Major paddy scam unearthed in Surguja: सरगुजा:अंबिकापुर ।21 जनवरी 2026। सरगुजा जिले में धान खरीदी के नाम पर बड़ा घोटाला उजागर हो रहा है। अंबिकापुर से सटे खैरबार धान समिति केंद्र में प्रबंधक, ऑपरेटर और बिचौलियों की मिलीभगत से धान का अपहरण और फर्जीवाड़ा चरम पर है। किसानों को मामूली रिश्वत देकर गलत तरीके से धान कराया जा रहा है, जबकि वास्तविक आवक-जावक पंजी में ट्रैक्टरों के नंबर दर्ज हो रहे हैं। प्रशासन से निष्प्कष जांच की मांग तेज हो गई है।
जिले में धान खरीदी का मौसम चल रहा है, लेकिन कई केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं। खैरबार केंद्र सरगुजा के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां रोजाना सैकड़ों क्विंटल धान आता है, लेकिन कथित घोटाले से किसानों को नुकसान हो रहा है। स्थानीय किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रबंधक और बिचौलिये मिलकर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।
खैरबार धान समिति केंद्र में घोटाले का तरीका बेहद साधारण लेकिन चालाकी भरा है। किसान पिकअप वाहन या छोटे ‘हाथी’ (मिनी ट्रक) में धान लेकर आते हैं, लेकिन बिचौलिये इन्हें बाहर रोककर रिश्वत के लालच में धान अपने बड़े ट्रैक्टरों में भर लेते हैं। उदाहरण के तौर पर, ट्रैक्टर नंबर CG 15 DA 3856 का जावक पंजी में दर्ज होता है, जबकि वास्तविक धान किसानों के छोटे वाहनों से आया रहता है। इससे बिचौलिये MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का पूरा लाभ लेते हैं और किसानों को आधा पैसा देकर शेष हड़प लेते हैं।
किसानों का कहना है कि 25-30 रुपये प्रति क्विंटल का लालच देकर उन्हें चुप रहने को मजबूर किया जाता है। लेकिन बड़े पैमाने पर धान का ट्रांसफर होने से सरकारी गोदामों में फर्जी माल भरा जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, खैरबार केंद्र पर ही पिछले 15 दिनों में 500 टन से अधिक धान का फर्जीवाड़ा हुआ है। यह घोटाला न केवल किसानों की मेहनत को बर्बाद कर रहा है, बल्कि राज्य के धान खरीदी बजट को भी चूना लगा रहा है।
किसानों की पीड़ा
किसान भाइयों ने खुलासा किया है कि बिचौलिये ट्रैक्टरों से धान लाकर पंजी में अपना नाम दर्ज कराते हैं, जबकि असली किसान केवल गवाह बन जाते हैं। इससे MSP का लाभ बिचौलियों को मिलता है और किसान केवल मजदूरी जैसे पैसे पाते हैं। फसल की मेहनत बेकार जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। सरगुजा के आदिवासी किसान, जो धान पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।


बाइट 01 – किसान (बिहा राम टोप्पो, खैरबार गांव):
“हम पिकअप में धान लाते हैं, लेकिन प्रबंधक साहब बिचौलियों को बोलते हैं ट्रैक्टर से डाल दो। हमारा नाम तक नहीं लिखा जाता। 30 रुपये क्विंटल मिलते हैं, बाकी सब ले जाते हैं। ट्रैक्टर CG 15 DA 3856 रोज आता है, सब देखते हैं लेकिन कोई बोलता नहीं। प्रशासन को जागना चाहिए, वरना हमारी फसल बर्बाद हो जाएगी।”
स्थानीय किसान यूनियन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। वे मांग कर रहे हैं कि सभी केंद्रों पर CCTV कैमरे लगें और आवक-जावक का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाए।
सरगुजा जिला प्रशासन ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन स्थानीय स्तर पर SDM कार्यालय में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। निष्पक्ष जांच न होने से बिचौलिये बेखौफ हैं। जिले के अन्य केंद्रों जैसे रामानुजगंज और उदयपुर में भी इसी तरह के आरोप लग रहे हैं। विपक्षी दलों ने इसे ‘धान लूट का सरकारी संरक्षण’ करार दिया है।

बाइट 02 – SDM (SAB-डिविजनल मजिस्ट्रेट, अंबिकापुर):
“हम धान खरीदी केंद्रों पर नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। ऐसी शिकायतें गंभीर हैं। खैरबार केंद्र पर विशेष टीम भेजी जा रही है। ट्रैक्टर नंबर CG 15 DA 3856 समेत सभी वाहनों की जांच होगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। किसानों से अपील है कि वे सीधे हेल्पलाइन 1967 पर शिकायत करें। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।”
कलेक्टर ने आदेश जारी किए हैं कि सभी धान समितियों में बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य हो। मार्कfed विभाग ने प्रबंधकों को चेतावनी दी है। लेकिन किसान आशंकित हैं कि चुनावी साल में जांच ठंडे बस्ते में न डाल दी जाए।
Major paddy scam unearthed in Surguja
यह घोटाला सरगुजा के 2 लाख से अधिक किसकों को प्रभावित कर सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वर्ष 80 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है, लेकिन अनियमितताएं लक्ष्य को प्रभावित कर रही हैं। आर्थिक नुकसान के अलावा, किसानों में असंतोष बढ़ रहा है, जो ग्रामीण अशांति पैदा कर सकता है।
सरगुजा के लोक निर्माण और शहरी विकास की तर्ज पर धान खरीदी में भी पारदर्शिता जरूरी है। प्रशासन अगर कड़ाई से जांच करे तो इस घोटाले का पर्दाफाश आसान होगा। किसान भाईयों ने एकजुट होकर आंदोलन की चेतावनी दी है। यह मुद्दा विधानसभा में भी गूंज सकता है।
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