कुसमी एसडीएम करुण डहरिया हिरासत में: मारपीट से ग्रामीण की मौत, इलाके में तनाव : Kusmi SDM Karun Dahariya detained

Uday Diwakar
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Kusmi SDM Karun Dahariya detained: बलरामपुर:​​बलरामपुर रामानुजगंज जिले के कुसमी क्षेत्र में देर रात हुई हिंसक मारपीट ने पूरे प्रशासन को हिला दिया है। कुसमी के एसडीएम करुण कुमार डहरिया को एक ग्रामीण रामनरेश राम की मौत के मामले में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

रविवार देर रात करीब 2 बजे कुसमी एसडीएम करुण कुमार डहरिया थार वाहन में नायब तहसीलदार पारस शर्मा और तीन अन्य लोगों के साथ हंसपुर ग्राम पंचायत पहुंचे। उनका उद्देश्य बॉक्साइट के अवैध खनन वाले ट्रक को पकड़ना था। गांव वालों ने ट्रक को रोक लिया था, लेकिन जैसे ही टीम वहां पहुंची, ट्रक चालक भाग निकले। इसी दौरान नदी किनारे खेत से लौट रहे तीन निर्दोष ग्रामीण—62 वर्षीय रामनरेश राम पिता रेघा उरांव, 60 वर्षीय अजीत पिता लालचंद उरांव और 20 वर्षीय आकाश पिता रूपसाय अगरिया—टीम के सामने आ गए।

आरोप है कि एसडीएम डहरिया ने उन्हें अवैध खनन से जोड़ लिया और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। नायब तहसीलदार और साथ आए अन्य लोग भी मारपीट में शामिल थे। घायलों को थार में ही बैठाकर कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। रास्ते में रामनरेश की हालत बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अजीत और आकाश का इलाज जारी है।

सोमवार सुबह घटना की सूचना मिलते ही कुसमी थाने और अस्पताल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। बलरामपुर एडिशनल एसपी विश्वदीपक त्रिपाठी जांच के लिए कुसमी पहुंचे। पुलिस ने हत्या के आरोप में एसडीएम करुण कुमार डहरिया, नायब तहसीलदार पारस शर्मा सहित पांच लोगों को हिरासत में ले लिया। फिलहाल राजपुर थाने में रखा गया है, लेकिन बड़े अधिकारी होने से औपचारिक गिरफ्तारी में देरी हो रही है। मृतक का पोस्टमॉर्टम चल रहा है और घायलों के बयान दर्ज हो रहे हैं।

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एसडीएम करुण डहरिया पहले भी विवादों में रहे हैं। स्थानीय लोग उन्हें बेगुनाहों को परेशान करने और रिश्वतखोरी का आरोप लगाते रहे हैं। इस बार प्राइवेट गुर्गों के साथ रात में खनन जांच के नाम पर जाना सवाल उठा रहा है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में यह घटना तनाव बढ़ाने वाली है। आदिवासी संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Kusmi SDM Karun Dahariya detained

कुसमी थाना और स्वास्थ्य केंद्र छावनी में बदल गए हैं। जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दे रहा है। ग्रामीणों में आक्रोश है, लेकिन पुलिस बैरियर तनाव रोक रहे हैं। राजनीतिक दलों ने भी बयानबाजी शुरू कर दी है। यह घटना छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर रही है, जहां अवैध खनन रोकने के नाम पर आम ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा।

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