Jashpur Police vigilant against drug abuse: One-day workshop organized on NDPS Act: जशपुर: नशीली दवाओं और मनोविकारक पदार्थों के खिलाफ जशपुर जिले की पुलिस ने नई रणनीति अपनाई है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय जशपुर के मीटिंग हॉल में एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों की विवेचना को अधिक प्रभावी, विधिसम्मत और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिले के सभी पुलिस अधिकारियों, थाना प्रभारियों और विवेचकों को नशा तस्करी के मामलों में मजबूत जांच का प्रशिक्षण दिया गया।
यह कार्यशाला नशे के खिलाफ जंग को तेज करने का महत्वपूर्ण कदम है। जशपुर आदिवासी बहुल जिला होने से नशे की तस्करी एक बड़ी चुनौती है। कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं, तलाशी प्रक्रिया, सबूत संग्रह और अदालत में मजबूत केस तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई। एसपी ने कहा कि सशक्त विवेचना से तस्करों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य एनडीपीएस प्रकरणों में होने वाली कमजोरियों को दूर करना था। अक्सर नशा जब्ती के बाद प्रकरण अदालत में कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे आरोपी बच निकलते हैं। प्रशिक्षण में धारा 50 के तहत व्यक्तिगत तलाशी के नियम, धारा 42 के अनुसार वारंट रहित छापेमारी की शर्तें और 72 घंटे में रिपोर्टिंग पर जोर दिया गया। अधिकारियों को सिखाया गया कि कैसे फॉरेंसिक साक्ष्य और चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखें।
एनडीपीएस एक्ट के तहत व्यावसायिक मात्रा में नशे पर 10 से 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। कार्यशाला में प्रतिरक्षा के प्रावधान जैसे धारा 64 और नशेड़ियों के लिए इलाज की छूट पर भी प्रकाश डाला गया। जिले के 200 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें सीएसपी, टीआई और एसआई शामिल थे। विशेषज्ञ वक्ताओं ने केस स्टडी के माध्यम से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी।
कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रियात्मक सुरक्षा पर फोकस रहा। अधिकारियों को बताया गया कि तलाशी से पहले व्यक्ति को राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने का अधिकार बताना अनिवार्य है। गिरफ्तारी के 48 घंटे में वरिष्ठ को रिपोर्ट देना जरूरी है। नशे की पहचान, मात्रा माप और लैब रिपोर्ट की अहमियत पर सत्र आयोजित हुए।
जशपुर में गत वर्ष 150 से अधिक एनडीपीएस केस दर्ज हुए, जिनमें गांजा, ब्राउन शीट और स्मैक प्रमुख थे। कार्यशाला में सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी रोकने की रणनीति पर चर्चा हुई। ड्रोन निगरानी, इंटेलिजेंस नेटवर्क और ग्रामीण मुखबिरों की भूमिका पर सुझाव आए। एसपी ने निर्देश दिए कि सभी थानों में एनडीपीएस डेस्क स्थापित हों।
जशपुर के एसपी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति अभियान में पुलिस अग्रणी होगी। जिला नक्सल प्रभावित होने से तस्करी के रास्ते जंगल हैं, लेकिन अब सशक्त विवेचना से अपराधी फांसी की सजा तक पा सकते हैं। पिछले माह पत्थलगांव में 50 किलो गांजा जब्ती इसका उदाहरण है। एसपी ने लक्ष्य रखा कि 2026 में एनडीपीएस कन्विक्शन रेट 80 प्रतिशत पहुंचे।
कार्यशाला में महिला अधिकारियों को विशेष सत्र दिया गया, क्योंकि नशे का शिकार युवतियां भी हो रही हैं। बाल अपराधियों पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू करने के नियम सिखाए गए। समापन में क्विज और सर्टिफिकेट वितरण हुआ।
Jashpur Police vigilant against drug abuse: One-day workshop organized on NDPS Act
जशपुर में नशा तस्करी झारखंड और ओडिशा सीमा से आती है। युवाओं में ब्राउन शीट का चलन बढ़ा है, जो दुर्घटनाओं का कारण बन रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में गांजा की खेती पकड़ी जाती है। पुलिस ने 2025 में 200 किलो से अधिक नशीला पदार्थ बरामद किया। कार्यशाला इसी चुनौती से निपटने के लिए है।
एनजीओ के सहयोग से नशा मुक्ति केंद्र मजबूत होंगे। स्कूलों में जागरूकता अभियान तेज होंगे। जिले की 70 प्रतिशत आबादी आदिवासी है, जिन्हें नशे से बचाना प्राथमिकता है। प्रशिक्षित अधिकारी अब फील्ड में उतरेंगे।
यह कार्यशाला जशपुर पुलिस को नशा तस्करों पर शिकंजा कसने में सक्षम बनाएगी। प्रकरणों की गुणवत्ता सुधरेगी, जिससे न्याय मिलेगा। एसपी ने मासिक रिव्यू की घोषणा की। जागरूकता रथ ग्राम पंचायतों तक जाएंगे। नशे के खिलाफ जशपुर नजीर बनेगा।
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