लूडो के बहाने जुआ: सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में बढ़ता चलन : Ludo A growing Trend in Government Offices and Schools

Uday Diwakar
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Ludo A growing Trend in Government Offices and Schools : अम्बिकापुर :अंबिकापुर और कई शहरों में अब लूडो सिर्फ खेलने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह जुए के रूप में भी खेला जा रहा है। सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी, स्कूलों में शिक्षक और शहर के कई अन्य जगहों पर लोग लूडो को पैसे लगाकर खेलते हैं। इससे यह खेल जुए जैसा बन गया है।

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Ludo A growing Trend in Government Offices and Schools

सूत्रों से पता चला है कि कई जगहों पर कर्मचारी अपने काम के बीच में लूडो खेलते हैं और हार-जीत पर पैसे लगाते हैं। स्कूलों में भी कुछ शिक्षक और छात्र लूडो खेलते हैं, जिसमें पैसे या खाने-पीने की चीजें दांव पर लगती हैं। यह आदत छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों तक फैल रही है।

कानून की नजर से देखें तो भारत में जुआ और सट्टा गैरकानूनी हैं। जब किसी खेल में पैसे लगाए जाते हैं, तो वह जुए में गिना जाता है और उस पर रोक लगाई जा सकती है।

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मोबाइल गेम्स के बढ़ने से भी लूडो जुए जैसा हो गया है। लोग मोबाइल पर भी लूडो खेलकर पैसे लगाते हैं, जिससे खासकर युवा इसका शिकार हो रहे हैं।

सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है, लेकिन लूडो जैसे खेलों का जुए में बदलना चिंता का विषय है। इससे समाज और युवाओं पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए प्रशासन और समाज को चाहिए कि वे इस समस्या पर ध्यान दें और सही कदम उठाएं ताकि खेल का असली मकसद—मनोरंजन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा—बना रहे।

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