभागीय संयोजक रामेश्वर सिंह ने कहा, “कोविड काल में हमने बिना PPE किट के हजारों सैंपल हैंडल किए। हाइवा, एचआईवी, टीबी जैसे संक्रामक रोगों के सैंपल टेस्ट करते समय जीवन जोखिम में डालते हैं, लेकिन जोखिम भत्ता नाममात्र का है। केंद्र सरकार ने लैब टेक्नोलॉजिस्टों को 25 प्रतिशत जोखिम भत्ता दिया है, लेकिन राज्य स्तर पर यह मांग पूरी नहीं हुई।” उन्होंने उदाहरण दिया कि सरगुजा मेडिकल कॉलेज में कार्यरत MLT कर्मचारी प्रतिदिन 500 से अधिक सैंपल टेस्ट करते हैं, फिर भी उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन नहीं मिलता।
अन्य मांगों में लैब उपकरणों की कमी, स्टाफ की भारी भरकम, प्रशिक्षण शिविरों का अभाव और पदोन्नति में देरी शामिल हैं। जशपुर जिला अध्यक्ष ने बताया कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में बेसिक लैब मशीनें तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को जिला स्तर पर भेजना पड़ता है। सूरजपुर से आए सदस्यों ने पदनाम परिवर्तन के बाद प्रमोशन नीति में बदलाव की मांग उठाई। प्रांताध्यक्ष पांडे ने आश्वासन दिया कि प्रदेश स्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा और मुख्यमंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बैठक में संगठनात्मक दृष्टि से कई प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें MLT प्रकोष्ठ को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर इकाइयां गठित करना, धरना-प्रदर्शन की योजना और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान शामिल हैं। वक्ताओं ने जोर दिया कि लैब टेक्नोलॉजिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी हैं। बिना सटीक जांच के इलाज संभव नहीं। इसलिए उनकी मांगों का निराकरण प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। सरगुजा कलेक्टर कार्यालय के समक्ष आगामी सप्ताह में धरना देने का निर्णय लिया गया।
MLT Cell’s divisional meeting in Surguja
यह बैठक सरगुजा संभाग के स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मील का पत्थर साबित हुई। प्रकोष्ठ ने संकल्प लिया कि जब तक मांगे पूरी न हों, आंदोलन जारी रहेगा। बैठक का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां सभी ने एकजुट होकर नारेबाजी की। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी कहा कि मांगें उचित हैं, लेकिन बजट की कमी बाधा है। अब संगठन प्रदेश स्तर पर दबाव बनाएगा।
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