Lundra Former MLA Bhola Singh accused of land grabbing demand for removal of SDM: सरगुजा : सरगुजा जिले के लुंड्रा क्षेत्र में पूर्व विधायक भोला सिंह पर जमीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस मामले में आदिवासी ग्रामीणों ने एसडीएम को हटाने की मांग को लेकर पुरूष नगर में एक बड़ी रैली निकाली और राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस रैली का आयोजन आदिवासी एकता महासभा द्वारा किया गया, जिसमें महिलाओं और पुरूषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

Lundra Former MLA Bhola Singh accused of land grabbing demand for removal of SDM
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व विधायक भोला सिंह ने ग्राम दूंदू की भूमि को हड़पने का प्रयास किया है। इस मामले में ग्रामीणों के ऊपर फर्जी मुकदमे लगाए गए हैं, जिन्हें वापस लेने और पूर्व विधायक भोला सिंह को दंडित किए जाने की मांग की गई है। इसके अलावा, ग्राम छेरमुंडा में आदिवासी बेटी के साथ हुए मारपीट कांड में अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तारी और अपराधियों के दंडित किए जाने की भी मांग की गई है।
रैली का मार्ग सरईडीह चौक से शुरू होकर धौरपुर के मुख्य मार्गों से होता हुआ तहसील कार्यालय मैदान में पहुंचा, जहां पर समारोह के रूप में आमसभा की गई। इस आमसभा में आदिवासी समुदाय के कई विषयों को लेकर आवाज़ उठाई गई, जिसमें परसा केते आदिवासियों की जमीन की हड़पने की घटनाओं पर रोक और हसदेव जंगल की अनियमित कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग प्रमुख रही।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आदिवासी किसानों की भूमि पर अवैध कब्जा बनाने का प्रयास हो रहा है और उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। साथ ही झूठे मुकदमों के तहत आदिवासियों को परेशान किया जा रहा है। इसलिए एसडीएम को हटाने की मांग की जा रही है ताकि स्थानीय लोगों को न्याय दिलाया जा सके और उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।
यह मामला प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है और स्थानीय अधिकारियों द्वारा मामले की गंभीरता से जांच करने की बात कही गई है। आदिवासी एकता महासभा भी कानूनी कार्रवाई के साथ आगे बढ़ रही है ताकि ग्रामीणों के उत्पीड़न को रोका जा सके और उनके अधिकारों की रक्षा हो।
इस पुरानी लड़ाई में आदिवासी समुदाय ने अपनी जमीन और अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखा है। यह घटना छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकारों और जमीन विवाद की बड़ी तस्वीर का एक हिस्सा है, जहां राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन की अपेक्षा की जा रही है।
सरगुजा के आदिवासी इलाकों में इस प्रकार के विवाद मानवाधिकार, जमीन संरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों को बार-बार उभरकर सामने लाते हैं। इस मामले का शीघ्र समाधान ग्रामीणों के लिए न्याय और क्षेत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
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