Massive demonstration in Jashpur against defamation notice on journalists: जशपुर: जशपुर में पत्रकारों पर मानहानि नोटिस के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हुआ, जिसमें जिलेभर के पत्रकार संगठनों ने जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक नूतन सिदार द्वारा लगाए गए आरोपों और धमकियों के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई। यह आंदोलन प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए किया गया और इसमें पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
Massive demonstration in Jashpur against defamation notice on journalists
जशपुर जिले में जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक नूतन सिदार ने कई पत्रकारों को कानूनी नोटिस थमाया है। इन नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि पत्रकारों द्वारा प्रकाशित समाचार तथ्यहीन और भ्रामक हैं, जिससे अधिकारियों की छवि धूमिल होती है। साथ ही, नोटिस में कहा गया है कि यदि पत्रकार 15 दिनों के भीतर माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कर करोड़ों रुपए का हर्जाना वसूला जाएगा। इस नोटिस में गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, जिसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम भी शामिल है।
पत्रकारों का विरोध
इस नोटिस से स्थानीय पत्रकारों में गहरा आक्रोश फैल गया है। पत्रकारों का कहना है कि यह प्रयास लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने और प्रचार-प्रसार में स्वतंत्रता को खत्म करने की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विभागीय अधिकारी अपने अधीनस्त कर्मचारियों की आड़ लेकर ऐसे कदम उठा रहे हैं ताकि पत्रकारों को डराया-धमकाया जा सके और उनकी आवाज़ को दबाया जा सके।
पत्रकारों ने कहा है कि यह मामला केवल जशपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की लोकतंत्र रक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता का मामला है। यदि इस पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे राज्यभर में उग्र आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रेस की आज़ादी के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
पत्रकार संगठनों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें नूतन सिदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उन्हें बर्खास्त करने और प्रदेश स्तरीय उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन पर कई वरिष्ठ एवं युवा पत्रकारों के हस्ताक्षर हैं, जो इस पूरे मामले में पत्रकार समुदाय की एकता को दर्शाते हैं।
पत्रकारों ने इस ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया कि जनसंपर्क विभाग का काम जनता और मीडिया के बीच सेतु बनाना होता है, परंतु अगर उसका कोई अधिकारी मीडिया पर इस तरह की आक्रामक कार्रवाई करता है तो यह मीडिया और लोकतंत्र के लिए खतरा है।
पत्रकारों के खिलाफ लगाए गए ये मानहानि के दावे साबित करना न्यायालय में आसान नहीं होगा, खासकर तब जब पत्रकार सत्य और प्रमाणित तथ्यों के आधार पर रिपोर्टिंग करते हैं। प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की जान है और अगर पत्रकारों को इस तरह के दमन का सामना करना पड़ता है, तो यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
जिलास्तर के पत्रकार अब इस मुद्दे को राज्य के अन्य पत्रकार संगठनों, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के सामने भी उठाने की योजना बना रहे हैं। वे इस मामले को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए इसे वापस लेने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। पत्रकारों ने यह साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव या धमकी से डरने वाले नहीं हैं और अपने पक्ष में संघर्ष जारी रखेंगे।
जशपुर जिले में पत्रकारों को भेजे गए मानहानि नोटिस ने न केवल पत्रकार समुदाय में आक्रोश को जन्म दिया है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बुनियाद पर गहरा सवाल भी खड़ा कर दिया है। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का यह कदम लोकतांत्रिक मूल्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ माना जा रहा है। पत्रकार संगठनों की एकजुटता और विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं। इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को एकजुट कर दिया है और अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल मचा रहा है।
इस व्यापक प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग बलवती हुई है, जो आने वाले दिनों में इस विषय पर और चर्चा और निर्णय लाएगी। पत्रकारों का संदेश साफ है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनकी आवाज़ दबाई नहीं जा सकती, और वे प्रेस की आज़ादी के लिए डटकर खड़े रहेंगे।
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