लखनपुर: फाइलेरिया दवा खिलाने से मिडिल स्कूल की 4 छात्राएं बेहोश : Lakhanpur: Four middle school girls faint after being administered filariasis medicine

Uday Diwakar
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Lakhanpur: Four middle school girls faint after being administered filariasis medicine: सरगुजा:​​​अंबिकापुर। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम कोसंगा में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान एक दर्दनाक घटना ने स्थानीय लोगों में हड़कंप मचा दिया। मिडिल स्कूल में मितानिन द्वारा बच्चों को टैबलेट खिलाने के महज कुछ मिनटों बाद चार स्कूली छात्राएं अचानक बेहोश हो गईं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल पहुंची थी और निर्धारित खुराक के तहत बच्चों को दवा दी गई।घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों और शिक्षकों ने तत्काल प्रभावित छात्राओं को लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और सभी को घर भेज दिया गया। हालांकि, दो छात्राओं की तबीयत दोबारा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज जारी रखा गया है।फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का महत्वफाइलेरिया, जिसे आमतौर पर हाथीपांव के नाम से जाना जाता है, एक मच्छर जनित बीमारी है जो लसीका तंत्र को प्रभावित करती है।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान के तहत फरवरी माह में हर साल डीईसी (डाइएथाइल कार्बामाजाइन सिट्रेट) और एलबेंडाजोल जैसी दवाएं वितरित की जाती हैं। सरगुजा जिले में भी 10 फरवरी से यह अभियान शुरू हो चुका है, जिसमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और घर-घर जाकर दवा खिलाई जा रही है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता। हालांकि, कुछ मामलों में हल्के लक्षण जैसे चक्कर आना, उल्टी या सिरदर्द दिख सकते हैं, जो कीड़ों के मरने से शरीर में प्रतिक्रिया के कारण होते हैं। बोकारो जैसे जिलों में सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि एक साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाती। कोसंगा की घटना में भी डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में दवा से एलर्जी या खाली पेट सेवन को संभावित कारण बताया है।

कोसंगा मिडिल स्कूल में पढ़ने वाली चार छात्राएं—जिनमें कक्षा 6 से 8 तक की लड़कियां शामिल हैं—को मितानिन ने सुबह 10 बजे अभियान के तहत टैबलेट दी। दवा खाने के 15-20 मिनट बाद ही उन्हें चक्कर, पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। अचानक बेहोश हो जाने से स्कूल प्रबंधन ने ग्रामीणों की मदद से उन्हें लखनपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां इंजेक्शन और दवाओं से इलाज किया गया।

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दो छात्राओं को शाम तक छुट्टी मिल गई, लेकिन बाकी दो को रात भर निगरानी में रखा गया।ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दवा देने से पहले बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री चेक नहीं की गई और न ही पानी के साथ दवा दी गई। एक ग्रामीण ने बताया, “बच्चे स्कूल में ही थे, तभी बेहोश हो गए। अगर समय पर अस्पताल न ले जाते तो जान पर बन सकती थी।” जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और मितानिन को नोटिस जारी किया गया है।जिले में अभियान की स्थितिसरगुजा जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए व्यापक तैयारी की गई है।

लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 फरवरी को सामूहिक दवा सेवन का शुभारंभ हुआ, जिसमें नगर पंचायत अध्यक्ष सहित अधिकारी मौजूद थे। जिले के 2100 से अधिक बूथों पर पहले चरण में लक्ष्य से अधिक कवरेज हासिल हुआ है। हालांकि, कोसंगा जैसी घटनाओं से अभियान पर सवाल उठने लगे हैं। इसी तरह बिहार और झारखंड के कुछ जिलों में भी दवा के बाद बच्चों के बेहोश होने की खबरें आई हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में वे सामान्य प्रतिक्रिया बताई गई।

Lakhanpur: Four middle school girls faint after being administered filariasis medicine

दवा खाली पेट न लें, पानी के साथ लें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जिले में अब तक कोई मृत्यु की रिपोर्ट नहीं है, लेकिन जागरूकता अभियान तेज किया गया है।ग्रामीणों और अभिभावकों की प्रतिक्रियाघटना के बाद कोसंगा गांव में ग्रामीणों ने स्कूल का घेराव किया और अभियान रोकने की मांग की। अभिभावक रमा यादव ने कहा, “हमारे बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं, न कि बीमार होने। विभाग को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

स्थानीय मुखिया ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। दूसरी ओर, कुछ ग्रामीण अभियान का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि फाइलेरिया से जिले में सैकड़ों प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग की सफाई लखनपुर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर ने बताया कि बच्चे खतरे से बाहर हैं। जांच में दवा की खुराक सही पाई गई, लेकिन संभवत: एलर्जी या डिहाइड्रेशन कारण रहा। विभाग ने सभी मितानिनों को ट्रेनिंग दी है और आगे सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने कहा, “यह दुर्लभ मामला है, अभियान जारी रहेगा क्योंकि फाइलेरिया से बचाव जरूरी है।” समान घटनाओं पर बोकारो सीएस की तरह यहां भी साइड इफेक्ट नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक प्रतिक्रिया बताया जा रहा है।

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